सभी प्रस्तुतीयां कलागत निरंजना फाउंडेशन के फेसबुक पेज पर निर्धारित तिथि पर शाम 7 बजे प्रसारित की जा रही हैं और सभी कला प्रेमी इनका आनंद ले सकते हैं और फेसबुक पेज www.facebook.com/kalaagatniranjan के माध्यम से सभी कलाप्रेमी  जुड़ सकते हैं

कला के प्रति निष्ठा रखने वाले देश के युवाओं द्वारा संचालित कलागत निरंजना फाउंडेशन फेसबुक लाइव के माध्यम से हमारे देश के प्रमुख कलाकारों को श्रोताओ से रूबरू करने का कार्य करने  में जुटी हैं | 

समन्वय डिजिटल कॉन्सर्ट के माध्यम से कलागत निरंजना फाउंडेशन का एक प्रयास है जिसका उद्देश्य देश के नागरिकों को इस लॉकडाउन के दौरान भारतीय शास्त्रीय कलाओ को  माध्यम बना के प्रेरित  करना हैं | 

कलागत फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं द्वारा बताया गया की जब से यह लॉकडाउन देश भर में चल रहा है , तभी से संस्थान अपने छोटे छोटे प्रयासों के द्वारा कला से लोगों को जोड़े रखने एवं प्रेरित करने के कार्य में जुटी हैं | चाहे फिर वो ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थीओं को शास्त्रीय नृत्य जोड़े रखने का प्रयास हो या फिर समन्वय डिजिटल कॉन्सर्ट के माध्यम से देश के उच्च कलाकारों से रूबरू करने की कोशिश | इन छोटे छोटे प्रयासों से कलागत देश भर में लोगों को जोड़े रखने एवम इस संकट की घडी में  प्रेरित  रहने का सन्देश दे रही है | 

भुवनेश कोमकली

समनवय डिजिटल कॉन्सर्ट श्रंखला की शुरूआत करते हुए देश के कुछ प्रख्यात कलाकारों ने सामने आकर अपना सन्देश देने का प्रयास अपनी कला को माध्यम बनाते हुए किया| 1 मई को शुरू हुई इस श्रंखला का प्रमुख कार्यक्रम श्री भुवनेश कोमकली जी द्वारा किया गया | श्री भुवनेश जी मध्य प्रदेश के देवास के निवासी हैं और भारतीय शास्त्रीय गायन में देश के एक प्रमुख कलाकार हैं और पंडित कुमार गन्धर्व जी के पोते हैं | कार्यक्रम की शुरूआत उन्होंने राग मधुवंती गा कर की और फेसबुक लाइव के माध्यम से जुड़े सभी श्रोताओ को मंत्र मुक्त करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया और अंत में एक भजन के साथ कार्यक्रम का समापन किया |

आपको बता दे कि देश विदेश से जुड़े उनके प्रशंसकों ने उनके इस प्रयास की खूब सहराना की एवं उनके गायन का खूब आनंद उठाया | 

पंडित दीपक महाराज

द्वितीय कार्यकम में देश के प्रख्यात कथक नर्तक पंडित दीपक महाराज जी ने अपनी प्रस्तुति से फेसबुक लाइव से जुड़े सभी दर्शको का मन मोह लिया | पंडित दीपक महाराज, पद्माविभूषण से सम्मानित पंडित बिरजू महाराज जी के सपुत्र होने के साथ-साथ उनके परम शिष्य भी हैं | अपनी  प्रस्तुति की शुरुआत उन्होंने लखनऊ  घराने की सुंदरता दिखाते हुए की और प्रस्तुति को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने तीन ताल में कुछ बंदिशें, टुकड़े एवं परन पेश किये | कार्यक्रम को आगे ले जाते हुए उन्होंने ताल एवं पद्संचालन की एक बेहद सुन्दर जुगलबन्दी पेश की जिसकी दर्शकों द्वारा खूब प्रशंसा भी हुई | आखिर में उन्होंने एक कथाकार के भांति कृष्णा पर आधारित एक ठुमरी प्रस्तुत की जो की एक बेहद खूबसूरत अंत की और कार्यक्रम को ले गयी | 

