कोरोना ने रोक दी, जन जीवन की चाल।
क्या छोटा क्या है बड़ा, सारे हैं बेहाल।।……..

करते थे जो नौकरी, बैठे घर मे आज।
ना खाने को अन्न है, और न घर मे प्याज।।…….

कैसे पालें पेट को, है भूखा परिवार ।
चिंतित मन अब कर रहा है दिन रात विचार।।…….

उम्मीदों के अंत से, टूट गयी हर आस।
अपने ही करने लगे, अपनों से परिहास।।………