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Lockdown के 27वें दिन राहत भरी खबर, कोरोना से लड़ाई में असर दिखा रहे भारत के कदम

गुजरात, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश समेत सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राशन की दुकानों से मुफ्त दाल बांटना शुरू कर दिया है। खाद्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों को एक किलोग्राम दाल दी जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या दोगुनी होने की दर में पिछले एक सप्ताह के दौरान सुधार आने की जानकारी देते हुये बताया कि लॉकडाउन से पहले और बाद में 19 अप्रैल तक के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर देश के 18 राज्यों में इस दर में राष्ट्रीय स्तर पर सुधार हुआ है। स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने सोमवार को नियमित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 25 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के पहले राष्ट्रीय स्तर पर मरीजों की संख्या 3.4 दिन में दोगुनी हो रही थी लेकिन अब 19 अप्रैल तक के विश्लेषण के आधार पर यह दर 7.5 दिन हो गयी है। अग्रवाल ने इसे कोरोना वायरस के खिलाफ जारी अभियान के लिये सकारात्मक संकेत बताते हुये कहा देश के 18 राज्य ऐसे हैं जो मरीजों की संख्या दोगुनी होने के मामले में राष्ट्रीय औसत से काफी आगे निकल गये हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के पालन को सुनिश्चित किये जाने के कारण देश में संक्रमित मरीजों की संख्या दोगुनी होने की दर में तेजी से गिरावट दर्ज होने के परिणामस्वरूप आठ से 20 दिन तक की अवधि में आठ राज्यों में मरीजों की संख्या दोगुनी हो रही है। इनमें दिल्ली में (8.5 दिन), कर्नाटक (9.2 दिन), तेलंगाना (9.4 दिन), आंध्र प्रदेश (10.6 दिन), जम्मू कश्मीर (11.5 दिन), छत्तीसगढ़ (13.3 दिन), तमिलनाडु (14 दिन) और बिहार (16.4 दिन) शामिल हैं। अग्रवाल ने कहा कि जिन राज्यों में मरीजों की संख्या 20 से 30 दिन में दोगुनी हो रही है उनमें अंडमान निकोबार द्वीप समूह (20.1 दिन), हरियाणा (21 दिन) , हिमाचल प्रदेश (24.5 दिन), चंडीगढ़ (25.4 दिन), असम (25.8 दिन) उत्तराखंड (26.6 दिन) और लद्दाख (26.6 दिन) शामिल हैं। जबकि मरीजों की संख्या दोगुनी होने की दर ओडिशा में 39.8 दिन और केरल में 72.2 दिन पर पहुंच गयी है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के 1553 नये मामले सामने आये, जबकि संक्रमण के कारण एक दिन में 36 लोगों की मौत हुयी है। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 17,265 पर पहुंच गया है और अब तक 543 मरीजों की मौत हो गयी है। अग्रवाल ने कहा कि स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़कर 2546 (14.75 प्रतिशत) हो गयी है। उन्होंने बताया कि देश में तीन जिलों (पुडुचेरी के माहे, कर्नाटक के कोडागु और उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल) में 28 दिनों से एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। वहीं, राजस्थान में डूंगरपुर और पाली, गुजरात में जामनगर और मोरबी तथा उत्तरी गोवा जिलों में पिछले 14 दिन से संक्रमण के किसी मामले की पुष्टि नहीं हुयी है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही पिछले 14 दिनों से संक्रमण का एक भी सामने नहीं आने वाले जिलों की संख्या 59 हो गयी है। ये जिले 23 राज्यों के हैं। अग्रवाल ने कहा कि गोवा पहला राज्य है जहां अब एक भी संक्रमित मरीज नहीं है। उन्होंने कहा कि गोवा में सभी संक्रमित मरीजों को इलाज के बाद स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी है। इस बीच उन्होंने मुंबई में कुछ पत्रकारों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर दुख व्यक्त करते हुये कहा कि पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते समय कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिये जरूरी एहतियाती उपायों का पालन करना चाहिये।

इस दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक रमन आर गंगाखेड़कर ने बताया कि पश्चिम बंगाल से त्वरित परीक्षण किट में तकनीकी खामियां आने की शिकायत मिली थी, जिसे दूर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वस्तुत: यह खामी किट की तकनीक में नहीं बल्कि इसके त्रुटिपूर्ण संचालन के कारण सामने आयी थी। संवाददाता सम्मेलन में गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि देश में संक्रमण मुक्त इलाकों में सोमवार से लॉकडाउन में आंशिक छूट दिये जाने के मद्देनजर मंत्रालय सभी राज्यों में स्थिति की सतत निगरानी कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिन शहरों में लॉकडाउन के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं उनमें इसका पालन सुनिश्चित कराने में मदद और स्थिति के आकलन के लिये मंत्रालय ने छह अंतर मंत्रालयी समूह गठित किये हैं। श्रीवास्तव ने बताया कि संक्रमण की स्थिति में सुधार नहीं होने और लॉकडाउन का शतप्रतिशत पालन नहीं हो पाने वाले जिलों में ये समूह भेजे गये हैं। उन्होंने कहा कि छह सदस्यीय समूह के प्रतिनिधि राजस्थान में जयपुर, मध्य प्रदेश में इंदौर, पश्चिम बंगाल में कोलकाता, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और 24 परगना और महाराष्ट्र में मुंबई एवं पुणे सहित कुछ अन्य जिलों में जाकर वस्तुस्थिति की समीक्षा कर लॉकडाउन का पालन सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। उन्होंने बताया कि समूह में स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन सहित अन्य संबद्ध क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। श्रीवास्तव ने कहा कि इसका मकसद मौजूदा संकट से निपटने के बारे में राज्यों के साथ विशेषज्ञता को साझा करना है। श्रीवास्तव ने कहा गृह मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों को पत्र लिखकर लॉकडाउन के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के लिये भी कहा गया है। उन्होंने कहा कि पत्र में राज्यों को कुछ इलाकों में लॉकडाउन का उल्लंघन होने की घटनाओं का जिक्र करते हुये स्पष्ट निर्देश भी दिये गये हैं कि इसका पालन सुनिश्चित करने के लिये सख्ती बढ़ा सकते हैं लेकिन लॉकडाउन के दिशानिर्देशों में ढील कतई नहीं दे सकते। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने केरल सरकार द्वारा संशोधित दिशानिर्देश बनाने पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा है कि किसी भी राज्य को, स्थिति में सुधार को देखते हुये केन्द्रीय दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं करना चाहिये। संवाददाता सम्मेलन में कृषि मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान भारतीय खाद्य निगम के औसत खाद्यान्न भंडारण को दोगुना कर दिया गया है। साथ ही मास्क और सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल कर दिया गया है, जिससे इनकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि कृषि कार्य को लॉकडाउन के दौरान निषिद्ध कार्यों की सूची से बाहर रखते हुये किसानों से सामाजिक दूरी के नियमों का अनिवार्य रुप से पालन करने को कहा गया है। मंत्रालय ने कोरोना वायरस संकट को देखते हुये मनरेगा के तहत दी जाने वाली औसत मजदूरी में 20 रुपये का इजाफा किया गया है।

