नयी दिल्ली। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कोरोना वायरस के चलते हुए देशव्यासी लॉकडाउन का बुरा प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और इससे बाहर निकलना इतना आसान नहीं होगा। बंद के चलते कई सारे सेक्टरों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति को देखते हुए कम्पनियों ने जारी किए गए ऑफर लेटर को टालने का या फिर खारिज करने का विचार बना लिया हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सिर्फ नए कर्मचारियों को रखने बस की बात नहीं बल्कि पुराने कर्मचारियों पर भी इसका असर पड़ सकता है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक एग्जिक्यूटिव रिक्रूटमेंट फर्म का मानना है कि ऐसे पिछले 10 दिनों में कई बार देखने को मिला है। 

एग्जिक्यूटिव रिक्रूटमेंट फर्म के मुताबिक कम्पनियां नौकरी में कर्मचारी को रखने के प्रस्ताव को टाल रही है या फिर वापस ले रही है। जिसका मतलब साफ है कि आने वाले दिन और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित होने वाले हैं। एग्जिक्यूटिव रिक्रूटमेंट फर्म एंटल इंटरनैशनल नेटवर्क के प्रबंध निदेशक (इंडिया) जोसेफ देवासिया ने कहा कि इन 10 दिनों में दृश्य डरावना हो गया है। हमने पांच ऐसे मामले देखे जो परेशान कर देने वाले थे।

उन्होंने कहा कि इनमें से दो लोग तो ऐसे थे जिन्हें कम्पनी ने नौकरी पर रख लिया था और वह प्रोबेशन पीरियड पर थे लेकिन कम्पनी ने उनके ऊपर से भी अपना हाथ खींच लिया। जोसेफ देवासिया ने कहा कि जो कम्पनियां लॉकडाउन के चलते घाटे का सामना कर रही हैं वो कम्पनियां काम पर रखने के अनुबंध का सम्मान नहीं कर सकती हैं। 

उन्होंने कम्पनियों का नाम लिए बिना कहा कि बहुत सी कम्पनियों में रिक्तियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। यहां तक की कम्पनियों ने हायरिंग की प्रक्रिया को भी रोक दिया है। या कहें कि ठंडे बस्ते में डालकर छोड़ दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक BTI के एक अधिकारी ने बताया कि हालात बहुत खराब हो गए हैं और उसका असर हायरिंग कम्पनियों के राजस्व पर भी पड़ा है। हर दिन मुझे क्लाइंट्स से यह जानकारी मिलती है कि भुगतान में देरी हो रही है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए सरकार को लॉकडाउन का निर्णय लेना पड़ा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कम्पनियों से अपील की थी कि विपत्ति की इस घड़ी में अपने कर्मचारियों के प्रति संवेदना दिखाएं और उन्हें काम से न निकालें।