By- संजय & अनिल बिश्नोई साँचौर

इस धरती पर अनेक प्रकार की मिट्टी पाई जाती है जहां पर जल का अलग-अलग जमाव अथवा  ठहराव होता है जहां कहीं पर सूखा कहीं हरा भरा मौसम भी जल के जमाव के आधार पर गिरगिट की तरह रंग बदल देता है। जल के अभाव में मिट्टी की खड़ियां पड़ जाती हैं कोसों दूर पीने को पानी नसीब नहीं होता। शरीर में से पसीना निकलना बंद हो जाता है। गला सूख जाता है। ऐसा वातावरण सूखा पड़ने पर होता है

प्रकृति का अद्भुत चक्र देखा जाए तो दूसरी ओर पत्थर पर गिरते झरने के पानी की छल-छल की आवाज दिल को चीर कर मन को मुग्ध कर डालती है। वह पीपल के पत्ते से टपकती पानी की बूंद मोती सी प्रतीत होती है सायंकाल में बादल और बादलों में मौजूद जल से बना इंद्रधनुष वातावरण को और अधिक लालित्यपूर्ण बना देता है। 

वह प्रकृति का अद्भुत चक्र जिससे बादलों का बनना, गर्जना, बरसना और फिर जल का इस प्रकार आयात निर्यात करना मौसम को आनंदित कर देता है । प्रकृति को हसीन बनाने में जल का महत्व होता है। पेड़ पौधों से पानी के बरसने और ठहराव से जो संबंध है वाकई अद्भुत हैै। सावन में ऊमस का मुख्य कारण जल ही होता है बरसने से पहले गर्मी और बरसने के बाद शीतलता प्रदान करने का श्रेय जल को ही जाता है देखा जाए तो संसार के समस्त सुख और सुंदरता की मुख्य  आधार जल ही होता है ।

जल ही जीवन है