कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर ।
समय पाय तरुवर फरै, केतिक सींचौ नीर 

कवि कहते हैं- “क्यों अपना धैर्य खोते हो? तुम्हारे सारे कार्य उचित समय पर संपन्न होगें, चिंता करने की कोई बात नहीं है। जिस प्रकार पेड़ को बहुत ज्यादा सींचने से तुरंत फल नहीं मिलते, पेड़ एक निश्चित अवधि के बाद स्वयं फलते फूलते हैं अर्थात थोड़ा सब्र करो और तुम्हारे सारे कार्य भी पूरे हो जाएंगे।

शांतिपूर्ण प्रगति और तनावपूर्ण सफलता के बीच का अंतर मालूम स्पष्ट होता है। जीवन में इंतजार करने और बेसब्र होने,दोनों में चुनाव करना ही तो अत्यंत महत्वपूर्ण है। परेशान होना, समय न कटना , अधीरज होना, प्रायः कोई फल नहीं दे सकता। यह केवल तत्कालिक उपाय हो सकते हैं । परंतु हमको और आपको यह समझना होगा कि धैर्य रखना ही महत्वपूर्ण है। हम सबको अपने जीवनरूपी युद्ध में ‘ठहरो और देखो’ की राजनीति ही सफलता दिला सकती है ।

तथा इसके फलस्वरूप यह भी समझना होगा कि कहाँ, कब और कैसे ठहरना है। हमारे पास दो रास्ते हैं- धैर्य रखिए जो आपको मंजिल तक ले जाएगा या अधीर हो जाइए जो आपको एक तनावग्रस्त स्थिति में ले जाएगा। चुनाव सिर्फ आपका होगा। महापुरुषों का कहना है अलौकिक शांति और सफलता कुछ और नहीं, सिर्फ अपने हिस्से का कार काम पूरा करना और इंतजार करना है जो आपको अध्यात्मिकता तक ले जाएगा और शांति प्रदान करेगा।।

लेखिका: भारती भारद्वाज (MA,B.Ed,M.Ed :Aligarh Muslim University)