विश्व गुरु बनने की ये कैसी है कहानी।
देख-देख आये इसे अखियों में पानी।।

लूट रहा राजा प्रजा का खजाना
आया आज देखो ये कैसा जमाना
मीलों सफर पाँव दे गए हैं धोखा
भूख प्यास दे रही है मौत का बहाना
नई सदी दे रही ये कौन सी निशानी।
विश्व गुरु बनने की ये कैसी है कहानी।।1।।

मस्त यहाँ मस्ती में धन के कुबेर सभी
कोई नहीं पूछता है शोषितों के दर्द कभी
ये घर से थे दूर एक रोटी की खातिर
कितने इम्तेहान इन्हें देने हैं बाकी अभी
इनकी वेदना का जग में नहीं कोई सानी।
विश्व गुरु बनने की ये कैसी है कहानी।।2।।

छिन गया रोजगार तभी घर को ये भागे
राम जाने मजदूर ये कितने हैं अभागे
सत्ता के भोगी इनके रक्त के हैं प्यासे
कोई तो बताये इन्हें क्या होगा आगे?
पेट में न अन्न इनके और न ही पानी।
विश्व गुरु बनने की ये कैसी है कहानी।।3।।

इनके ही श्रम से हैं महल और अटारी
फिर भी ये भटकते हैं बन कर भिखारी
पाँवों में छाले पीठ लाठियों के घाव दिए
श्रमजीवी कर रहे हैं कूच की तैयारी
परजीयों की इन्हीं से दुनिया है सुहानी।
विश्व गुरु बनने की ये कैसी है कहानी।।4।।

डॉ. मान सिंह