परेशानियों और मुसीबतों के बीच गुज़र रहा है ये साल

सहारनपुर। हर बार आने वाले साल का बेहद गर्मजोशी के साथ इस्तक़बाल किया जाता है। लोगों में एक नई ख़ुशी, जुनून, कुछ करने, कुछ भूलने किसी के साथ चलने, किसकी को खोकर आगे बढ़ने की ताक़त नए साल के पहले दिन पैदा होती है। क्योंकि अमूमन माना जाता है नए साल की शुरुआत एक नई जिंदगी के साथ होती है। लेकिन शायद इस बार क़ुदरत ने कुछ ओर सोचा हुआ है। इसका अंदाजा भी शायद हम न लगा पाएं, फिर भी देखती दानिश्ता ये ज़रूर कहा जा सकता है कि इस साल ज़िन्दगी को अपना वजूद बचाने की जंग और सालों की अपेक्षा कुछ ज़्यादा है। साल 2020 के शुरुआती दिन से ही कुछ न कुछ आसमानी और ज़मीनी परेशानियों ने ज़िन्दगी मुहाल की हुई है। ऐसा लगता है कि क़ब्ज़ ए कुदरत ने दुनिया को दी गई ढील को खींचना शुरू कर दिया है। 

इसका अंदाजा हम इसी बात से लगा सकते हैं कि लोगों को इन दिनों तरह तरह की मुसीबतों और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना का खतरा अभी कम हुआ भी नहीं है कि दो ऒर संकट मुँह खोले ज़िन्दगी को निगलने को तैयार हैं और वो हैं बेरोज़गारी- भुखमरी। सड़को पर इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रवासी मज़दूर व गरीब तबके के लोगों के मुँह से निकलने वाली बातें साफ जाहिर कर रही हैं।

 इसी साल हुआ विशाखापट्टनम में गैस रिसाव का हादसा, जिसमें भी कई लोग मारे गए। फिर देश के कई राज्यों में अपना कहर बरपाने अम्फान तूफान ने आया जिसमें भी बड़ी तादाद में जान-माल का काफी नुकसान हुआ। वहीं राजस्थान में पाकिस्तान से आये टिड्डी दल ने पहले सीमावर्ती जिलों में अपना आतंक मचाया और अब यही टिड्डी दल तेज़ी से बढ़ता हुआ राजधानी जयपुर भी आ पहुंचा। लोगों पर एक के बाद एक आ रही मुसीबतों का सिलसिला कब थमेगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल इनका सामना डटकर और हिम्मत से करने की बेहद ज़रूरत है।

शान आलम ADV.