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आम जनमानस को सीधी मदद की है दरकार!!

आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार ने 20 लाख करोड़ की राहत एवं पैकेज की घोषणा की है जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके निश्चित ही इस प्रकार के उपायों की आवश्यकता राष्ट्रहित में है किन्तु आम आदमी को सीधे सीधे राहत की जो दरकार थी वह नहीं हो पाई है।

दरअसल बात की तह तक जाने के लिए यह समझना ज़रूरी है कि आत्मनिर्भर बनाना एक बेहद ज़रूरी योजना है जो हम भारतीयों को बहुत पहले मिल जाना चाहिए था इसमें सबसे अहम कड़ी छोटे रेहड़ी फड़ी वालों के लिए भी छोटे लोन की सुविधा रखी गई है तो वहीं लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का वादा किया गया है। एक देश के समृद्ध होने में यह छोटी कड़ियां बेहद मजबूत भूमिका निभाती हैं इसके लिए आप पड़ोसी देश चाइना का उदाहरण लेे सकते हैं वहां कुटीर उद्योगों को हमेशा बढ़ावा एवं राहते दी जाती है जिससे वह देश तरक्की करता है। जब तक आम आदमी की प्रति व्यक्ति आय नहीं बढ़ेगी तब तक देश के खजाने से उन्हें सब्सिडी और अन्य सुविधाएं देनी पड़ेंगी।

अब कुछ लोगों का तर्क यह है कि हम टैक्स देते हैं और पूरी जनता फायदा उठाती है तो उन्हें भी यह समझ लेना चाहिए कि जो टैक्स दरअसल वो भरते हैं उसे एक मामूली भिक्षुक भी भरता है यहां तक कि अगर वह मात्र एक रुपए की माचिस भी खरीदे तब भी। लिहाज़ा यह कहना सिरे से निरर्थक है कि कुछ लोग टैक्स भरते हैं बाकी उसके दमपर मुफ्तखोरी करते हैं।

अब बात राहतों की करें तो 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज पूरी तरह घोषित हो चुका है जिसमें छोटे वर्ग से लेकर बड़े वर्ग के कारोबारियों तक सभी के लिए कुछ न कुछ है। यह एक नए भारत की शुरुआत हो सकती है अगर इसका ईमानदारी से क्रियान्वयन हो जाए। परन्तु भारत जैसे देश में ये दूर की कौड़ी लगता है |

किन्तु बड़ी समस्या यह है कि इस भीषण त्रासदी के समय में जब छोटे बड़े तमाम कारोबार यहां तक कि दैनिक दिहाड़ी करने वालों तक की रोज़ी रोटी छिन चुकी है और जनता घरों में 2 महीनों से कैद है तब इस आत्मनिर्भर योजना से पहले कुछ बेहद अहम राहतों की ज़रूरत थी जिसपर कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है। वर्तमान दर्दनाक परिस्थितियों में पहले राहत और इस संकट से उबरने के बाद आत्मनिर्भर योजना अधिक कारगर साबित हो सकती थी।

राहतें कौन सी हैं जिनकी जनता को फिलहाल फौरी तौर पर ज़रूरत गई है इसे समझने से पहले यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था का पहिया कृषि, निर्माण एवं दैनिक आधार पर छोटे कारोबार करने वालों के सहारे घूमता है। इसमें वो छोटे कारोबारी भी शामिल हैं जो बाजारों में अपनी दुकानें अथवा छोटे मोटे उद्योग चलाते हैं तो ऐसे लोगों को भविष्य में आत्मनिर्भर से भले ही राहत मयस्सर हो जाए फिलहाल इन सभी के लिए किए जा रहे प्रयास अपर्याप्त हैं।

दो महीनों से अधिक समय अपने घरों में बिना किसी आमदनी के गुजारने वाली देश की जनता को बिजली का बिल, पानी एवं गृहकर तीन माह की छूट, छोटे लोन में 3 महीने की किस्तों की माफी, छोटे बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पूर्ण फीस माफी, दुकानों मकानों के किराए की माफी सहित छोटे कारोबारियों पर कम से कम मार्च माह सहित 4 महीने की जीएसटी छूट सहित काफी सारी समस्याएं हैं जो लॉक डाउन खुलते ही देश की 80 प्रतिशत आबादी को कोरोना वायरस से अधिक भयंकर चिंतन दे रही है।

देश के 80 करोड़ लोगों तक राशन पहुंचाना इस विकट काल में सरकार का सराहनीय कदम है लेकिन इसके बाद क्या? यह सवाल अब हर आम ओ खास के लिए बेचैनी पैदा कर रहा है। सरकारों की इसकी चिंता और निवारण करना चाहिए |

20 लाख करोड़ यानी हमारी कुल अर्थव्यवस्था का करीब 10 प्रतिशत हमे दिया गया है जो वर्तमान परिदृश्य में नाकाफी है इसलिए सरकार को कुल अर्थव्यवस्था का करीब 25 से 35 प्रतिशत खर्च करके आम जनता के समक्ष मुंह बाए खड़ी समस्याओं के निदान में लगाना होगा अन्यथा वर्तमान में घोषित 20 लाख करोड़ का पैकेज आम ज़रूरतों की भेंट चढ़ सकता है। जब तक आम आदमी को उपरोक्त समस्याओं से निजात नहीं मिलेगी तबतक आत्मनिर्भर योजना हमे आत्मनिर्भर बना पाएगी इसमें संशय ज़रूर नजर आता है। तदैव सरकार को इस दिशा में काम करने की जरूरत है जिससे आम आदमी को सीधे फायदा मिल सके, सिर्फ राहत देने से कुछ नहीं होने वाला आने वाला समय बहुत कठिन है चाहे वो किसान हो, मजदूर हो या फिर आम आदमी!!!

आशीष Kr. उमराव “पटेल”

कैरियर & एकेडेमिक मेंटोर, स्पीकर, मोटीवेटर, निदेशक- गुरु द्रोणाचार्य (IIT-JEE, NEET & NDA इंस्टिट्यूट), फ़ोन & व्हाट्सप्प-8650030001, like, follow / subscribe me on-facebook, instagram, twitter, linkedin & youtube.

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