उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस ने कहा है कि कार्यपालिका ही कोरोना जैसी महामारी से सही तरह से निपट सकता है। CJI ने PIL पर सही तरीके से विचार नहीं करने और सुप्रीम कोर्ट पर सरकार की लाइन पर चलने के आरोप को निराधार बताया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण ये क्राइसिस का वक्त है ऐसे में कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को इस पर काबू पाने के लिए सौहार्दपूर्ण तरीके से काम करना होगा। मीडियाकर्मी से बातचीत में चीफ जस्टिस ने उक्त आशय जाहिर किया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, ‘मैन, मनी और मैटीरियल का बेहतर तरीके से उपयोग कैसे किया जाए और इसमें वरीयता क्या होनी चाहिए, ये देखना कार्यपालिका का का काम है। हम फील्ड में नहीं हैं, ये भी सच है। हमारे से इस संकट के वक्त जो बन पड़ रहा है वह कर रहे हैं।’

चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट में कानूनी लड़ाई का दबाव कम किया गया है। दरअसल नए विवाद खड़े नहीं हो रहे हैं, चोर चोरी नहीं कर रहा है। इसलिए क्राइम रेट कम हो गया है। सीजेआई ने कहा कि पुलिस ऐक्शन में भी कमी आई है। जिन वजहों से कानूनी विवाद होता है, उन वजहों में कमी आई है। किसी भी महामारी जैसी स्थिति को कार्यपालिका ही बेहतर तरीके से डील कर सकती है। जूडिशरी पर सरकार की लाइन लेने के आरोप पर उन्होंने कहा, ‘कोर्ट के सामने जब भी मामला आया है तो कार्यपालिका से सवाल हुआ है कि उन्होंने क्या स्टेप लिए हैं। इसमें संदेह नहीं है कि कार्यपालिका लोगों के जीवन को खतरे में नहीं डालने की इजाजत दे सकता। अगर ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर कोर्ट उसमें दखल देगा।’