मेरी वाणी मधुर जनप्रिय है यारों और चुनिंदा है
मुझे मालूम है यश गान है या मेरी निंदा है
शिकारी हूं परिंदों को पकड़ने की कला हममे
शहीदों की शहादत में सियासत मेरी जिंदा है।

मनोज कुमार सरल बीघापुर उन्नाव