योगी आदित्यनाथ का राजधर्म

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद बिष्ट का सोमवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। उनकी अंत्येष्टि हरिद्वार में की जाएगी लेकिन मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य में रूके रहने के लिये कर्तव्यबद्ध हैं। एम्स के प्रवक्ता ने योगी के पिता के निधन की पुष्टि करते हुए सोमवार को बताया कि 87 वर्षीय बिष्ट यकृत की बीमारी से पीड़ित थे। उन्हें उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित एम्स से 13 मार्च को दिल्ली स्थित एम्स के गेस्ट्रो विभाग में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के पिता बिष्ट को आहारनली में रुकावट संबंधी गंभीर परेशानी थी। तबियत में संतोषजनक सुधार नहीं होने पर उन्हें एक अप्रैल से वेंटिलेटर पर रखा गया था। कुछ दिन पहले किडनी सहित शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों के काम करना बंद करने के बाद से ही उनकी हालत नाजुक बनी हुयी थी। प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री के पिता ने सोमवार सुबह लगभग पौने ग्यारह बजे अंतिम सांस ली। उप्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने भी यह बताया। मुख्यमंत्री योगी ने एक बयान में कहा, ‘‘अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, लेकिन कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई को प्रदेश की 23 करोड़ जनता के हित में आगे बढ़ाने के कर्तव्य बोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया।’’ उन्होंने कहा, ”लॉकडाउन को सफल बनाने और महामारी को परास्त करने की रणनीति के चलते 21 अप्रैल को अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में भाग नहीं ले पा रहा हूं।’ योगी ने कहा, ‘‘अपने पूज्य पिता जी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुख व शोक है। वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता हैं। जीवन में ईमानदारी, कठोर परिश्रम एवं निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिये समर्पित भाव से साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया।’’ मुख्यमंत्री कोरोना वायरस संकट पर अधिकारियों के साथ बैठक में थे, जब उन्हें पिता के निधन की सूचना मिली। लेकिन उन्होंने कोर टीम के अधिकारियों साथ बैठक जारी रखी। उत्तर प्रदेश के सूचना निदेशक शिशिर ने बताया, ‘आज सुबह 10 बजे से मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कोविड-19 के कोर ग्रुप के अधिकारियों की बैठक हो रही थी, उसी बीच उन्हें सूचना मिली कि उनके पिता का निधन हो गया लेकिन इसके बाद भी वह बैठक करते रहे और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने के बाद ही बैठक से उठे।’ बैठक में उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोटा से उत्तर प्रदेश लौटे सभी बच्चों को घर में पृथक वास में रखना सुनिश्चित कराया जाए तथा सभी बच्चों के मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड कराने के बाद उनको घर भेजा जाए। मुख्यमंत्री ने अपनी मां और सगे-संबंधियों से लॉकडाउन के नियमों का पालन करने की अपील की और कहा कि उनके पिता की अंत्येष्टि में बहुत कम संख्या में लोग शामिल हो। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘मैं लॉकडाउन खत्म होने पर जाऊंगा।’’ बैठक लखनऊ में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर हुई। इस बीच, प्रदेश के सहारनपुर से प्राप्त एक खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी के पिता के निधन की सूचना पर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उनके गांव जा रही उनकी मौसी को लॉकडाउन के कारण उतराखण्ड सीमा पर रोक लिया गया जिसके कारण उन्हें वापस सहारनपुर वापस लौटना पड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मौसेरे भाई कवीन्द्र सिंह बिष्ट ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि हालांकि इस बारे में जानकारी होने पर सहारनपुर के जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने वाहन की व्यवस्था करायी।

ममता ने मोदी, शाह से पूछे सवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को पूछा कि राज्यों में लॉकडाउन मानदंडों के क्रियान्वयन का आकलन करने के लिए किस आधार पर छह अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय दलों (आईएमसीटी) का गठन किया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आकलन के आधार साझा करने को कहा, जिसके बिना उनकी सरकार ”आगे कोई कदम नहीं उठा पाएगी।” बनर्जी ने ट्वीट किया, ”हम कोविड-19 संकट से निपटने के सभी रचनात्मक समर्थन और सुझावों का स्वागत करते हैं, विशेषकर केन्द्र सरकार के… हालांकि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत केन्द्र सरकार किस आधार पर पश्चिम बंगाल सहित भारत के कई जिलों में आईएमसीटी स्थापित कर रही है यह स्पष्ट नहीं है।’’ बनर्जी ने कहा, ”मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी से इस संबंध में जानकारी साझा करने का आग्रह करती हूं। तब तक मुझे संदेह है कि हम आगे कोई कार्रवाई नहीं कर पाएंगे, क्योंकि बिना किसी ठोस तर्क के यह संघवाद की भावना के खिलाफ होगा।’’ केन्द्र ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में कोविड-19 की स्थिति का आकलन करने के लिए छह आईएमसीटी का गठन किया है। मंत्रालय ने कहा था कि केन्द्र सरकार ने इन स्थानों में कोविड-19 संबंधी हालात का वहां जाकर आकलन करने और चारों राज्यों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं पश्चिम बंगाल के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए छह अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय दलों (आईएमसीटी) का गठन किया है। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आईएमसीटी बंद के नियमों के अनुसार दिशा-निर्देशों के पालन एवं क्रियान्वयन, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, सामाजिक दूरी, स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे की तैयारी, स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और श्रमिकों एवं गरीबों के लिए स्थापित राहत शिविरों में हालात पर गौर करेंगी।’’ उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए 24 मार्च को बंद की घोषणा की थी जिसके बाद में तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया गया।

