भारतीय संस्कृति सबसे पुरानी संस्कृति रही है, हमारे प्राचीन काल से नारी का स्थान सम्माननीय रहा है और कहा गया है कि ‘‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफलाः क्रियाः।।’’ अर्थात् जिस कुल में स्त्रियों की पूजा होती है, उस कुल पर देवता प्रसन्न होते हैं और जिस कुल में स्त्रियों की पूजा, वस्त्र, भूषण तथा मधुर वचनादि द्वारा सत्कार नहीं होता है, उस कुल में सब कर्म निष्फल होते हैं।

‘महिला’ अपने आप में एक परिपूर्ण शब्द जो अपने भीतर बहुत कुछ छिपाये हुए है वो मां है वो बहन है वो बीबी है और क्या-क्या है ये बताने की जरूरत नहीं, समाज में मजबूती से अपना योगदान देती महिलायें सब कुछ बगैर कहे ही बयां कर जाती हैं, अपने आस पास के परिवेश को देखें घरेलू महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम करतीं कामकाजी महिलायें ये समाज की कुछ ऐसी तस्वीरें हैं जिससे ना सिर्फ जिंदगी और उससे जुड़ी तमाम खुशियों में इजाफा होता रहता है बल्कि ये समाज ये संस्कृति भी कायम है। देश की तरक्की करनी है तो महिलाओं को सशक्त बनाना होगा। महिलायें कितनी सक्षम हैं ये किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है महिलाओं ने खुद ही अपनी हिम्मत और श्रम से हर समाज और हर दौर में इसे साबित किया है। साधारण शब्दों में महिलाओं के सशक्तिकरण का मतलब है कि महिलाओं को अपनी जिंदगी का फैसला करने की स्वतंत्रता देना या उनमें ऐसी क्षमताएं पैदा करना ताकि वे समाज में अपना सही स्थान स्थापित कर सकें। भारत का संविधान दुनिया में सबसे अच्छा समानता प्रदान करने वाले दस्तावेजों में से एक है। यह विशेष रूप से लिंग समानता को सुरक्षित करने के प्रावधान प्रदान करता है।

ऐसे ही आज हम बात करेंगे एक ऐसी महिला की जिसपर उनके पिता का साया बेहद छोटी उम्र में उठ गया और अपने साथ हुयी परेशानियों को लेकर वह स्वयं उठ खड़ी हुयी और समाज को एक नई दिशा प्रदान करने में सदैव तत्पर रहीं। हम बात कर रहे है कूर्मि समाज की रत्न ’शिल्पी पटेल’ की। शिल्पी पटेल से पूर्व यहां यह जानना बेहद जरूरी होगा कि कुर्मी समाज द्वारा देश को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी गई थी, यहां तक की देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल भी कुर्मी जाति से सम्बन्ध रखते थे। जिनके सम्मान में वर्तमान केन्द्रीय सरकार द्वारा 31 अक्टूबर 2018 को सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के 143वी जयंती पर 597 फुटी प्रतिमा भी स्थापित करायी गयी। इसके अतिरिक्त सम्पूर्ण भारत प्रांत में वर्तमान में कई मुख्यमंत्री कुर्मी समाज से ही है, इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश की राज्यपाल ‘आनन्दी बेन पटेल’ भी इसी समाज से सम्बन्ध रखती है। वहीं भारतीय क्रिकेटर अक्षर पटेल व बाॅलीवुड नायिका अमिशा पटेल भी कुर्मी समाज से है।

शिल्पी पटेल से हुयी वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ है, उनके पूर्वज हरदोई के निवासी थे, परंतु पिता अपनी किशोर अवस्था में मेरठ आ गये थे और यहां पर उनके पिता का विवाह हुआ था। शिल्पी पटेल द्वारा वर्ष 1995 में कक्षा 10 व 1997 में कक्षा 12 उत्तीर्ण की थी, फिर मेरठ से एम. ए. इकनोमिक्स की उपाधि प्राप्त की और वर्तमान में यौगिक साईंस की शिक्षा प्राप्त कर रही है। उन्होंने मेरठ के व्यवसायी विकास कुमार से विवाह किया, जिनसे उन्हे एक पुत्र श्रेष्ठ की प्राप्ती हुयी। उन्होने आगे बताया कि उनके पिता की मृत्यु छोटी आयु में ही हो गयी थी, हमें सरकारी अनुदान की किसी प्रकार से सहायता प्राप्त नहीं हुयी, उनके द्वारा स्वयं सरकारी दफ्तरों के चक्कर कांटे गये, परंतु जब उन्हें यह महसूस हुआ कि ऐसे ही कई अनेक मददगार होगे, जिन्हें सरकारी मदद के पात्र होने के बावजूद प्राप्त नहीं हो पाती, इसी कारण उन्होंने समाजसेवा करने की जिम्मेदारी ली और अखिल भारतीय सेवा दल की स्थापना की जिसमें वह स्वयं संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष है, इसके अतिरिक्त संयुक्त व्यापार मण्डल में प्रदेश सचिव भी है व इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय हयूमन राईट में उत्तर प्रदेश की चैयरमेन भी है, इसी कारण जिले के पिछड़ेपन को लगातार दूर करती जा रही है जिले को हाइटेक बनाने का काम लगातार कर रही है, वह एक जानीमानी पर्यावरणवादी कार्यकर्ता भी है। उनकी दो बहने व एक भाई है, जिसमे बड़ी बहन अनु जो उदयपुर में स्थित है व एक बहन पारूल जो पीलीभीत में व सबसे छोटे भाई शौर्य पटेल मेरठ में ही स्थित है।

हम खुद को मॉर्डन कहते हैं, लेकिन सच यह है कि मॉर्डनाइजेशन सिर्फ हमारे पहनावे में आया है लेकिन विचारों से हमारा समाज आज भी पिछड़ा हुआ है, नई पीढ़ी की महिलाएं तो स्वयं को पुरुषों से बेहतर साबित करने का एक भी मौका गंवाना नहीं चाहती लेकिन गांव और शहर की इस दूरी को मिटाना जरूरी है।

हांलाकि ऐसा कहना बेमानी होगा कि भारत में ऐसा नहीं हो रहा है यहां महिलाओं को उपर्युक्त कानून बनाकर काफी शक्तियां दी गई है लेकिन ग्राउंड लेबल पर अभी भी बहुत ज्यादा काम करने की गुंजाइश है, इसके बावजूद महिलायें अपनी जिम्मेदारियां बखूबी और बेहद सुंदरता से और खास बात बगैर किसी अपेक्षा के निभाये जा रही हैं।