खुला लॉकडाउन खुशियाँ आई, बंद कमरे से मुक्तियाँ पाई।
अर्से बाद शहर नें ली अंगड़ाई, मोटर गाड़ी दौङ लगाई।।

खुली शटरें, रौनक लाई, खुश व्यापारी बोहनी आई।
वस्तु निर्जीव होश आया, जिंदा सेठजी सामने पाया।।

उमंग उत्साह, माहौल आया, खोमचें, श्रमिक निवाला लाया।
सुस्त अर्थव्यस्था खड़ी होगी, जाना ऑफिस घड़ी होगी।।

आजाद पंछी से न उड़ जाना, बांध मास्क, टहलते आना।
मंदिर फिर घंटे बजायेंगे, प्रसन्न देव भोग लगायेंगे।।

भैया की साँस में साँस आयेगी, भाभी फिर खाना बनायेगी।
हँसते बच्चे स्कूल जायेंगे, पार्क बुजुर्ग फिर टहलने आयेंगे।।

परदेश से साजन फिर आयेगे, विरहा मिलन, नीर मेघ छाएंगे।
उम्मीद फिर घूँघट उठायेगी, सुबह नई साजन तरक्की लायेगी।।

आपा धापा जिंदगी नचायेगी, कहानी लॉकडॉन की याद आयेगी।
सहे दर्द भूल जायेंगे, दिन सावन फिर आयेंगे।।

अभिषेक नेमा

जबलपुर, मध्यप्रदेश