अपरिभाषित जिंदगी जीवन को परिमाण और परिणाम देती हुई ।खुश रहना और दूसरों को खुश रखना क्या जीवन के यही मायने हो सकते हैं ।मगर यह एक सामान्य जवाब है क्योंकि जीवन को परिभाषित करने तथा परिणाम को खोजने के कई मायने और कई जवाब हो सकते हैं जैसे एक उद्देश्य ,कोई जीवन का लक्ष्य , तथा कुछ पाने या खोजने की तलाश में खुद को सक्षम बनाना।

कुछ लोग जो जीवन और आनंद को पर्याय मानते हैं। परंतु ऐसा नहीं हैं।वास्तविकता कुछ यूं ही परे है जो सत्य और असत्य को परिभाषित करती है ।परंतु अब सत्य और असत्य जानने की इच्छा जो पूर्णतः स्वभाविक है, यह भी विभिन्न हो सकती है ।समय-समय,मनुष्य- मनुष्य तथा घटना पूर्णतः घटना के विरुद्ध या समर्थ करते हुए सत्य और असत्य को भी परिभाषित करना उतना ही कठिन हो सकता है जितना कि जीवन को परिभाषित करना।।

लेखिका : भारती भारद्वाज (BA,MA, B.Ed, M.Ed :अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी)