संकट की ये घड़ी कड़ी है,
विपदा जग पर आन पड़ी है।
एकजुट होकर दिखला दो,
मानवता की ओज बड़ी है।।
मंदिर-मस्जिद बंद पड़े है,
ईश्वर भी रूप बदल रहा है।
खाकी पहने सावधान करे,
वो पहन सफेदी लड़ रहा है।।
घर में सुरक्षित हर जन होगा,
ना आपदा को न्यौता दो।
विपत्ति में चाैकों नहीं,
तुम विपत्तियों को चाैका दो।।

Surbhi Singh
Student of D.EL.ED

Krishna College, Bijnor