एक शौचालय के बाहर लिखा था ‘देश का विकास शौचालय में, विश्वास’ इसका मतलब किसी भी बात का विश्वास करने के लिए हमें शौचालय में जाना पड़ेगा, अगर ये कहा जाये की देश का विश्वास और’ शौचालय में विकास,तो फिर निकास कहा है, तो हमें इस बात का पूरा विश्वास है दिन भर में जो हम पेट भर कर अपने शरीर का विकास करते है तो अगले दिन  सवेरे शौचालय में जा कर उसका निकास कर देते है रही बात विश्वास की तो विश्वास तो हम अपने दोस्तों और रिश्तेदारों पर भी नहीं करते है,विकास और विश्वास नाम के दो सगे भाई हमारी गली में ही रहते है और विश्वास कीजिये दोनों ने ही अभी तक अपने ‘भविष्य, का विकास नहीं किया है।

सुनीत भटनागर, कानपुर