BY- पवन त्रिपाठी

 भारत की राजनीती एक नए मोड़ पर दिखाई दे रही है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण अभी कुछ दिनों से हम सबके सामने है हिंदी भाषी दो राज्यों में कांग्रेस की सत्ता आने के बावजूद भी बीजेपी ने अपनी राजनीतिक योग्यता से अपनी पार्टी का परचम लहराया हालांकि राजस्थान में अभी भी स्तिथि कांग्रेस सरकार की तरफ जाती हुई दिखाई दे रही है अभी राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के युवा नेता सचिन पायलट ने मीडिया में अपना ब्यान दिया है कि वे पार्टी को नहीं छोड़ रहे है, जिससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है थोड़ा सा अंतर है मध्य प्रदेश के युवा नेता श्री सिंधिया और सचिन पायलेट में सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर पार्टी को इस्तीफा दिया और बीजेपी का हाथ थामा कहने का अभिप्राय यह है कि यह सियासी चाल आखिरकार शुरू क्यों हुयी और विपक्षी पार्टी के कौशल और कर्मठ नेताओं को ही परेशानी क्यों हुई अगर पार्टी को छोड़ना ही सबसे बड़ा उपाय है तो फिर सभी ने यह निर्णय क्यों नहीं लिया इन दो नेताओं को ही बाहर का रास्ता दिखाई दिया 

आखिरकार कुछ तो राजनीतिक चाल है जो खेली जा रही है अब पायलट का जो कथन है उसे देखकर ऐसा लगता है कि वे विपक्षी पार्टी में  अपना पद और बढ़ाना चाहते है या उनका राजनीती से मन विमुख हो रहा है ये विचार सिर्फ उनके कथन के आधार पर है 

क्योंकि श्री सिंधिया ने अपने मत में सीधा स्पष्टीकरण दिया है कि प्रदेश की जनता की विकास के लिए वे पिछले कुछ सालों से लगातार पार्टी प्रमुख से बात कर रहे थे लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज किया जा रहा था इसके बावजूद भी उन्होंने अभी कुछ दिन पहले हुए विधानसभा के चुनाव में  पार्टी के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य किया और जीत हांसिल कराई जिसके रहते उन्होंने अपनी गुना सीट को भी खोया फिर भी पार्टी के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ से उनका सामंजस्य ठीक नहीं था बस यही वजह उनको पार्टी से बाहर खींचकर ले आयी 

लेकिन पायलट की स्तिथि सिंधिया से कुछ उलटी दिखाई रही है दोनों ही नेताओं कि सोच में जमीन और आसमान का अंतर है हालंकि ये दोनों नेता बहुत अच्छे मित्र भी है फिर भी पार्टी के आधार पर दोनों का मत अलग है अब देखते है भविष्य में आंकड़े क्या कहेंगे ये तो कार्यवाही के आधार पर ही पता चलेगा लेकिन पायलट के लिए आज भी कांग्रेस पार्टी के दरवाजे खुले हुए है 

अब श्री सिंधिया की बीजेपी में स्तिथि कितनी अच्छी होगी किस पद पर महाराज आसीन होंगे ये तो बीजेपी की मुख्य लोग ही जाने लेकिन इन दोनों नेताओं ने फिलहाल लोकत्नत्र की राजनीती में एक नया कदम उठा लिया है जो इन दोनों के लिए विचारणीय है चाहे वो सिंधिया हो या फिर सचिन पायलट

ये लेखक के निजी विचार हैं।आजक्याका इससे सहमत अथवा असहमत होना आवश्यक नहीं है।)