गृह मंत्रालय का स्पष्टीकरण

केंद्र सरकार ने कहा है कि कोविड-19 को लेकर मुंबई, पुणे, इंदौर, जयपुर, कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कुछ अन्य स्थानों पर हालात ‘‘विशेष रूप से गंभीर’’ हैं और लॉकडाउन के नियमों के उल्लंघन से कोरोना वायरस और फैलने का खतरा है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में कार्रवाई करते हुए घोषणा की है कि छह अंतर-मंत्रालयीन केंद्रीय दल (आईएमसीटी) महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान के इन चिह्नित स्थानों पर अगले तीन दिन में दौरा करेंगे तथा मौके पर स्थिति का आकलन कर केंद्र को रिपोर्ट देकर उपाय सुझाएंगे। इन चार राज्यों को रविवार को जारी एक समान आदेशों में गृह मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा, सामाजिक दूरी बनाए रखने का पूर्णतया उल्लंघन और शहरी इलाकों में वाहनों की आवाजाही के कई मामले सामने आए हैं जिन्हें रोका जाना चाहिए। इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार ने किस आधार पर अपने दल तैनात करने की बात कही है, वह अस्पष्ट है। गृह मंत्रालय ने कहा कि कुछ जिलों में लॉकडाउन के नियमों में कई बार उल्लंघन की खबरें मिली हैं जिससे कोविड-19 के फैलने का गंभीर खतरा है। इन उल्लंघनों में अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले, बैंकों, सरकारी राशन की दुकानों के बाहर तथा बाजारों में सामाजिक दूरी के नियमों का पूरी तरह उल्लंघन, शहरी इलाकों में निजी तथा व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही आदि शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि अति प्रभावित जिलों में या हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहे स्थानों पर अगर इन घटनाओं को होने दिया गया तो ये इन जिलों की आबादी के लिए तथा देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संबंधी खतरा पैदा कर देंगी। गृह मंत्रालय ने कहा कि मध्य प्रदेश के इंदौर, महाराष्ट्र के मुंबई एवं पुणे, राजस्थान के जयपुर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, पूर्वी मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना, दार्जिलिंग, कालिमपोंग तथा जलपाईगुड़ी में हालात ‘‘विशेष रूप से गंभीर’’ हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में कोविड-19 के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 543 हो गई है और इससे संक्रमित लोगों की संख्या 17,265 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में अब तक कोरोना वायरस से 4,203 लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से 223 लोगों की मौत हो गई है। मध्य प्रदेश में संक्रमण के कुल 1,407 मामलों में से 70 लोगों की मौत हो गई है। राजस्थान में संक्रमण के कुल 1,478 मामले सामने आए हैं जिनमें से 14 लोगों की मौत हो गई है और पश्चिम बंगाल में संक्रमण के कुल 339 मामलों में से 12 लोगों की मौत हो गई है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘हम कोविड-19 के संकट से निपटने के लिए खासतौर पर केद्र सरकार से समस्त सकारात्मक सहयोग और सुझावों का स्वागत करते हैं। हालांकि केंद्र सरकार जिस आधार पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों समेत भारत के चुनिंदा जिलों में आईएमसीटी तैनात करने की पेशकश कर रही है, वह स्पष्ट नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी से अनुरोध करती हूं कि इसके लिए इस्तेमाल का मानदंड बताएं। अन्यथा मैं चिंतित हूं और हम इस पर आगे नहीं बढ़ पाएंगे क्योंकि बिना वैध कारणों के यह संघवाद की भावना के संगत नहीं हो सकता।’’ केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के अध्यक्ष के नाते इन आदेश पर दस्तखत किये हैं। आदेशों में यह भी कहा गया है कि छह अंतर-मंत्रालयीन केंद्रीय दल इन अति-प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और मौके पर जाकर इन स्थानों पर कोविड-19 को लेकर हालात का जायजा लेंगे। जिसके बाद चारों राज्यों को आवश्यक निर्देश जारी किये जाएंगे। ये दल आम जनता के व्यापक हित में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेंगे। पांच सदस्यीय प्रत्येक दल की अगुवाई केंद्र सरकार के अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आईएमसीटी बंद के नियमों के अनुसार दिशा-निर्देशों के पालन एवं क्रियान्वयन, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, सामाजिक दूरी, स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे की तैयारी, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, जांच किट, पीपीई, मास्क तथा अन्य सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और श्रमिकों एवं गरीबों के लिए स्थापित राहत शिविरों में हालात पर गौर करेंगी।’’ आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन दलों को नयी दिल्ली से संबंधित स्थानों तक जाने और लौटने की व्यवस्था नागर विमानन मंत्रालय करेगा। राज्य सरकारें इन आईएमसीटी के ठहरने, स्थानीय स्तर पर परिवहन, पीपीई और अन्य सुविधाएं प्रदान करेंगी। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु समेत देश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिस कर्मियों पर हमले की खबरें सामने आई हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए 24 मार्च को 14 अप्रैल तक बंद की घोषणा की थी जिसे बाद में तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया गया।

