नई दिल्ली : आज के तकनीकी युग में तकनीक ने जीवन को आसान बना दिया है, इसके अनगिनत फायदे हैं तो इसके नुकसान भी कम नहीं हैं। तकनीक के अधिक इश्तेमाल का बुरा प्रभाव मनुष्य के मस्तिष्क पर पड़ता है। टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इन दिनों लोगों में मल्टीटास्किंग की लत लग रही है। स्मार्टफोन दिनों दिन स्मार्ट होते जा रहे हैं और इनमें अनगिनत फीचर्स बढ़ते जा रहे हैं। वहीं फोन, लैपटॉप व अन्य गैजेट लोगों को एक साथ इश्तेमाल करने की भी आदत होती है। ग्रुप चैटिंग, ग्रुप वीडियो कॉलिंग, गेम्स, सोशल मीडिया, जैसे अनगिनत माध्यमों के कारण टेक्नो मल्टीटास्किंग बढ़ी है, जो कि बिलकुल भी सही नहीं है। टेक्नो मल्टीटास्किंग का सबसे बुरा असर दिमाग पर पड़ता है

याददास्त होने लगती है कमजोर

इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है यादाद्स्त पर। एक शोध के मुताबिक जब आप एक समय में एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करती हैं, तो आपका मस्तिष्क उस जानकारी को हिप्पोकैम्पस में संग्रहीत करता है, लेकिन एक साथ कई गैजेट्स पर काम करने से किसी भी बात का ध्यान नहीं रह जाता, जिसके कारण वह बात याद नहीं रह जाती। इसके कारण आपको लॉन्ग टर्म मेमोरी इश्यूज भी हो सकते हैं।

कम होती है प्रॉडक्टिविटी

मानव मस्तिष्क फोन और कंप्यूटर तेज नहीं हो सकता, मल्टीटास्किंग से प्रॉडक्टिविटी 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है। जब आप टेक्नो मल्टीटास्किंग करती हैं तो इससे आपकी मानसिक क्षमता कम होती जाती है, जिसके चलते आपको टास्क के बीच स्विच करने में परेशानी होती है। साथ ही मल्टीटास्किंग जल्दी थका देती है, जिसके चलते आप कोई भी काम ठीक तरह से पूरा नहीं कर पाती।

तनाव व चिड़चिड़ापन

मल्टीटास्किंग से प्रॉडक्टिविटी कम होने के साथ ही स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होता है। टेक्नो मल्टीटास्किंग करने वाली महिलाओं में तनाव व चिड़चिडे़पन की शिकायत अधिक रहती है। तकनीक के कई फायदे हैं लेकिन इसका इश्तेमाल सावधानी के साथ करें।