आज 5 जून यानि विश्व पर्यावरण दिवस है, परन्तु क्या हमारी जागरूकता शुभकामनाएं देने या समाचार पत्र व पत्रिकाओं में फोटो खिचवाने तक सीमित है।

जब सरकार ने पाॅलीथीन पर प्रतिबन्ध लगा रखा है तो रेहड़ी वालो पर से या सब्जी वालो से पाॅलीथीन के इस्तेमाल पर रोक क्यों नहीं लगायी जा रही है। भले ही बड़े दुकानदारों ने काफी हद तक पाॅलीथीन का प्रयोग बंद कर दिया है, न जाने स्थानीय नागरिक कब जागरूक होंगे।

स्थानीय नगर निगम ने जागरूकता अभियान चलाया, जुर्माने भी वसूले, परन्तु बावजूद इसने रेहड़ी व सब्जी वालो के लिए पाॅलीथीन का प्रयोग बदस्तूर जारी है। क्या इनके लिए सरकारी नियम कोई मायने नहीं रखते? पाॅलीथीन के प्रयोग के लिए स्थानीय नागरिक भी काफी हद तक जिम्मेदार है। पाश्चात्य प्रभाव में थैले का प्रयोग उनको अच्छा नहीं लगता है। छोटे से छोटे सामान के लिए भी पाॅलीथीन लेना अपना सम्मान समझते है। जबकि नदी नालो में जब पाॅलीथीन जाती है तो उसकी गंदगी के लिए नगर निगम की जिम्मेदारी का बखान स्थानीय नागरिक बखूबी करते है।

इस लेख के माध्यम से मेरा स्थानीय प्रशासन से अनुरोध है कि पाॅलीथीन पर प्रतिबन्ध कड़ाई से लागू करवाये तथा स्थानीय नागरिकों को इसके प्रति जागरूक करें।

दीपक शर्मा

टीचर, सहारनपुर पब्लिक स्कूल, सहारनपुर