गृह मंत्रालय के निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देशभर में लागू लॉकडाउन के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों में उल्लेखित कदमों से अधिक कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं लेकिन उन्हें कमजोर या हल्का नहीं कर सकते। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्यों को नये सिरे से पत्र लिखा है क्योंकि कुछ राज्य अपने दिशानिर्देश जारी कर रहे हैं जो लॉकडाउन को कमजोर करने के समान हैं और इससे नागरिकों की सेहत को लेकर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘गृह मंत्रालय देश में लॉकडाउन के हालात पर नियमित नजर रख रहा है। जहां भी लॉकडाउन का उल्लंघन किया जा रहा है हम राज्य सरकारों के साथ तालमेल करते हुए उचित कार्रवाई कर रहे हैं।’’ श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘कल गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को फिर से पत्र लिखा कि आपदा प्रबंधन कानून के तहत उसके द्वारा जारी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राज्य अपनी स्थानीय स्थितियों के अनुसार और कड़े कदम उठा सकते हैं लेकिन उन्हें कमजोर या हल्का नहीं कर सकते।’’ अधिकारी ने कहा कि यह पत्र लिखना अहम हो गया था क्योंकि कुछ राज्यों में ऐसी सुविधाओं की अनुमति दी जा रही है जिनकी गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने केरल सरकार को भी पत्र लिखा है और उसके द्वारा जारी निर्देशों को लेकर चिंता प्रकट की है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने रविवार को केरल के मुख्य सचिव टॉम जोस को भेजे पत्र में लॉकडाउन के कार्यान्वयन के लिए जारी समेकित संशोधित दिशानिर्देशों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट किया। भल्ला ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय की एक टिप्पणी को भी रेखांकित किया कि सभी संबंधित राज्य सरकारें, सार्वजनिक प्राधिकरण और इस देश के नागरिक – केंद्र द्वारा सार्वजनिक सुरक्षा के हित में जारी निर्देशों और आदेशों का पूरी तरह से पालन करेंगे। श्रीवास्तव ने कहा कि केरल के आदेश में ऐसी कुछ चीजों का उल्लेख है जो आपदा प्रबंधन कानून के तहत जारी गृह मंत्रालय के निर्देशों का उल्लंघन करती हैं और लॉकडाउन को कमजोर करने के समान हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए अनुरोध किया गया है कि राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का पालन होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी का दृढ़-संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत और अफगानिस्तान ने आतंकवाद के खतरे के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी थी और उसी तरह एकजुटता व साझे संकल्प के साथ कोविड-19 का मुकाबला करेंगे। गेहूं और दवाओं की आपूर्ति पर भारत का शुक्रिया अदा करते हुए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी द्वारा किये गए एक ट्वीट के जवाब में मोदी ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान इतिहास, भूगोल व सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर एक विशेष मित्रता साझा करते हैं। मोदी ने ट्वीट किया, “लंबे समय तक हमने आतंकवाद के खतरे के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ी है। उसी तरह हम एकजुटता व साझा संकल्प से एक साथ कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।” गनी ने अपनी ट्विटर पोस्ट में कहा, “शुक्रिया मेरे मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की 5 लाख व पैरासीटमोल की एक लाख गोलियां तथा 75000 मीट्रीक टन गेहूं के लिये शुक्रिया भारत, जिसकी पहली खेप अफगानिस्तान के लोगों के लिये एक दो दिन में यहां पहुंच जाएगी।”

‘पुलिस की हत्या करो’ का नारा लगाया

बेंगलुरु शहर के अल्पसंख्यक बाहुल्य पदरायणपुरा इलाके में पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों पर रविवार की रात हमला करने वाले असामाजिक तत्वों ने ‘‘पुलिस की हत्या करो’’ के नारे लगाए। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में कहा है कि टीम वहां कुछ लोगों को पृथकवास में रखने के लिए गयी थी। करीब 100-120 लोग सड़कों पर आ गए और वहां पुलिस तथा स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाने लगे। इनकी टीम वहां संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने का प्रयास कर रही थी। पुलिस अधिकारियों की शिकायत पर असामाजिक तत्वों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एक प्राथमिकी में पुलिस के उपनिरीक्षक रमण गौड़ा ने शिकायत की है कि वह स्वास्थ्यकर्मियों के साथ 43 लोगों को पृथकवास में रखने गए थे, वहां करीब 120 लोग आ गए और उनपर हमला कर दिया। गौड़ा ने कहा, ‘‘अराफात नगर से लोग लाठियां और पत्थर लेकर सड़कों पर निकल आए।’’ पुलिस अधिकारी प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि जब वह भीड़ को सीसीटीवी कैमरा तोड़ने से रोक रहे थे, तभी भीड़ ने ‘‘पुलिस की हत्या करो, उन्हें मत बख्शों’’ के नारे लगाते हुए उनपर हमला कर दिया। अधिकारी ने कहा, ‘‘वे लाठियों और पत्थरों से मारकर हमारी हत्या करना चाहते थे। हमारे कुछ कर्मियों को चोटें भी आयी हैं।’’ पुलिस के मुताबिक, कथित रूप से हमले की योजना बनाने वाली एक महिला सहित 59 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

