शेख़ परवेज़ आलम

सहारनपुर। फलों के राजा आम की फसल की बादशाहत में अगर कोई फल सेंध लगाने का काम करता है तो वह है आड़ू……जी हां…….. हम यहां बात कर रहे है आड़ू की फसल की। स्वादिष्ट आम के बाद अगर लोगो को अपने ज़ायके का मुरीद बनाता है तो आड़ू ही है। लेकिन लॉक डाउन के बीच आड़ू लोगों के ज़ायका बनने से तो दूर है ही साथ ही ठेकेदारों व बाग मालिकों के माथे पर भी शिकन पैदा कर रहा है।

दरअसल, जनपद सहारनपुर के बेहट क्षेत्र का कुछ इलाका फलपट्टी घोषित है। यहां का आम देश-प्रदेश ही नही बल्कि दुनिया भर को अपने स्वाद से आकर्षित करता है। आम के बाद इलाके का आड़ू लोगो को अपनी ओर खींचने का काम करता है। लेकिन इस लॉक डाउन के चलते फल ठेकेदारों का बुरा हाल है। पिछली गर्मियों की बात करे तो आड़ू की फसल मुंह मांगे दाम बिक रही थी। लेकिन इस बार आड़ू सड़ने को मजबूर है.. वजह है, दुनिया भर में कहर बरपा रहा कोरोना वायरस……..आड़ू की फसल की बात की जाए तो वह अब पक कर तैयार है लेकिन अफसोस खरीदार नहीं है फल ठेकेदार परेशान है ….  आडू की महक से जहां पूरा बाग गुलजार हो रहा है … वही इसका रंग पर अनायास ही नज़र आकर रुक जाती है। लेकिन अफसोस लॉक डाउन के चलते इसका कोई खरीदार नहीं है….. वरना जब तक यह फल तैयार होता था उससे पहले ही इसकी बुकिंग शुरू हो जाती थी और फल का ठेकेदार खुशी से गर्वित हो जाता था मगर इस बार ऐसा नहीं है जो फल उसके घर की रोजी रोटी चलाता था, आज वही उसे दो वक्त की रोटी नहीं दे पा रहा है। ऐसा नहीं है कि इस बार फसल अच्छी नहीं हुई है, फसल भी बहुत है….. पेड़ फलों से लदे हुए हैं.….. पूरा बाग ईसकी महक से गुलज़ार है लेकिन लॉक डाउन के चलते यह फल कैसे बिकेंगे.. ..?? कौन खरीदेगा.?? यही चिंता अब इन बाग के ठेकेदारों को खाए जा रही है और खाए भी क्यों नहीं.….. इन्ही फल पर तो उनकी साल भर की रोजी- रोटी निर्भर है..पूरा परिवार इसी पर निर्भर है..ये उनकी पूरे साल की मेहनत है… इसी के जरिए उसने इस बार अपनी बेटी की शादी करनी सोची थी…. उसके हाथ पीले करने थे लेकिन शादी तो दूर उसको तो दो वक्त की रोटी के लाले नजर आ रहे हैं और यह सब है लोग डाउन के चलते.. इनकी मानें तो पिछले बरस तक यही आडू इन्हें ₹100 किलो तक दे रहा था… लेकिन अब यह लॉक डाउन के चलते कहां बेचने जाए और खरीदार तो दूर-दूर तक नहीं है। बस इन फलों को तैयार हुए देख वह रोने को मजबूर है। कहां लेकर जाए ईन फलों को….जहां मिले दो वक्त की रोटी मिल जाए अब इन्हें सरकार का ही आसरा है कि शायद सरकार इनकी ओर ध्यान दें और यह इस महामारी के बीच अपनी फसल को उचित दामो में बेच सके।