नई दिल्ली। दुनिया भर में महामारी बन चुकी कोरोना वायरस की बीमारी का असर हर वर्ग और हर क्षेत्र पर पड़ा है, खेल जगत में भी इसका प्रभाव काफी बड़े स्तर पर देखने को मिला। इस महामारी का असर यह हुआ कि भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल ) को अनिश्चितकाल तक के लिये स्थगित कर दिया गया है। आईपीएल के जरिये बीसीसीआई हर साल अरबों रुपये की कमाई करता है। न सिर्फ कमाई के लिहाज से बल्कि भारतीय क्रिकेट में अगली पीढ़ी के युवा खिलाड़ियों की तैयारी के लिहाज से भी आईपीएल काफी अहम रोल निभाता रहा है। 2008 में शुरु हुए आईपीएल की बदौलत टीम में अब तक कई युवा खिलाड़ियों की एंट्री हो चुकी जो कि अपने टैलेंट से हर साल दर्शकों का मनोरंजन करते हैं।

इतना ही नहीं बीसीसीआई और चयनकर्ताओं के लिये आईपीएल एक बड़ा मंच साबित हुआ है जहां पर वो उभरते टैलेंट पर नजर रखते हैं। 2007 की टी20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आईपीएल के प्रस्ताव को मंजूरी दी जिसके चलते भारतीय टीम को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी। हालांकि सोचने की बात है अगर 1983 का विश्व कप जीतने के बाद बीसीसीआई ने आईपीएल का आयोजन किया होता तो क्या होता। आज शायद भारत के पास कुछ और आईसीसी खिताब की ट्रॉफीज होती। आइपीएल ने भारतीय खिलाड़ियों की शोहरत को एक अलग स्तर पर पहुंचा दिया है।

ऐसे में अगर आईपीएल का आयोजन 80-90 के दशक में हुआ होता तो कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन पर पैसों की बरसात देखने को मिलती। आइये एक नजर उन 10 भारतीय खिलाड़ियों पर डालते जो 80-90 के दशक में हुए आईपीएल में धमाल मचाकर खूब पैसा कमा सकते थे।

कपिल देव (Kapil Dev)

अगर 80-90 के दशक में आईपीएल की शुरुआत होती तो सबसे महंगे बिकने वाले भारतीय खिलाड़ियों की लिस्ट में भारतीय टीम के सबसे महान कप्तान और अपने जमाने के सबसे महान ऑलराउंडर खिलाड़ियों में से एक कपिल देव का नाम जरूर आता। मैदान पर गेंद को स्विंग कराने की बात हो या लंबे-लंबे छक्के लगाने की कला, इन दोनों ही बातों में कपिल देव का कोई सानी नहीं था।

कपिल देव मैच में नयी गेंद से शुरूआत करने के अलावा बीच के और आखिरी ओवरों में गेंद डालने में माहिर थे। बल्ले से भी उन्हें आखिरी ओवरों में गेंद को सीमा रेखा से पार पहुंचाने में महारत हासिल थी। एक ऐसे शानदार खिलाड़ी और कप्तान के लिये आईपीएल की कोई भी टीम अच्छी खासी बोली लगाने में पीछे नहीं हटती।

कृष्णामाचारी श्रीकांत (K Srikkanth)

कृष्णामाचारी श्रीकांत को अपने युग के आगे का खिलाड़ी माना जाता रहा है। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी को देखने के लिये दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ मैदान पर जुटती थी। वह बिना हेलमेट के एंडी रोबर्ट्स की गेंद पर पुल शाट खेल कर छक्का लगाते थे तो पैट्रिक पैटरसन पर हुक कर के गेंद को सीमा रेखा के पार पहुंचाते थे।

80 के दशक में जब बल्लेबाज तेजी से रन बनाने से ज्यादा विकेट बचाने के प्रयास में लगे होते थे तब भी उन्होंने लगभग 100 के स्ट्राइक रेट से रन बनाये हैं। अगर उस जमाने में आईपीएल होता तो शायद चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम नीलामी के दौरान उन्हें अपने टीम में रखती और सीजन दर सीजन अपनी टीम में बनाये रखने के लिये ज्यादा पैसे भी लुटाती।

विनोद कांबली (Vinod Kambli)

सचिन तेंदुलकर के साथ बल्लेबाजी करने के लिये मैदान पर उतरने वाला यह क्रिकेटर उस जमाने के लिये सहवाग कहा जा सकता है। विनोद कांबली का बल्लेबाजी अंदाज विस्फोटक था और अगर यह कहा जाये कि वह उस जमाने में आज के जमाने का क्रिकेट खेलते थे तो बिल्कुल गलत नहीं होगा।

विनोद कांबली न सिर्फ अपनी बल्लेबाजी से बल्कि अपने स्टायलिश अंदाज के लिये भी दर्शकों में काफी चर्चित थे। वह उस जमाने में स्पिनर्स के खिलाफ इतने बड़े-बड़े शॉट खेलते नजर आते थे कि देखते ही बनता था। इस स्टॉयलिश और विस्फोटक खिलाड़ी को मुंबई इंडियन्स की टीम सचिन तेंदुलकर के साथ जरूर शामिल करना चाहती।