कोविड-19 टीका बनाने के लिए तीन कंपनियों को मंजूरी

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने तीन कंपनियों को चुना है, जिन्हें कोविड-19 का टीका विकसित करने के लिए धन मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा उसे जांच और इलाज के तरीके निकालने के 13 अन्य प्रस्ताव भी मिले हैं। डीबीटी ने एक बयान में कहा कि इस तरह की मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अलग अलग मंच पर टीका बनाने वाली कंपनियां मिल कर तेली से काम पूरा कर सकें। वे इस काम में हो सकता है कि अलग अलग अलग चरणों में हों। यह मदद राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत की जा रही है। यह मिशन 2017 में टीकों और दवाओं के विकास में कंपनियों के समूह को मदद के लिए शुरू किया गया है। डीबीटी और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग शोध सहायता परिषद ने कोविड-19 पर शोध के लिए आवेदन मंगाए थे। डीबीटी ने एक बयान में कहा कि पहले चरण के तहत शिक्षा संस्थानों और उद्योगों से लगभग 500 आवेदन मिले। बयान के मुताबिक इन आवेदनों की बहुस्तरीय समीक्षा जारी है और अब तक धन सहायता मुहैया कराने के लिए 16 प्रस्तावों की सिफारिश की गई है। बयान के मुताबिक जिन प्रस्तावों को वित्त पोषण के लिए मंजूरी दी गई है उनमें कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड, भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईआईपीएल) के प्रस्ताव शामिल हैं। कोविड-19 के टीके का विकास करने के लिए डीबीटी को केंद्रीय समन्वय एजेंसी नामित किया गया है। डीबीटी की सचिव रेणु स्वरूप ने बताया कि अन्य प्रस्तावों की भी जांच की जा रही है।

गुजरात ने कर्फ्यू बढ़ाया

कोरोना वायरस संक्रमण का प्रसार रोकने के लक्ष्य से अहमदाबाद, सूरत और राजकोट के कुछ हिस्सों में लागू कर्फ्यू को 24 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया गया है। गुजरात के पुलिस महानिदेशक शिवानंद झा ने उक्त सूचना देते हुए सोमवार का बताया कि पहले कर्फ्यू 21 अप्रैल को समाप्त होना था। झा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कर्फ्यू के दौरान, इन तीनों शहरों में जिन क्षेत्रों में पूर्ण पाबंदी लागू है, वहां भी संक्रमण के मामले आए हैं, इसलिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज हुई उच्चस्तरीय बैठक में कर्फ्यू की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया।’’ तीनों शहरों के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग वक्त में कर्फ्यू लगाया गया है।

उप्र में कोरोना संक्रमण के 84 नये मामले सामने आये

उत्तर प्रदेश में सोमवार को कोविड-19 संक्रमण के 84 नए मामले सामने आने के साथ ही राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1184 हो गयी। स्वास्थ्य महानिदेशालय के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रदेश में कोविड—19 संक्रमण के 84 नये मामले सामने आये हैं। इसके साथ ही प्रदेश में संक्रमितों की कुल संख्या 1184 हो गयी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोविड—19 संक्रमित 18 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें आगरा के छह, मेरठ और मुरादाबाद के तीन—तीन, बस्ती, वाराणसी, बुलंदशहर, कानपुर, मुरादाबाद और लखनऊ के एक—एक व्यक्ति शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि हालांकि सोमवार को 13 और संक्रमितों को अस्पताल से छुट्टी मिल गयी। सूबे में अब तक कुल 140 लोग इस संक्रमण से उबर चुके हैं। इस तरह राज्य में अब भी कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल 1026 मामले हैं। इसके पूर्व, राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि संक्रमित लोगों में 19.39 प्रतिशत मरीज 20 साल से कम उम्र के हैं। इसके अलावा 48. 04 प्रतिशत मरीज 21 से 40 साल के बीच के हैं जबकि 24.06 प्रतिशत मरीज 41 से 60 साल की उम्र के और 8.50 प्रतिशत मरीज 60 साल से अधिक उम्र के हैं।

कर्नाटक अध्यादेश लाएगा

कर्नाटक कैबिनेट ने सोमवार को कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है जो सरकार को विशेष अधिकार देगा। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों को संरक्षण दिया जाएगा और सरकार के साथ सहयोग नहीं करने को दंडनीय अपराध बनाया जाएगा। विधि और संसदीय कार्य मंत्री जेसी मधुस्वामी ने कहा, ”हमने इस महामारी से निपटने के लिए केरल और उत्तर प्रदेश की सरकारों की तरह ही एक अध्यादेश लाने का फैसला किया है।” उन्होंने बताया, ”यह पुराने महामारी अधिनियम को रद्द करके एक नए महामारी कानून को लागू करेगा।” इस अध्यादेश के तहत, सरकार कोविड-19 से मुकाबला करने वाले पहली पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों को संरक्षण देगी। उन्होंने बताया, ”इसके तहत, सरकार के साथ असहयोग करने, जानबूझाकर बीमारी फैलाने और झूठ तथा गलत सूचना फैलाने के किसी भी कृत्य को दंडनीय अपराध बनाया जाएगा।” गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने बाद में पत्रकारों से कहा कि अध्यादेश सरकारी विभाग या अधिकारियों को महामारी से निपटने के लिए अधिकार देगा। उन्होंने कहा कि यदि उन पर (अधिकारियों पर) कोई हमला होता है या उनके कर्तव्य में कोई बाधा आती है, तो ऐसी स्थिति के लिए अध्यादेश में भारी जुर्माने का प्रावधान होगा। सरकार के कोविड-19 मामलों के प्रवक्ता और प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि तीन-चार दिन में अध्यादेश आ जाएगा।

