आज फिर वही मेरा सवाल तो है
कि तुझे कहीं मेरा ख्याल तो है
कैसे हाले-दिल पता चले तस्वीर से
लगे तेरा भी बुरा हाल तो है
बेवजह दूर रहते हो शोख रंगों से
तेरे लरजते लब सुर्ख लाल तो है
कब तक यादों से दूर ही रहोगे
तेरे बगैर जीना मेरा मुहाल तो है
क्यों इजाजत दी नयन-पानी को
क्या यहाँ आंसु का अकाल तो है
‘उड़ता’नहीं भूला रूपजाल तो है
इस दरमियाँ दूरी का मलाल तो है
आज फिर वही मेरा सवाल तो है

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल “उड़ता “