आज हम आपको हरियाणा की एक ऐसी शख्शियत से मिलाने जा रहे हैं जिनका नाम जनसेवा के क्षेत्र में सम्मान के साथ लिया जाता है. ये एक बहुत अच्छी वक्ता, सामाजिक कार्यकर्त्ता, समाज सेविका,  अध्यापिका, गृहिणी, सफल पत्नी और एक परिपूर्ण माँ हैं. इनका नाम है   सुश्री सुमन राणा जी. इनका निवास हरियाणा  के कैथल जिले  के कलायत क्षेत्र में पड़ता है। इनका नाम अकसर हम सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम में सुनते हैं। हमारे पत्रकार साथी सुरेंद्र सैनी बवानीवाल जी ने सुमन राणा जी से जीवन के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की ।प्रस्तुत है उस दुरभाषी बातचीत के कुछ अंश :-

सुरेंद्र – नमस्कार सुमन जी मेरा नाम सुरेंद्र सैनी है और मैं झज्जर हरियाणा से आपसे बात कर रहा हूँ ।
सुमन राणा जी – जी नमस्कार कैसे हो आप?हाँ आपके बारे में आपकी कम्पनी के CEO हिमांशु जी ने बताया था।
सुरेंद्र – जी मैं अच्छा हूँ और आप कैसे हैं? 
सुमन राणा जी – मैं भी अच्छी हूँ।
सुरेंद्र -आदरणीय  सुमन जी मैं आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता था इसलिए आपको ये फोन कॉल किया गया है। 
सुमन राणा जी – ठीक है जी आप जो सवाल पूछना चाहते हैं पूछ लीजिए ।
सुरेंद्र – आपका पूरा नाम क्या है? 
सुमन राणा – मेरा बचपन का नाम ‘देवी ‘है और रजिस्टर्ड नाम सुमन राणा है और इसी नाम से सभी मुझे जानते हैं ।
सुरेंद्र – सुमन जी आपके परिवार के बारे में कुछ बताइए ।
सुमन राणा – मेरे परिवार में मैं हूँ, मेरे पति और एक बेटा है।
सुरेंद्र – आपके पति और बेटे का नाम क्या है ?
सुमन राणा जी – मेरे पति का नाम श्री अर्जुन सिंह राणा है ,और मेरे बेटे का नाम आशुतोष राणा है ।
सुरेंद्र – क्या  आपके पति भी आपके साथ सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं? 
सुमन राणा – जी नहीं मेरे पति एक  किसान हैं ।लेकिन इन दिनों स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं रहता इसलिए घर पर ही हैं ।
सुरेंद्र – आपके बेटे के बारे में कुछ बताइए । 
सुमन राणा – आशुतोष अभी 12 में पढ़ रहा है । वह चाहता है कि अपनी आगे की पढ़ाई ऑस्ट्रेलिया से पूरी करे। खैर मेरी तरफ से कोई मनाही नहीं होगी।

