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महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी

आज अगर बात करें भारत में महिलाओं की स्थिति की, तो पिछले कुछ सदियों में कई बड़े बदलाव हुए है, प्राचीनकाल में पुरुषों के साथ बराबरी की स्थिति से लेकर मध्ययुगीन काल के निम्न स्तरीय जीवन और साथ ही कई समाज सुधारको द्वारा समान अधिकारों को बढ़ावा दिए जाने तक बदलाव हुए है। भारत में महिलाओं का इतिहास काफी गतिशील रहा है आधुनिक भारत में महिलाएं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री के जैसे शीर्ष पदों तक आसीन रही हैं लेकिन यह कहीं ना कहीं अस्थाई रहा है। एवं इसमें केंद्रीकरण भी रहा है, हमें विचार करना चाहिए कि एक तरफ हम महिलाओं को इतने शीर्ष पद तक पहुंचा दिए हैं और दूसरी तरफ अगर देखें तो आज तक उनको जो स्थाई स्थान मिलना चाहिए उसमें वह बहुत पीछे हैं।

लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी

अगर हम बात करें महिलाओं की लोकतंत्र में भागीदारी की तो अभी पिछले जो 17वी लोकसभा 2019 चुनाव हुआ हैं। उसके अनुसार भारत में महिलाओं का वोट प्रतिशत 48% प्रतिशत है और पुरुषों का 52% है महिलाओं में सबसे अच्छी बात यह है कि वह पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा वोट करती हैं महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों के वोट प्रतिशत की अपेक्षा ज्यादा पड़ता है जो अभी पिछले चुनाव में देखा गया है।

अगर हम भारत के लोकतांत्रिक संसदीय परंपरा में महिलाओं की साझेदारी की बात करें तो कहीं न कहीं हम आज भी बहुत पीछे हैं। अन्य देशों से 2017 के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी विश्व में 148वे स्थान पर हैं। फिर हाल यह अच्छी बात है कि वर्तमान स्थिति में महिलाओं की भागीदारी लगातार संसद व विधानसभाओं में बढ़ रही है। वर्तमान समय में भारत की संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी कि अगर हम बात करें तो 542 सदस्यों में से 78 महिलाएं सदस्य हैं, यह आंकड़ा लगभग कुल सदस्यों का 17% है जो पिछले चुनाव 2014 के अनुसार लगभग 6% बढ़ा हुआ है 16वी लोकसभा में महिलाओं की संख्या 64 थी, जो कि कुल सदस्यों का 11% ही था, महिलाओं को कम चुन के आना, उनका एक समस्या यह भी है कि टिकट ना मिलना विभिन्न राजनीतिक दलों से 2019 में कुल लोकसभा उम्मीदवारों की संख्या 8049 थी जिसमें से महिला उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ 724 थी 2019 के लोकसभा चुनाव में सर्व अधिक महिलाओं को टिकट कांग्रेस पार्टी ने दिया था।उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी 2017 चुनाव में कुल 403 सदस्यों में से 38 महिलाएं चुनी गई है जो आजाद भारत के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है यह भी एक बहुत ही खराब आंकड़ा है जो सम्मानजनक नहीं कह सकते जिस देश में या प्रदेश में महिलाओं की संख्या वाह भागीदारी 50% हो वहां संसद व विधायिका में उनकी संख्या 9% हो यह बहुत ही दुखद हैं।

महिलाओं को राजनीति में सफलता के अवसर

1 – हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार यह पता चला है कि अगर महिलाओं को मौका दिया जाए तो पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को चुनाव जीतने में आसानी होती है और खर्च के भी आंकड़े पुरुषों के अपेक्षा महिलाओं के चुनाव में कम कम होते है।

2 -हमारे समाज ने महिला नेताओं को कई समस्याओं  के कारण रोक रखा है इसमें चुनाव प्रचार के लिए आवश्यक धन की कमी से लेकर लोगों की रूढ़िवादी सोच पुरुष नेताओं का वर्चस्व मीडिया का प्रतिकूल रवैया भी शामिल है अब इन सब से ऊपर हमें सोचने की जरूरत है।

3 –  महिलाएं राजनीति में अगर मौका पाएं तो पुरुषों की अपेक्षा वह समाज से करप्शन व कराएं दोनों स्थिर व कम कर सकती हैं क्योंकि वह खुद  इन सब में कम रहती हैं।

4 – अगर न्यायिक भावना की बात की जाए तो पुरुषों से अधिक महिलाओं में न्याय करने की भावना होती है।

5 – मेरा मानना है कि अगर महिलाओं को मौका मिले तो वह पुरुषों से अधिक गंभीरता व समझदारी  से कार्य कर सकती हैं अगर उनको पावर दिया जाए तो।

युवा महिलाओं को राजनीति की तरफ रुख

1 – एक तरफ अगर देखा जाए तो वर्तमान में आप देख सकते हैं कि जो महिला छात्राएं हैं वह राजनीति से नफरत व घृणा करती हैं यह ज्यादातर महिला छात्रों में देखा गया है। उनका मानना है कि राजनीति एक गंदी व अन्य सिक्योर रास्ता हैं। मेरा मानना है अगर राजनीति गंदी है तो क्यों ना आप उसको सही करने की एक पहल करें अगर वहां अच्छे लोग नहीं जाएंगे तो आप यह कब तक कहते रहेंगे की राजनीति गंदी है। किसी गंदी चीज को दूर से देखने में आपको जरूर गंदा लग सकता है,लेकिन करीब जाने के बाद उसकी सत्यता पता चलता हैं।

2 – वर्तमान राजनीति में पुरुष की अपेक्षा महिलाएं काफी कम मेहनत वह संघर्ष के फलस्वरूप ही चुनाव जीत सकती हैं यह मेरा मानना है कारण भारत में वर्तमान समय में 40% वोटर युवा हैं जो कहीं ना कहीं महिलाओं की भाषा शैली उनके हंसमुख वक्तव्य व उनकी प्राकृतिक सौंदर्य जो युवाओं को आकर्षित करती है उनको लगता है कि यह सभी नेताओं से अलग हैं मेरे लिए भविष्य में कुछ अलग करेंगी।

3 – महिला उम्मीदवार को यह भी काफी फायदा होता है कि पुरुष उम्मीदवार जहां नहीं जा सकता है वहां भी महिला उम्मीदवार जा सकती है। शहरों व गांव के घरों के अंदर तक महिला सभी महिला वोटरों के पास जा के उसको अपना विजन समझा सकती है कि मैं जीतने के बाद क्या करूंगी।

4 – राजनीति आप को जनसेवा के साथ अपने लोगों के लिए चाहे वह गांव शहर व समाज के लोग हो उन सभी के लिए कुछ करने का एक अच्छा प्लेटफार्म होता है।

संतोष वर्मा

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