‘हरे, पीले व लाल’ श्रेणियों में रखने का फैसला

भारतीय सेना ने छुट्टी, अस्थायी ड्यूटी और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम से लौटने वाले अपने कर्मियों को ‘हरे, पीले और लाल’ की तीन श्रेणियों में रखने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों ने सोमवार को बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए उपाय किए गए हैं। नए निर्देशों के तहत, सेना मुख्यालय ने अभियान चलाने के लिए अहम उत्तरी कमान के सभी रैंक के अधिकारियों और सेना चिकित्सा कोर, सेना दंत कोर तथा सेना नर्सिंग सेवा के कर्मियों को “शीर्ष प्राथमिकता” के वर्ग में रखा है। सेना चिकित्सा कोर, सेना दंत कोर तथा सेना नर्सिंग सेवा के कई कर्मी संक्रमण का इलाज करने वाली विभिन्न टीमों का हिस्सा हैं। जिन कर्मियों को शीर्ष प्राथमिकता में रखा गया है, उनमें वे सैनिक भी शामिल हैं जिनकी इकाई या स्टेशन उनके अवकाश वो स्थान से 500 किलोमीटर के दायरे में हैं और वह सड़क से वहां पहुंच सकते हैं। अपने सभी बेस, प्रतिष्ठानों और फॉर्मेशन को भेजे निर्देश में सेना ने कहा है कि सभी कर्मियों को ड्यूटी शुरू करने के बाद 14 दिन के पृथकवास में जाना जरूरी है और उन्हें ‘पीली’ श्रेणी में रखा जाएगा। सूत्रों ने बताया कि 14 दिन का पृथकवास पूरा करने के बाद कर्मियों को ‘ हरी’ श्रेणी में रखा जाएगा और जिनमें लक्षण दिखेंगे और उन्हें पृथक करने की जरुरत होगी, उन्हें ‘लाल’ श्रेणी में रखा जाएगा। पिछले कुछ हफ्तों में सेना मुख्यालय ने 13 लाख कर्मियों वाली मजबूत फौज को कोरोना वायरस से बचाने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं। देश में कोविड-19 से 540 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और 17000 से अधिक मामले हैं। सेना के भी आठ कर्मी संक्रमित पाए गए हैं। नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, ”वे सभी कर्मी जो छुट्टी, अस्थायी ड्यूटी और पाठ्यक्रम से लौट रहे हैं, उन्हें पीली श्रेणी में रखा जाएगा और उन्हें रिपोर्टिंग स्टेशन या इकाई में 14 दिन का पृथकवास पूरा करना होगा। इसके बाद इन कर्मियों को सेना की गाड़ी या विशेष ट्रेनों से रिपोर्टिंग स्टेशन से ड्यूटी स्टेशन या इकाई में भेजा जाएगा।” अगर कोई कर्मी सैन्य अधिकारियों की निगरानी में नहीं जाता है तो उसे फिर से ‘पीली’ श्रेणी में समझा जाएगा और उसे फिर से 14 दिन के पृथक वास में जाना होगा। निर्देशों के मुताबिक, पूर्वी कमान के सभी रैंक के अधिकारियों और अन्य कमान की अहम नियुक्तियों को दूसरे उच्चतर प्राथमिकता वर्ग में रखा गया है। सेना ने कहा कि कर्मी को छुट्टी और अस्थायी ड्यूटी देने वाली इकाई या फॉर्मेशन अथवा प्रतिष्ठान के विशिष्ट निर्देश मिलने पर ही उसे ड्यूटी पर फिर से आने की इजाजत दी जाएगी। निर्देशों के मुताबिक, “जिस किसी की छुट्टी का स्थान इकाई या ड्यूटी स्टेशन से 500 किलोमीटर के दायरे में है, उसे सिर्फ निजी गाड़ी से सीधे इकाई में रिपोर्ट करने की इजाजत है।” निर्देशों के मुताबिक, ”जो 500 किलोमीटर के दायरे में नहीं आते हैं, वे सिर्फ निजी गाड़ी से नजदीक की इकाई या स्टेशन मुख्यालय में रिपोर्ट करेंगे।” निर्देशों में कहा गया है कि नेपाल के सैन्य कर्मी जो छुट्टी पर घर पर हैं, वे नेपाल में हालात स्थिर होने तक और सरकार की ओर से सीमा खोलने तक वहीं रुकें। सेना ने स्पष्ट किया है कि ये निर्देश उन पर लागू नहीं होंगे जो हॉटस्पॉट ज़ोन से आते हैं और क्षेत्र को हॉटस्पॉट की श्रेणी में से हटाने तक उन पर आवाजाही नहीं करने के पहले के निर्देश लागू रहेंगे। भारत में 25 मार्च से 14 अप्रैल तक का 21 दिन का बंद था, जिसे पिछले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि सरकार ने कुछ क्षेत्रों को 20 अप्रैल से गतिविधियां शुरू करने की इजाजत दी है। पिछले हफ्ते भारतीय सेना ने अपने सभी सैन्य प्रतिष्ठानों, छावनियों फॉर्मेशन मुख्यालयों और क्षेत्र इकाई को 19 अप्रैल तक आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश सरकार की ओर से बंद को लेकर आए नए दिशा निर्देशों के मद्देनजर दिया गया था। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सेना मुख्यालय, कमान मुख्यालय और फॉर्मेशन मुख्यालय के कार्यालय 19 अप्रैल से तीन मई तक 50 प्रतिशत कार्यबल के साथ काम करना शुरू कर देंगे। इसने कहा कि सभी प्रशिक्षण गतिविधियों और अस्थायी ड्यूटी को तीन मई तक निलंबित रखा जाएगा।

