प्रस्तुतकर्ता- सुरेंद्र सैनी बवानीवाल “उड़ता “

हम सभी हिन्दू धर्म से सम्बन्ध रखते हैं और जहाँ हिन्दू धर्म के देवी – देवताओं का जिक्र हो औरभगवान शिव शंकर का नाम नहीं लिया जाए तो कुछ अधूरा महसूस होता है. भगवान शिव के जिक्र के साथ शिवलिंग का भी नाम लिया जाता है. वैसे कहा जाता है कि कुछ ग्रंथों में शिवलिंग को गुप्तांग की संज्ञा दी गयी है लेकिन उनका कहीं प्रमाण नहीं मिलता . और इस प्रकार सुनते सुनाते अब हम हिन्दू खुद शिवलिंग को शिव् भगवान का गुप्तांग समझने लगे हैं और दूसरे हिन्दुओ को भी ये मनगढ़त जानकारी देने लगे हैं।

प्रकृति से शिवलिंग का क्या संबंध है ..?

हमें जानना चाहिए की शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है और कैसे इसका मनगढ़त अर्थ निकालकर हिन्दुओं को भ्रमित किया जाता रहा है ??

अपने देश में कुछ लोग शिवलिंग की पूजा को सही नहीं मानते और इसकी आलोचना करते हैं..।

वही लोग कहते हैं और छोटे छोटे बच्चों को बताते हैं कि हिन्दू लोग लिंग और योनी की पूजा करते हैं ।

कुछ नासमझ, नादान और मूर्खों को संस्कृत भाषा का कुछ भी ज्ञान नहीं होता है..और वो लोग अपने छोटे बच्चों को हिन्दुओं के प्रति नफ़रत पैदा करके उनको आतंकी बनाने की कोशिश करते हैं।हम जानते हैं की संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है । इसे देवताओं की वाणी (बोली )भी कहा जाता है।

लिंग

लिंग क्या होता है…?

लिंग का शाब्दिक अर्थ संस्कृत में चिन्ह या कोई प्रतीक होता है…

जबकी जनर्नेद्रीय को संस्कृत भाषा मे शिशिन कहा जाता है।

शिवलिंग

शिवलिंग क्या होता है….?

शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक या शिव के शरीर का अंश

जैसे पुरुषलिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक या पुरुष के शरीर का भाग इसी प्रकार

स्त्रीलिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक या स्त्री के शरीर का भाग और ऐसे ही

नपुंसकलिंग का अर्थ हुआ नपुंसक का प्रतीक या नपुंसक के शरीर का भाग ।

अब अगर कुछ लोग पुरुष लिंग को मनुष्य की जनेन्द्रिय समझ कर उसकी आलोचना करते है..तो वे लोग बताये कि ”स्त्री लिंग”’ के अर्थ के अनुसार स्त्री का लिंग ही होना चाहिए ।

शिवलिंग” क्या है ?

नभ, शून्य,आसमान, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने के कारण इसे लिंग कहा गया है ।
स्कन्दपुराण नामक वेद में कहा गया है कि आकाश या आसमान स्वयं एक लिंग है। शिवलिंग के वातावरण सहित घूमती सारी धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिशील (चलायमान )और गतिमान है ) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है।
शिव लिंग का एक अर्थ अनन्त भी होता है अर्थात जिसका कोई अन्त नहीं है और ना ही शुरुआत।

यह बात समझने की है कि शिवलिंग का अर्थ लिंग या योनी नहीं होता ।
..दरअसल लोगों को यह गलतफहमी भाषा के रूपांतरण और मलेच्छों यवनों के द्वारा हमारे पुरातन सनातन धर्म ग्रंथों को नष्ट कर दिए जाने पर तथा उपरांत षडयंत्रकारी अंग्रेजों के द्वारा की गयी इसकी व्याख्या से उत्पन्न हुआ है ।

जैसा कि सर्वज्ञात हैं कि एक ही शब्द के विभिन्न भाषाओँ में भिन्न -भिन्न अर्थ निकलते हैं ।

उदाहरण के लिए
यदि हम हिंदी के एक शब्द “सूत्र” को ही ले लें तो
सूत्र का मतलब डोरी, डोरा, धागा, कोई गणितीय सूत्र, कोई भाष्य अथवा लेखन भी हो सकता है। जैसे कि नासदीय सूत्र, ब्रह्म सूत्र इत्यादि ।

उसी प्रकार “अर्थ” शब्द का भावार्थ : सम्पति भी हो सकता है और अभिप्राय, मतलब (मीनिंग) भी।

ठीक बिल्कुल उसी प्रकार शिवलिंग के सन्दर्भ में लिंग शब्द से अभिप्राय चिह्न, निशानी, गुण, व्यवहार या प्रतीक है । धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है।तथा कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है। जैसे : प्रकाश स्तंभ, प्रकाश – लिंग, अग्नि स्तंभ, अग्नि – लिंग, उर्जा- स्तंभ, ऊर्जा – लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ, ब्रह्मांडीय – लिंग (Cosmic-pillar or Cosmic lingam).

