बाबू सिंह एडवोकेट उन्नाव

सावन का महीना शुरू हो चुका है, आज शिवरात्री का महापर्व है इस महीने में देवाधिदेव भगवान शिव की विशेष पूजा करके उन्हें प्रसन्न किया जाता है। वहीं कुछ चीजें ऐसी है जो शिव पूजा में काफी महत्व रखती है।

ये चीजें सावन में ही नहीं बल्कि हर सोमवार को भोलेनाथ को चढ़ाई जाती है जैसे कि भांग, धतूरा, बेलपत्र आदि। ऐसी मान्यता है कि ये सब चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामना पूरी कर देते हैं।
इन सबमें सबसे ज्यादा महत्व बेलपत्र का है और इसके बिना तो भगवान शिव की पूजा अधूरी ही मानी जाती है।

अब सहज ही यहां सवाल उठता है कि आखिर बेलपत्र में ऐसा क्या है जिसकी वजह से भगवान शिव इसे चढ़ाने से इतने खुश होते हैं।

आइये यहां बेलपत्र से जुड़ी बातें जानते हैं और यह भी कि भोलेनाथ इसे इतना पसंद क्यों करते हैं

भगवान शिव को बेलपत्र प्रिय क्यों है इस बात को समुद्र मंथन से जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि भगवान शिव ने जब समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान किया तो इससे उनके कंठ में जलन हुई।

इसी जलन को दूर करने के लिए उनका जलाभिषेक करते हैं और साथ ही उनके मस्तक को ठंडक प्रदान करने के लिए उन्हें बेलपत्र चढ़ाया जाता है।

साथ ही यह भी माना जाता है कि बेलपत्र शिवजी को चढ़ाने से दरिद्रता दूर होती है और व्यक्ति सौभाग्यशाली बनता है।

बेलवृक्ष को संपन्नता का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि बिल्व वृक्ष में माँ लक्ष्मी का भी वास होता है । अत: घर में बेल वृक्ष लगाने से देवी महालक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं, जातक वैभवशाली बनता है।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र का महत्व

बेलपत्र की तीन पत्तियों वाला गुच्छा भगवान शिव को चढ़ाया जाता है और माना जाता है कि इसके मूलभाग में सभी तीर्थों का वास होता है।

कहते हैं जिस घर में बेल का वृक्ष होता है वहां धन-धान्य की कभी कोई कमी नहीं होती।

जो भक्त भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं और भोलेनाथ उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं।

बेलपत्र से जुड़ी कुछ खास बातें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ तिथियों को बेलपत्र तोड़ना वर्जित होता है। जैसे कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसे में पूजा से एक दिन पूर्व ही बेल पत्र तोड़कर रख लिया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता। पहले से चढ़ाया हुआ बेलपत्र भी फिर से धोकर चढ़ाया जा सकता है

बेलपत्र की तीन पत्तियां ही भगवान शिव को चढ़ती है। कटी-फटी पत्तियां कभी न चढ़ाएं।
बेल वृक्ष की उत्पत्ति के संबंध में ‘स्कंदपुराण’ में एक कथा है जिसके अनुसार एक बार देवी पार्वती ने अपनी ललाट से पसीना पोछकर फेंका, जिसकी कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, जिससे बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ।

इस वृक्ष की जड़ों में गिरिजा, तना में महेश्वरी, शाखाओं में दक्षयायनी, पत्तियों में पार्वती, फूलों में गौरी का वास माना गया है।

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भगवान शिव को ऐसे चढ़ाएं बेलपत्र

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को हमेशा उल्टा बेलपत्र यानी चिकनी सतह की तरफ वाला वाला भाग स्पर्श कराते हुए ही बेलपत्र चढ़ाएं। बेलपत्र को हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से चढ़ाएं। शिव जी को बिल्वपत्र अर्पण करने के साथ-साथ जल की धारा जरूर चढ़ाएं।

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