कोई ऐंबुलेंस ले जाने को तैयार नहीं हुई

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 28 वर्षीय शख्स ने दावा किया कि उनके पिता की कोरोना वायरस से मौत होने जाने के बाद उनके शव को स्थानीय श्मशान घाट तक ले जाने के लिए कोई भी ऐंबुलेंस तैयार नहीं हुई। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति खुद भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गया था लेकिन इलाज के बाद वह ठीक हो गया। उन्होंने अपने परिवार की आप बीती बताई। उन्होंने बताया, “मेरे खुशहाल परिवार ने इस महीने की शुरुआत में अचानक अपना मुखिया खो दिया। उनकी मृत्यु के 48 घंटे के भीतर, हमारे परिवार के तीन सदस्यों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई।” उन्होंने बताया, ”इसके बाद हम लोग दहशत में आ गए। हालांकि हम इलाज के बाद ठीक हो गए। लेकिन हमने उन लोगों की आंखों में डर देखा जो हमसे मिले थे।’’ इस शख्स ने बताया कि उनके 58 वर्षीय पिता मुंबई में, सार्वजनिक क्षेत्र के एक प्रमुख बैंक में काम करते थे। उन्होंने घर में खुद को एक कमरे में पृथक कर लिया था। हालांकि उनमें कोरोना वायरस के लक्षण नहीं दिखे थे। उन्हें बाद में मधुमेह की समस्या बढ़ने और संबंधित जटिलताओं की वजह से यहां एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया, ”अस्पताल ने हमें सलाह दी कि हम अपने पिता को कोविड-19 के इलाज के लिए निर्धारित अस्पताल ले जाएं। इसके बाद उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।” उनके बेटे ने बताया कि कुछ दिनों में ही उनकी मौत हो गई। उनके नमूनों की जांच से उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया, ”कोई भी ऐंबुलेंस मेरे पिता के शव को श्मशान घाट तक ले जाने को तैयार नहीं हुई। किसी तरह से हमने इसका इंतजाम किया और श्मशान घाट पहुंचे तो हमने देखा कि वहां ड्यूटी पर तैनात व्यक्ति ने पूरे इंतजाम नहीं किए थे। उसने अंतिम संस्कार करने के लिए दूर से ही हमें निर्देशित किया, क्योंकि उसे भी संक्रमित होने का डर था।” शख्स ने बताया ‘‘इसके बाद परिवार को स्वास्थ्य अधिकारियों की फोन कॉल आई। उन्होंने हमसे अस्पताल में कोरोना वायरस की जांच कराने के लिए कहा।’’ उन्होंने कहा, ”उस दिन हमारे नमूने नहीं लिए गए और अगले दिन भी नजरअंदाज किया गया। इसके बाद हमने महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे से संपर्क किया और फिर हमारे नमूने लेने के लिए सामग्री उपलब्ध हो गई।” उन्होंने बताया कि वह, उनकी पत्नी और बड़ा भाई कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गये थे। लेकिन उन सब की बाद की रिपोर्टें निगेटिव आईं। उन्होंने बताया कि सोमवार को उन्हें, उनकी पत्नी और भाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

केरल में कविड-19 के छह नए मामलों की पुष्टि

केरल में सोमवार को कोविड-19 के छह नए मामलों की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार ने दो-तीन दिनों के भीतर पृथकवास में रह रहे सभी लोगों की जांच करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पत्रकारों को बताया कि राज्य में अब तक कुल 408 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने कहा, “राज्य में कम से कम 46,000 लोग निगरानी में हैं जबकि सोमवार को भर्ती हुए 62 व्यक्तियों सहित 398 का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।” राज्य ने अब तक 19,756 नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है और 19,074 नमूनों की जांच रिपोर्ट नकारात्मक आयी है। सोमवार को 21 लोग इलाज के बाद संक्रमणमुक्त हो गए।

‘छुपे’ जमातियों पर 10 हजार का इनाम घोषित

कानपुर में पिछले तीन दिनों के दौरान कोविड-19 संक्रमण के 60 से ज्यादा मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तबलीगी जमात के ‘छुपे’ हुए सदस्यों के बारे में सूचना देने वाले को 10 हजार रुपये नकद इनाम का एलान किया है। कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने ‘छुपे’ बैठे तबलीगी जमातियों के बारे में सूचना देने वाले को 10 हजार रुपये इनाम का एलान किया है। यह फैसला जिले में पिछले तीन दिन के दौरान कोविड-19 संक्रमण के 60 से ज्यादा मामले सामने आने के बाद लिया गया है। अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि तबलीगी जमात के कार्यक्रमों में शामिल होने के बावजूद कुछ जमाती अब भी छुपे हुए हैं। हमने उनसे बार—बार अपील की है कि वे आगे आयें और प्रशासन को अपनी विदेश यात्राओं, तबलीगी जमात कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी, खुद में कोरोना वायरस के लक्षणों वगैरह के बारे में बताएं। क्योंकि यह न सिर्फ उनकी जान का बल्कि खुद से जुड़े अन्य लोगों की जान का भी सवाल है। उन्होंने कहा कि अगर जमाती खुद प्रशासन के सामने आते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। मगर यदि किसी अन्य स्रोत से उनके बारे में जानकारी मिली तो सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि कानपुर में पिछले तीन दिनों के दौरान कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है और संक्रमित व्यक्तियों की कुल तादाद 70 हो गयी है। लगभग सभी मामले या तो जमातियों के हैं, या फिर उनके सम्पर्क में आये लोगों के हैं।

तमिलनाडु में 43 नये मामले

तमिलनाडु में कोरोना वायरस से संक्रमण के 43 नये मामलों की पुष्टि के साथ राज्य में कुल कोविड-19 मरीजों की संख्या 1,520 हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सी विजयभास्कर ने यहां पत्रकारों को बताया, ”राज्य में 43 नये मामले आए हैं, एक डॉक्टर की रविवार को कोविड-19 से मौत हुई और एक व्यक्ति की मौत आज हुई है। इसके साथ तमिलनाडु में संक्रमण की वजह से मृतकों की संख्या 17 हो गई है।’’ उन्होंने बताया कि अब तक 457 लोगों को संक्रमण मुक्त होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई है। इनमें से 46 लोगों को आज अस्पताल से छुट्टी दी गई।