मोहम्मद अजहरुद्दीन (Mohammad Azharuddin)

लंबे समय तक के लिये भारतीय टीम की कप्तानी संभालने वाले और कलाई के जादूगर के नाम से मशहूर मोहम्मद अजहरुद्दीन आईपीएल में सनराईजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राईडर्स की टीम के लिये एक अच्छा चुनाव होता।

मोहम्मद अजहरुद्दीन को शुरुआती कुछ ओवरों के बाद मध्यक्रम में तेजी से रन बनाने के लिये जाना जाता है। वह स्पिनर्स के खिलाफ कमाल का फुटवर्क रखते थे जो कि उन्हें अन्य बल्लेबाजों से अलग रखता है। वह फील्डिंग के जरिये भी टीम में अपना भरपूर योगदान देते थे।

अजय जडेजा (Ajay Jadeja)

मौजूदा समय में एमएस धोनी जिस तरह से कप्तानी और फिनिशर का रोल अदा करते हैं, ठीक उसी तरह अजय जडेजा भी अपने जमाने में देश के सबसे समझदार क्रिकेटर में से एक माने जाने थे। जडेजा के पास ओपनिंग करने के साथ ही आखिरी ओवरों में फिनिशर का रोल अदा करने की शानदार क्षमता थी।

जडेजा फील्डिंग में काफी फुर्तीले और जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी में भी हाथ आजमा सकने वाले खिलाड़ियों की श्रेणी में आते थे। उनकी यह काबिलियत उन्हें दिल्ली कैपिटल्स के लिये अच्छा दावेदार बनाती है।

मनोज प्रभाकर (Manoj Prabhakar)

मनोज प्रभाकर आईपीएल के उन कुछ एक खिलाड़ियों में से एक होते जिन्हें उनकी गेंदबाजी के दम पर अच्छी खासी रकम मिलती है। प्रभाकर के पास नयी गेंद से स्विंग और आखिरी ओवर्स में धीमी गति से गेंद फेंकने की कला थी जो कि उन्हें आईपीएल का परफेक्ट उम्मीदवार बनाती है।

मनोज प्रभाकर के पास बड़े शॉट खेलने की क्षमता ज्यादा नहीं थी लेकिन मुश्किल वक्त में अच्छी साझेदारी की जरूरत हो तो वह अच्छे से निभा सकते थे। उनकी प्रतिभा को देखते हुए राजस्थान रॉयल्स की टीम उन्हें अपने खेमे में शामिल करना चाहती।

रोबिन सिंह (Robin Singh)

कपिल देव की ही तरह रोबिन सिंह भी उन भारतीय खिलाड़ी की लिस्ट में शामिल थे जिन्हें हर फ्रैंचाइजी टीम अपने खेमे में शामिल करने के लिये पैसों की बरसात कर सकती थी। रोबिन सिंह एक उम्दा ऑलराउंडर थे जिसके पास बड़े शॉट खेलने से लेकर, अच्छी मीडियम पेस और फील्डिंग में जबरदस्त फुर्ती की कला थी।

उनके लिए शायद सनराइजर्स हैदाराबाद की टीम सबसे सटिक होती जो हरफनमौला खिलाड़ियों पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

रवि शास्त्री (Ravi Shastri)

मौजूदा समय में भारतीय टीम के कोच और पूर्व हरफनमौला खिलाड़ी रवि शास्त्री के लिये चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम सबसे अच्छी साबित हो सकती थी। वह इस टीम के लिये वही काम करते जो कि शेन वॉटसन किया करते हैं।

रवि शास्त्री के पास बायें हाथ से धीमी गेंदबाजी और पारी का आगाज करने से लेकर किसी भी क्रम पर बल्लेबाजी करने की क्षमता थी जो कि उन्हें किसी भी खिलाड़ी के मुकाबले ज्यादा खास बनाती है।स्पिनरों के खिलाफ आसानी से छक्का लगाने की काबिलियत से वह इस प्रारूप के लिए चहेते क्रिकेटर होते।

मनिंदर सिंह (Maninder Singh)

जब बायें हाथ का यह स्पिनर अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेल रहा था तब उसकी गेंद की फ्लाइट सटीक होती थी और वह गेंद को सही जगह टप्पा खिलाते थे। आज के दौर की टी20 क्रिकेट में भी उनकी गेंदबाजी के खिलाफ रन बनाना मुश्किल होता। किंग्स इलेवन पंजाब को उन्हें टीम में जगह देने में कोई परेशानी नहीं होती।

जवागल श्रीनाथ (Javagal Srinath)

अपने समय में भारत के सबसे तेज गेंदबाजों में से एक जवागल श्रीनाथ के पास गति के साथ उछाल और गेंद को अंदर लाने की क्षमता थी। वह किसी भी कप्तान के लिए चहेते गेंदबाज होते। वह शुरुआती ओवरों में टीम को विकेट दिलाते और बल्ले से भी कभी-कभी योगदान दे सकते थे। वह आरसीबी के लिए सही चयन होते।