भारत की जनसंख्या विकराल होने के कारण आत्म निर्भर बनाना कठिन ज़रूर हैं लेकिन नामुमकिन नहीं। बहुत सारे लोगों के द्वारा सरकार पर आरोप लगाया जाता है कि यदि जब आत्म निर्भर बनना ही है तो चीन व अन्य देशों से आयात वस्तुओं पर पाबंदी क्यों नहीं लगाई जाती हैं
वैश्विक स्तर पर देखे तो ये आरोप बेबुनियाद हैं क्योंकि सभी देशों के मध्य व्यापार को लेकर संधियाँ अथवा समझोते हो रखें हैं इसलिए हम किसी देश से वस्तुओं को आयात करना अचानक बंद नहीं कर सकते जब तक कोई ठोस कारण ना हो। तो कैसे होगा चीन का बहिष्कार?
इसके लिए सर्वप्रथम समस्त भारतीय लोगों को ही स्वदेशी चीज़ों को खरीदना प्रारम्भ करना पड़ेगा। जब भारत में चीन की चीज़े ख़रीदी ही नहीं जाएगी तो चीन निर्यात कैसे करेगा? लेकिन भारतीय राजनेताओं के द्वारा जनता को मुफ़्त चीज़े देना उनको विकलांग बनाने जैसा हैं। राजनेताओं को समझना चाहिए कि वोट बैंक की नीति में जनता को विकलांग ना बनाए। जब जनता आत्म निर्भर बनेगी तब भारत स्वतः आत्म निर्भर हो जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ज़िले में जिला प्रशासन अथवा राजनेताओं के द्वारा ब्लॉक स्तर पर एक ऐसे लघु उद्योग का निर्माण करना चाहिए जिसमें केवल उन लोगों को रोजगार दिया जाए जो पूर्ण रूप से असहाय हो और उस उद्योग में कार्य भी ऐसा रखा जाए जिससे वे सभी आसानी से करके अपनी रोजी रोटी कमा सके। इससे होगा ये कि लोगों को रोज़गार मिलेगा और स्वदेशी वस्तुओं का भी निर्माण होगा।
भारत को आत्म निर्भर बनाने में प्रशासन की अहम भूमिका हो सकती हैं। ज़िला प्रशासन के द्वारा ग्राम अथवा शहर के मुखिया से उनके क्षेत्रों में निवास करने वाले असहाय लोगों को सूची तैयार कर उन्हें उद्योग के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित करना होगा।
हम लोगों को भी केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहना हैं आत्मनिर्भरता के लिए एक छोटा सा अपना भी योगदान होना चाहिए।

कवि दशरथ प्रजापत पथमेड़ा, जालोर(राजस्थान)

कवि दशरथ प्रजापत
पथमेड़ा, जालोर(राजस्थान)