वर्तमान दृष्टि में भारत के सरल घरेलू उत्पादन यानी जीडीपी में कृषि का हिस्सा करीब 15 से 17 फीसद है जबकि इसमें कुछ श्रम शक्ति का 49% और ग्रामीण श्रम शक्ति का 64% हिस्सा है

भारत संरचनात्मक रूप से गांव के समूह का एक देश है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मात्रा में कृषि कार्य किया जाता है इसलिए भारत को कृषि प्रधान देश भी कहा जाता है भारत में लगभग 65% से 70% लोग किसान हैं यह हमारे कुल आबादी का एक बड़ा भाग है जो हमारे देश की रीढ़ की हड्डी के समान है।

किसानों को अगर हमें मुनाफे की खेती के तरफ ले जाना है तो सरकार वह हम सब का पहला प्रयास होना चाहिए उनको साक्षर करने का , क्योंकि वर्तमान समय में किसानों को अपने अनाज का मूल्यांकन के तौर पर समझाना पड़ेगा कि हम जो गांव में फुटकर व्यापारी को अपना अनाज जो बेच रहे हैं उसका केंद्रीय स्तर का क्या रेट है कहीं ऐसा तो नहीं है कि हमें व्यापारी लूट रहा है अनाज का कम भाव दे कर।

वर्तमान दृष्टि में भारत के सरल घरेलू उत्पादन यानी जीडीपी में कृषि का हिस्सा करीब 15 से 17 फीसद है जबकि इसमें कुछ श्रम शक्ति का 49% और ग्रामीण श्रम शक्ति का 64% हिस्सा है इस लिए रोजगार का सबसे बड़ा अवसर किसानी है।

भारत की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा मुख्य रूप से कृषि पर आधारित होने का प्रमुख कारण है।

इसी वजह से कृषि मजदूरों की प्रति व्यक्ति आय बेहद कम है कृषि मंत्रालय द्वारा बताया गया है कि 1 हेक्टेयर या इससे कम वाले किसानों की लगातार संख्या बढ़ रही है यह दुखद है लगभग 10 सालों में 23 फीसद का इजाफा हुआ है भारत में सीमांत किसानों की संख्या वर्तमान समय में लगभग 68% है।

सीमांत किसान उसे कहते हैं जिनके पास किसानी हेतु जमीन 1 हेक्टेयर से कम हो इन किसानों की आय अनुपात महीने का खेती हार मजदूरी से 2011 रुपए पशुधन से ₹629 और गैर के तिहार कामों से ₹462 इस तरह प्रत्येक परिवार का औसत आय 3102 रुपए होते हैं प्रतिमाह इसमें सभी स्रोतों से कुल 5247 रुपए हासिल होते हैं जबकि सीमांत कृषक परिवार सामान्य खर्च 6220 रुपए प्रति मां होते हैं अब आप समझ सकते हैं कि इतने पैसे में क्या कोई सामान्य परिवार का जीवन यापन हो सकता है अगर वह जीवन यापन कर रहा है तो कैसे कर रहा है आप अनुमान लगा सकते हैं।

1994 से 2016 के विभिन्न आंकड़ों के अनुसार कर्मचारियों का वेतन 400% बढ़ा है है वही रासायनिक खाद के दाम ₹300 से बढ़कर 12:00 ₹100 हो गए हैं अब अगर इसमें सब जोड़ा जाए तो किसानों को अपनी लागत का मूल्य भी नहीं मिल रहा है किसानी के अलावा कोई ऐसा व्यवसाय नहीं है कि लोगों को लागत का मूल मिलने पर भी लोग उस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

देश में किसानों की स्थिति सुधारने के लिए जरूरी है कि ऐसे उपाय किए जाएं जिससे न सिर्फ उनकी आय में वृद्धि हो बल्कि उनके पैदावार में भी बढ़ोतरी हो।

किसानों की दशा में बदलाव के तरफ एक कदम – 

  • भारतीय जल विकास योजना जिसमें प्रत्येक खेत को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सके।
  • गांव में विद्युत आपूर्ति सड़कें चिकित्सा शिक्षा व्यवसायिक शिक्षा और कानून व्यवस्था इन सभी का नगरों जैसी व्यवस्था करनी पड़ेगी।
  • सभी कृषि उत्पादों के लाभकारी मूल्य की पक्की व्यवसाय हो।
  • प्राकृतिक आपदाओं और कीड़ों तथा बीमारियों आदि से क्षतिपूर्ति के लिए बीमा की व्यवस्था को व समय से उस बीमा का भुगतान भी।
  • बागवानी पशुपालन डेयरी पोल्टी और मत्स्य पालन के विकास हेतु एक समेकित कार्यक्रम बने।
  • कृषि वानिकी और औषधीय पौधों की खेती का प्रोत्साहन दिया जाए।

डॉ.संतोष वर्मा

किसान चिंतक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष – युवा जदयू यूपी लखनऊ