बिहारीगढ/सहारनपुर। आंवरा कुत्तों ओर बंदरो के हमलो के आंतक से बिहारीगढ क्षेत्र के लोग भयभीत है। बिहारीगढ़ कस्बे में बंदरो का आंतक थमने का नाम नहीं ले रहा है कस्बे में आए दिन बंदरो के हमले की वारदात होती रहती हैं जंगलों से निकल कर बंदर आबादी की ओर आ रहे हैं लॉकडाउन के दौरान जंगलों से निकलकर बंदर घरों में घुसकर उत्पात मचाते हैं व घरो की जरूरतों के सामान को पूरी तरह  तहस-नहस कर देते है। ओर रोकने जाने पर उन पर धावा बोल कर उन्हे आतंकित करना शुरू कर दिया हैं ,कस्बे में आवरा कुत्तों व बन्दरों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है, जिसके कारण इनके काटने से लोगो को रैबीज का खतरा भी बना रहता है। रैबीज की वैक्सीन ना तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध है और ना ही आसपास के क्षेत्र में ,लॉकडाउन के कारण ग्रामीण जिला अस्पताल जाने मे असमर्थ हैं, कोरोना पोजिटिव मरीजो के आइसोलेशन के कारण जिला चिकित्सक अन्य मरीजो को देख नही पा रहे हैं जिला चिकित्सक को कोरोना सक्रमंण के बढाने का डर भी इसका कारण हो सकता है, इसी कारण  ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, कोरोना महामारी संक्रमण के चलते हुए लोगों में डर का माहौल बना हुआ है इस कारण ग्रामीण बन्दरों के काटने पर भी सक्रमंण के डर से नजदीकी अस्पताल जाने में भयभीत हो जाते हैं,  ग्रामीणो ने इस संबंध में प्रशासन से कई बार शिकायत की हैं, परन्तु प्रशासन गहरी नीद में सोया है शायद यही कारण है कि आला अधिकारी शिकायत करने के बावजूद भी  शिकायतों पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझते। क्षेत्रवासियों के लिए  दिन हो या रात जान का खतरा बना हुआ है। बंदरों का झुंड ग्रामीणों की छतों पर दिन रात घूमता रहता है छत पर बैठी महिलाओ व बच्चों पर पीछे से हमला कर देते हैं। रात में बंदर का झुंड बहुत ज्यादा आक्रमंक हो जाते हैं बिहारीगढ़ कस्बे के ग्रामीण में सौरभ, तनप्रीत कौर सिद्धू, कन्हैया काम्बोज, युग काम्बोज, रुद्र काम्बोज, सुदेश सैनी, हरकीत कौर आदि इन बन्दंर के आंतकित का शिकार हो चुके हैं। इस संबंध मे वन मंत्री से ग्रामीणो ने शिकायत की उन्होंने कहा कि जल्दी ही कार्रवाई की जाएगी। …शान आलम एड.