इस पूरे ब्रह्माण्ड में दो ही चीजे विद्यमान हैं : ऊर्जा और प्रदार्थ।
हमारा मानव शरीर प्रदार्थ से निर्मित है और आत्मा इसकी ऊर्जा है।

इसी प्रकार शिव पदार्थ का और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते हैं।

ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तत्व तथा ऊर्जा शिवलिंग में निहित है। वास्तव में तो शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की ही आकृति मानी जाती है.

The whole universe is a sign of Shiva Lingam

शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-आनादी एकल रूप है तथा मानव और प्रकृति की समानता का प्रतीक भी माना जाता है। अर्थात इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है अर्थात दोनों एक रूप समान हैं।

अब बात करते है योनि शब्द पर-

मनुष्ययोनि, ”पशुयोनी”, पेड़-पौधों की योनी’जीव-जंतु योनि
योनि का संस्कृत भाषा में विद्यमान, प्रादुर्भाव ,प्रकटीकरण अर्थ होता है….

जीव अपने कर्म के अनुसार चौरासी लाख (84,000,00) विभिन्न योनियों में जन्म लेता है। किन्तु कुछ धर्मों में पुनर्जन्म की मान्यता नहीं है.उन्हें अल्पज्ञानी या नासमझ समझा जा सकता है l इसीलिए योनि शब्द के संस्कृत भाषी अर्थ को नहीं जानते हैं। जबकी जगजाहिर है कि हिंदू धर्म मे 84 लाख योनि बताई जाती है।यानी 84 लाख प्रकार के जन्म होते हैं। अब तो देशी विदेशी वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि सम्पूर्ण धरती पर 84 लाख प्रकार के जीव (पेड़, जंतु, कीट,जानवर,मनुष्य आदि) है।

मनुष्य योनि

पुरुष और स्त्री दोनों को मिलाकर मनुष्य योनि होता है।अकेले स्त्री या अकेले पुरुष के लिए मनुष्य योनि शब्द का प्रयोग संस्कृत में नहीं होता है। तो कुल मिलाकर अर्थ यही है:-

लिंग का तात्पर्य प्रतीक से है शिवलिंग का मतलब है पवित्रता का प्रतीक ।
दीपक की प्रतिमा बनाये जाने से इस की शुरुआत हुई , बहुत से हठ योगी दीपशिखा पर ध्यान लगाते हैं । हवा में दीपक की ज्योति टिमटिमा जाती है और स्थिर ध्यान लगाने की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करती है।

इसलिए दीपक की छवि-प्रतिमा स्वरूप शिवलिंग का निर्माण किया गया। ताकि निर्विघ्न एकाग्र होकर ध्यान लगाया जा सके । लेकिन कुछ पुरानी विकृत गैर-सनातनी मुग़ल काल व गंदी सोच और मानसिकता बाले गोरे लोगों (अंग्रेजों) के गंदे मस्तिष्क ने इस में गुप्तांगो की कल्पना कर ली और झूठी द्विअर्थी – कुत्सित कहानियां बना ली और इसके पीछे के रहस्य की जानकारी न होने के कारण अनभिज्ञ भोले हिन्दुओं को आज तक भ्रमित ही करते रहे ।

सुरेंद्र सैनी जी ने इस बारे में कुछ पुरोहितों से वार्ता की तो उन्हें बताया गया कि अपने समाज में आज भी बहुत सारे हिन्दू इस दिव्य – अलौकिक ज्ञान से अंजान और अनभिज्ञ है।
हिन्दू सनातन धर्म व उसके सभी उत्सव – त्यौहार पूर्णतया विज्ञान पर आधारित है।जोकि हमारे पूर्वजों ,संतों ,ऋषियों-मुनियों तपस्वियों की देन है।आज का विज्ञान और वैज्ञानिक भी हमारी हिन्दू संस्कृति की अदभुत हिन्दू संस्कृति व इसके रहस्यों को सराहनीय दृष्टि से देखता है व उसका सम्मान करते हुए उसपर शोध-रिसर्च कर रहा है।

नोट÷ सभी हिन्दुस्तानियों, शिव-भक्तों व सनातन प्रेमीयों से विनम्र प्रार्थना है कि हमारे द्वारा दी गयी यह जानकारी सभी के साथ भरपूर मात्रा में साँझा करें ताकि सभी को ऐसी ही हमारे हिन्दू धर्म से जुड़ी अनेको जानकारी मिल सके।