शाम को लगभग गोधूली वेला और मैं विचारों में खोया हुआ कि आखिर हमें यह कोरोना किस तरफ ले जाएगा तभी ज़ोर से श्रीमती जी की आवाज आई कि मैं आपको पिछ्ले तीन दिनों से कह रही हु की राशन खत्म हो गया है बाजार जाओ औऱ सामान ले कर आओ। मैंने लॉक डाउन और आर्थिक तंगी का हवाला दिया पर हमेशा की भांति उनके तर्को के सामने मेरे तर्क असफल हो गए औऱ बाजार का रुख करना पड़ा। तर्क भी कितना वाजिब की मोदीजी ने लॉक डाउन किया था रसोईघर ने नहीं किया था। तब तो लॉक डाउन की 65 दिन की अवधि में आप की फरमाइश अलग बेटे की अलग औऱ बेटियों की अलग अब मैं कुछ सुनना नहीं चाहती मुझे सामान चाहिए। आखिर बात मानने के अलावा कोई सहारा भी नहीं था। मैं गिलास भर ठंडा पानी पी कर बाजार की तरफ निकला।बाजार में लोगों को देख कर एक बार तो मुझे लगा कि सायद देश कोरोना मुक्त हो गया है। लोंगो में नहीं तो कोरोना सक्रमण का डर औऱ नहीं प्रशासन के आदेशों के पालना की चिंता। कोविड19 की नियमावली की भी अनदेखी हो रही थी।

सोसिअल डिस्टेंस औऱ मास्क औऱ सेनेटाइजर तो महज औपचारिकता बन गई। दो गज की दूरी तो मिलन में बदल गई। हैरानी तो तब हुई जब अच्छे, अनुभवी औऱ समझदार लोगों को सोसिअल डिस्टेंस अथवा फिजिकल डिस्टेंस की अवेहलना करते देखा गया। मैं वो दृश्य कैमरे में कैद करना भी चाहता था लेकिन फिर याद आया कि निजता भंग करना पत्रकारिता के सिद्धांतों की अवेहलना है। हमें लोगों को जागरूक करने में सहयोग करना होगा।हमें लोगों को यह बताना होगा कि अभी कोरोना गया नहीं है सक्रमण फैल रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर सक्रमण का अगर अवलोकन करें तो तेजी से सक्रमण फैल रहा है।हमें यह भी बताना होगा कि डरना भी नही है औऱ कोरोना के संग जीना भी है लेकिन लापरवाही भी नहीं बरतनी है। हमें बचाव के उपाय औऱ सावधानियां रखनी होगी। प्रशासन के आदेशों की पालना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रशासन जिला स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक जागरुकता अभियान के माध्यम से कोरोना से बचाव के उपाय बता रहा है।हमें यह जेहन में रखना होगा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से चारों तरफ हा हा कार मचा हुआ है।

कई मजबूत देशों की इस वायरस ने कमर तोड़ दी औऱ लोगों को घरों में रहने को मजबूर कर दिया।आज भी पूरे भारत मे लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा कोरोना के एक्टिव केस है।अनलॉक के पहले चरण के बाद अब अनलॉक का दूसरा चरण भी शुरू हो गया है ।अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सक्रमण की दर बढ़ी है लेकिन सरकारी प्रयासों से काफी हद तक स्थिति नियंत्रण में है। प्रशासन के आला अधिकारियों के अलावा चिकित्सा विभाग,शिक्षा औऱ पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों के अलावा कर्मचारी भी दिन रात मेहनत कर रहे है। अनलॉक के दूसरे चरण का दूसरा सप्ताह चल रहा है। हमें मास्क औऱ दो गज की दूरी के साथ सेनेटाइजर को अपने जीवन के अनिवार्य कार्यप्रणाली में लाना होगा। आमजन की कोशिश होनी चाहिए कि जो लोग जागरूक नहीं है उन्हें जागरूक बनाये।हम स्वंय अगर यह प्रण ले ले कि मैं बिना मास्क वालो से बात नहीं करूंगा औऱ दो गज की दूरी बनाए रखूँगा तो सायद काफी हद तक जागरूकता आ सकती है।कई प्रदेशों की सरकारें जागरूक सप्ताह के तहत इस मिशन को चला भी रही है।हमें उनके साथ साथ कंधे से कंधा मिला कर चलना है। यह बात सोलह आना सच है कि अगर हम प्रशासन के साथ चले तो वो दिन दूर नहीं जब कोरोना भागेगा आमजन जीतेगा।

गुलाब कुमावत साँचोर, राजस्थान