मैसूर चन्दन कुमार

श्रंखला के तीसरे कार्यक्रम में कर्नाटिक संगीत शैली के जाने माने बांसुरी वादक श्री मैसूर चन्दन कुमार जी ने श्रोताओं को मन्त्रमुग्ध किया | चन्दन कुमार जी देश विदेश में अपनी कला के लिए बहुचर्चित हैं और दूरदर्शन के उच्च श्रेणी के कलाकार भी हैं |अपने गुरुओ एवं ईश्वर को नमन करते हुए उन्होंने भगवान सिद्धि विनायक को समर्पित एक प्रस्तुति दी जिसकी उनके प्रशंसकों ने खूब तारीफ की | कार्यक्रम को आगे ले जाते हुए उन्होंने ने अपने बांसुरी वादन से सभी श्रोताओ को हर्ष एवं उत्साह से भर दिया | प्रस्तुति का अंत उन्होंने एक तराना बजाते हुए किया और लोगों को घरों में सुरक्षित रहने का सन्देश भी दिया | 

सुधा रघुरामन

चौथी प्रस्तुति भी कर्नाटिक गायन शैली में अपना विशेष स्थान दर्ज़ करा चुकी श्रीमती सुधा रघुरामन जी द्वारा 7 मई को हुई | सुधा जी की प्रस्तुति की एक अलग ही खूबसूरती रही | अपनी कला का एक बेहद ही सुन्दर रुप उन्होंने लोगों के सामने प्रस्तुत करते हुए कर्नाटिक गायन के एक अत्यंत सुन्दर पहलू से श्रोताओं को रूबरू कराया | उनकी गायकी का श्रोताओं ने खूब आनंद लिया और प्रशंसा की | उन्होंने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से लोगों कर्नाटिक गायन शैली का एक बेहद खूबसूरत रूप प्रस्तुत किया | 

कविता द्विवेदी

यहां पर कलागत निरंजना फाउंडेशन का यह प्रयास अभी थमा नहीं हैं | 9 मई को ओडिसी नृत्य की एक सुप्रसिद्ध नृत्यांगना श्रीमती कविता द्विवेदी जी अपनी कला के माध्यम से  दर्शको से जुड़ी।

कलागत की निदेशक एवं संस्थापक यामिका महेश जो खुद भी एक युवा कथक नृत्याँगना हैं का कहना है कि इस समन्वय श्रंखला  के आने वाले कार्यक्रमों में देश के कुछ प्रख्यात कलाकार अपनी प्रस्तुति देने जा रहे हैं | जानकारी देते हुए यह बताया की 10 मई को डॉक्टर श्रीधर वासुदेवन जो की देश में भरतनाट्यम के प्रमुख साधक हैं , 11 मई को श्रीमती जयप्रभा मेनन जी जो मोहिनीयट्टम  की एक प्रख्यात नृत्यांगना होने के साथ साथ एक सम्मानित गुरु भी हैं, 13  मई को उस्ताद अकरम खान जी जो देश के प्रसिद्ध अजराड़ा घराने के  सुप्रसिद्ध तबला वादक हैं और अंत में पद्मश्री से सम्मानित श्रीमती शोवना नारायण जी जिहोंने कथक नृत्य में अपना एक अलग मुकाम बनाया है । 15 मई को फेसबुक लाइव के माध्यम से दर्शको से अपनी कला के बारे में चर्चा करेंगी | यह सभी प्रस्तुतीयां कलागत निरंजना फाउंडेशन के फेसबुक पेज पर निर्धारित तारिख को शाम 7 बजे प्रसारित की जा रही हैं और सभी कला प्रेमी इनका आनंद ले सकते हैं | www.facebook.com/kalaagatniranjan इस माध्यम से सभी कलाप्रेमी  जुड़ सकते हैं |