गौ धूलि वेला में गायों के सौंदर्यमय दर्शन के लिए लालायित देवता भी गौ शाला में गौ सेवा करने के लिए होड़ में लगे हुए होते हैं, ऐसा ही एक अविश्वसनीय स्थान जहां लाखों गायों की सेवा की जा रही हैं। 

पश्चिमी राजस्थान के जालोर  ज़िले स्थित पथमेड़ा गौ शाला जो विश्व की सबसे बड़ी गौ शाला है। इस गौ शाला में लाखों की संख्या में गायों की सेवा की जा रही है, सेंकड़ों की संख्या में गौ सेवक कार्य कर रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गायों के लिए चारा अथवा पोष्टिक आहार की व्यवस्था की जा रही है लेकिन विगत कुछ समय में वैश्विक महामारी गायों के मुँह से निवाला छीनने की कोशिश कर रही है।फ़िर भी यहाँ पर गायों के संयम को देखा जा सकता है 

गाय के मह्त्व को देखकर सरकार और समस्त भारतीय लोगों को इस विकट परिस्थितियों में मानव जाति के साथ साथ अपने अपने क्षेत्र के गौ शाला में यथायोग्य सहयोग देना चाहिए।आज धार्मिक अंधता ने लोगों में एक- दूसरे धर्म के प्रति द्वेष भावना को अत्यंत व्यापक रूप से फैला दिया है

आज गाय के गुणों का अन्य धर्म की धारणा देकर बहिष्कार कर दिया जाता है। भारत में आज बहुतायत में गायों का कत्ल किया जा रहा है वो भी सरकारी मान्यता के साथ। 

लेकिन वास्तविक दृष्टि से देखा जाए तो गायों को मारने से ज्यादा बचाने के लाभ हैं प्रकृति जिस प्रकार हमें निस्वार्थ वस्तुएं प्रदान करती हैं ठीक उसी प्रकार गाय भी निस्वार्थ भाव से अनेक वस्तुएं प्रदान करती हैं जैसे पंचगव्य, गाय के दूध, दही, घृत, गौमय और गौ मूत्र से बनता है, जो शरीर के समस्त रोगों को दूर करने का सामर्थ्य रखता है। गौ संरक्षण का कार्य पथमेड़ा गौ शाला अनवरत 25 सालों से कर रहा हैं। और सबसे रोचक बात यह है कि इस गौ शाला के द्वारा संचालित एक नंदीशाला जिसमें हज़ारों की संख्या में बेल अथवा नंदी(सांड) की निस्वार्थ भाव से सेवा की जा रही है। आज विषम परिस्थितियों में भी पूर्ण रूप से गायों की सेवा की जा रही हैं लेकिन हज़ारों की संख्या में कार्यरत सेवा कर्मियों के लिए परिवार पालन की आवश्यक वस्तुओं हेतु पूरे भारत से सहयोग की आशा हैं। आज हमारे देश में गाय को काटकर पैसे कमाने की जगह यदि गाय का संरक्षण करके उससे प्राप्त प्रत्येक अवयवों का सम्पूर्ण रूप से निर्वहन किया जाए तो भारत को विकसित अथवा महाशक्ति शाली बनने से कोई रोक नहीं सकता। 

इधर मनुष्य की उदारता देखो जब कोई पशु अथवा पक्षी पूर्ण रूप से समाप्त होने के कगार पर आ जाते हैं तब उनके लिए कानून बनाया जाता है जैसे जब बाघ पूर्ण रूप से विलुप्त के कगार पर आए तब उनके लिए बाघ संरक्षण अधिनियम बनाया गया। यदि आप पहले कानून बनाते तो वो लुप्त भी नहीं होते वैसे ही आज गायों की संख्या बहुत बड़ी मात्रा में हैं लेकिन उनके संरक्षण के लिए कोई कानून नहीं लेकिन जब ये भी लुप्त के कगार पर आ जाएगी तब उनके संरक्षण के लिए कानून बनाया जाएगा पर तब वह कानून किस काम आएगा?

कवि दशरथ प्रजापत पथमेड़ा, जालोर(राजस्थान)