विधायक को जारी पास की जांच के आदेश

बिहार सरकार ने प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक को अपनी बेटी को राजस्थान के कोटा से वापस लाने के लिए लॉकडाउन के दौरान जारी किए गए यात्रा पास की जांच के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि नालंदा जिले के हिसुआ से भाजपा विधायक अनिल सिंह को कोटा से अपनी बेटी को वापस लाने के लिए यात्रा पास जारी किए जाने के कारण राज्य सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि देश के अलग अलग हिस्सों में फंसे लोगों की मांग पर सभी राज्य उन्हें वापस बुलाने लगे तो लॉकडाउन का मजाक बन जायेगा। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि निर्धारित मानदंडों के अनुसार सक्षम अधिकारी द्वारा पास जारी किया गया था या नहीं, इसकी जांच के लिये सामान्य प्रशासन ने आदेश जारी किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पास जारी करने में किसी भी विसंगति का पता चलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सूचना एवं जन संपर्क मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि लोगों को यह आश्वासन देते हैं कि यदि किसी के द्वारा अवैध रूप से पास जारी किया गया होगा तो प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। नवादा जिले में हिसुआ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अनिल सिंह 16 अप्रैल को राजस्थान के कोटा शहर के लिए रवाना हुए थे और शनिवार देर रात अपने पटना आवास पर लौट आए। सिंह को नवादा सदर अनुमंडल दंडाधिकारी द्वारा 15 अप्रैल को यात्रा पास जारी किया गया था जो कि रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सत्ता में बैठे लोगों पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा था कि महामारी और विपदा की घड़ी में भी ये लोग आम और ख़ास का वर्गीकरण कर राजनीति कर रहे हैं।

दुनिया भर में मरने वालों की संख्या 1.65 लाख के पार

दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमण से मरने वालों की संख्या सोमवार को 165,216 हो गई। एएफपी द्वारा संकलित, आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अब तक 193 देशों में 2,403,410 से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए है जिनमें से 5,37,700 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। हालांकि माना जा रहा है कि राष्ट्रीय एजेंसियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर जारी आंकड़े वास्तविक संक्रमितों का महज एक हिस्सा है क्योंकि कई देश केवल अधिक गंभीर मामलों की ही जांच कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में अमेरिका अब कोरोना वायरस के संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित है जहां कोविड-19 से मृतकों की संख्या 40,683 हो गई है और कुल संक्रमितों की संख्या 7,59,786 है। इनमें से 70,980 लोग संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। इटली कोविड-19 से दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश है जहां 23,660 लोगों की मौत के साथ 1,78,972 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इसी प्रकार स्पेन में 2,00,210 लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से 20,852 लोगों की मौत हुई। फ्रांस में कोरोना वायरस के संक्रमण से 19,718 लोगों ने जान गंवाई है एवं कुल 1,52,894 मामलों की पुष्टि हुई है। ब्रिटेन में 16,060 मौतों के साथ कुल 1,20,067 लोग संक्रमित हुए हैं। चीन में जहां पर दिसंबर में सबसे पहले संक्रमण की शुरुआत हुई , वहां 4,632 लोगों की कोविड-19 से मौत हुई है और 82,747 लोग संक्रमित हुए हैं। यूरोप में कोरोना वायरस से 11,83,307 लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से 1,04,028 लोगों ने जान गंवाई है। अमेरिका और कनाडा में संयुक्त रूप से कोरोना वायरस के 7,93,169 मामले सामने आए हैं जिनमें 42,212 लोगों की मौत हुई है। पूर्वी और दक्षिण एशिया में 1,66,453 लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से 7,030 लोगों की मौत हुई है। पश्चिम एशिया में 126,793 लोग संक्रमित हैं जिनमें 5,664 लोगों की मौत हुई है। लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों में 103,857 मामले आए हैं जिनमें से 5,068 की मौत हुई है। अफ्रीका में कुल संक्रमितों की संख्या 21,957 है जिनमें 1,124 लोगों की मौत हुई है। ओशियाना क्षेत्र में 7,879 मामले आए हैं और 90 की मौत हुई है।

ट्रंप की मांग चीन ने खारिज की

चीन ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए एक अमेरिकी टीम को वुहान जाने की अनुमति दी जाए। चीन ने ट्रंप की मांग खारिज करते हुए कहा कि वह भी अन्य देशों की तरह कोरोना वायरस का ”पीड़ित है, अपराधी नहीं।’’ अमेरिका ने जांच शुरू की है कि क्या यह घातक वायरस वुहान के इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से निकला था। ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि “वायरस पूरी मानव जाति के लिए साझा दुश्मन है।’’ उन्होंने अपने तीखे जवाब में कहा, ‘‘यह दुनिया में कभी भी कहीं भी सामने आ सकता है। किसी भी अन्य देश की तरह, चीन भी इस वायरस से प्रभावित हुआ है। अपराधी होने के बदले चीन पीड़ित है।’’ इस बीच अमेरिका में इस बीमारी के कारण 41,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है वहीं संक्रमित लोगों की संख्या 7,64,000 से अधिक हो चुकी है। कोरोना वायरस सबसे पहले चीनी शहर वुहान में सामने आया था। ट्रंप और कई अमेरिकी नेताओं ने वायरस के बारे में पर्याप्त जानकारी साझा नहीं करने के लिए चीन के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया है। चीन में इस महामारी के कारण मृतकों की संख्या संशोधित आंकड़ों के अनुसार 4,632 हो गयी है। उन्होंने कहा कि महामारी के सामने आने के बाद से, चीन खुले और पारदर्शी तरीके से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस पर काबू रोकने के लिए चीन के प्रयासों से “अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मूल्यवान अनुभव” प्रदान किया है जिससे वे अपने देशों में इस पर काबू पा सकें। फ्रांसीसी नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक ल्यूक मॉन्टैग्नियर ने टिप्पणी की थी कि कोरोना वायरस प्रयोगशाला से आया है और यह एड्स के लिए टीका बनाने के प्रयासों का नतीजा है। इस पर गेंग ने कहा कि कई वैज्ञानिकों और डब्ल्यूएचओ ने कहा कि इस तरह के आरोप के लिए कोई सबूत नहीं है।-नीरज कुमार दुबे

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क्या पेट सिर्फ गरीब मजदूरों के पास ही होता है?? क्या गरीब बेरोजगार छात्र बिना पेट के पैदा हुए है??

🤔🤔🤔🤔ऐसा लग रहा है कि देश में सिर्फ मजदूर ही रहते हैं….बाकी क्या काजू किसमिस बघार रहे हैं ?🙁

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