सुरेंद्र – आप अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत के बारे में कुछ बताइए ।
सुमन राणा जी – जी मेरी राजनीतिक शुरुआत तो एक तरह से मेरे मायके सहारनपुर से ही हो गई थी क्योंकि मेरे पिता भी राजनेता थे और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे और माँ भी राजनीति में थी ।मेरी माँ उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्या थी और इंदिरा गाँधी जी से बहुत प्रभावित थी ।वे धार्मिक विचारों की महिला हैं ।वे राजीव गाँधी जी के समय भी  कांग्रेस के साथ थी । मेरी माँ से ही मुझे आत्म रक्षा के संस्कार मिले ।मेरी माँ को लाठी चलाना ,बंदूक चलाना आता था ,वो बहुत निडर थीं ।समाजसेवा का जज़्बा भी मुझे मेरे मायके से ही मिला।
सुरेंद्र – आपका ज़्यादा ध्यान किस तरह के  कार्यों पर रहता है? 
सुमन राणा – सुरेंद्र जी ये आपने बहुत अच्छा सवाल किया ।वैसे तो मेरा फोकस सभी प्रकार के कार्यों पर रहता है जैसे नए कार्यकर्त्ता जोड़ना, गली नुक्कड़ सभाएं, जनसर्वे करवाना ,शहर के विकास के बारे सम्बंधित व्यक्ति से संज्ञान लेना, आदि लेकिन मेरी ज्यादा गौर महिलाओ से सम्बंधित कार्यों पर ही जाता है ।आज भी अपने समाज में महिलाओं की स्तिथि इतनी अच्छी नहीं है । 
सुरेंद्र – क्या आपका कोई कार्यक्षेत्र निर्धारित है?
सुमन राणा जी – यह भी एक बहुत अच्छा सवाल है। आपने यह सवाल पूछा तो मैं आपको बताना चाहूंगी कि मैं कई संस्थाओं से जुड़ी हूँ जिनमें से एक नाम है “अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति “और इसमें मैं प्रांतीय महिला प्रमुख हूँ और यहाँ मेरा कार्यक्षेत्र पूरा भारत है। जम्मू से लेकर कन्याकुमारी तक और महाराष्ट्र से लेकर असम तक। इसी सिलसिले में हमें पहाड़ी, आदिवासी  क्षेत्रों तक भी जाना पड़ता है।
सुरेंद्र – जब आप पहाड़ी या आदिवासी क्षेत्र में जाती हो तो क्या कभी आपके साथ कोई भाषा से सम्बंधित कोई दिक्कत आयी? 
सुमन राणा – जी हाँ बहुत बार ऐसा भी होता है लेकिन भावनाओं को  समझने के लिए किसी विशेष भाषा की जरुरत नहीं होती। एक औरत दूसरी औरत के दर्द को आसानी से समझ सकती है ।
सुरेंद्र – लोगों से मिलकर आपने क्या महसूस किया? 
सुमन राणा – लोगों से मिलकर सिर्फ मायूसी के कुछ हाथ नहीं लगता। हम खुद को देखते हैं तो पता चलता है कि हम तो बहुत अच्छी स्तिथि में हैं । ऐसे भी लोग इस देश में रह रहे हैं जिनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है। मेरी तो रुलाई फूट पडती थी जब मैं किसी ऐसी औरत को देख लेती थीं।मैंने ऐसे लोगों के लिए अपने दम पर बहुत कुछ करने की कोशिश की है ।मैं किसी भी काम के लिए किसी से कोई भी मदद नहीं लेती।
सुरेंद्र – आपको देश की बड़ी समस्या क्या लगी? 
सुमन राणा जी – मुझे तो देश की सबसे बड़ी समस्या गरीबी लगी। मैंने कई जगह झुग्गी झोपड़ियां देखी जिनमे गरीबी दिल तोड़ रही है। इंदौर mp में देखा, बडवानी है और उससे आगे अम्बापानी जहाँ मैंने बुरी स्थिति देखी । ऐसी नाजुक हालत देखकर तो दिल पिंघल जाता था । उनकी दशा इतनी दयनीय है कि उनके पास पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े तक नहीं होते। आप विश्वास करना उन्होंने बंजर सी जगह पर झोपड़ी बनायीं हुई है ।उसके एक कोने में उनके पशु, गाय आदि बँधे हुए है,उनकी मुर्गी भी वहीँ हैं, उनका थोड़ा बहुत सामान भी उसी झोपडी में और दूसरे कोने में वो मिट्टी के ढेले पर  घासफुस के गद्दे बनाकर सोते हैं,झुग्गी को दरवाजा नहीं है । वे ईमानदार लोग हैं । हम लोगों का सत्कार भगवान समझकर किया ।उनके पास नाम मात्र का कपड़ा होता है जिसे वो शाम के समय धोकर डाल देते हैं और एक अंगोछा लपेट लेते हैं  और  ऐसे ही रह रहे है।


सुरेंद्र – क्या एक जगह पर दोबारा भी जाना होता है आपका? 
सुमन राणा जी – जी हाँ मैंने इंदौर, MP से आकर अपने वरिष्ठ सदस्यों को कहा कि जब भी दोबारा इंदौर का टूर बनेगा मैं वहाँ दोबारा जाना चाहूंगी और वहाँ की औरतों को कपड़े दान करना चाहती हूँ ।
सुरेंद्र – कोई और ऐसी जगह जहाँ आपके हिसाब से काम होने की बहुत गुंजाइश है? 
सुमन राणा जी – हाँ ऐसी तो बहुत सारी जगह है जैसे की मैं उड़ीसा गई हूँ,  बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय गई हूँ बिहार गई ,वहाँ की condition भी बहुत कुछ ठीक नहीं है जबकि देश के सबसे ज़्यादा IAS, IPS बच्चे वहीं से निकलते है। इनको वहाँ से निकलकर पता नहीं क्या हो जाता है कि ये अपने area को तो neglect कर देते है। शायद ये मन से नाउम्मीद हो जाते होंगे।राजनेताओं ने यहाँ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया कि कहीं लोग समझदार होने लगेंगे तो वोटबैंक प्रभावित हो जाएगा ।
सुरेंद्र – आप युवाओं के रोज़गार के बारे में क्या कार्य  करते हो? 
सुमन राणा – हम युवाओं के लिए समय समय पर  कैम्पेनिंग करते हैं जिसमें उन्हें नशे से दूर रहने के लिए कहा जाता है, हम उनकी काउंसलिंग करते है ताकि वो अपना एक aim बना सकें ।जब चुनाव पास आते हैं तो भी हम युवाओं को एडवरटाइजिंग और दूसरे काम देते हैं।
सुरेंद्र – सामाजिक कार्यों के अलावा आप क्या करते हो? 
सुमन राणा जी  – जी मैं नरवाना -कैथल रोड़ पर स्तिथ  महर्षि दयानन्द पब्लिक स्कूल में  हिंदी और होम साइंस की अध्यपिका हूँ । वहाँ भी मैं शिक्षा की सेवा करती हूँ ।वहाँ भी हम सेमिनार करते हैं, बच्चों की काउंसलिंग करते हैं. कई बार पार्टी की तरफ से भी इन कामों की मदद मिल जाती है । वैसे मैं खुद के दम पर ही ज्यादातर कर लेती हूँ ।स्कूल के काम के अलावा कई बार बहुत busy हो जाती हूँ और चीजें होश-पोश हो जाती है लेकिन मैं मैनेज कर लेती हूँ । कोई भी कठिन परिस्थिति कभी मुझे रोक नहीं पायी। कोई भी काम मेरे सामने आता है तो मैं उसमें होने की संभावना तलाशती हूँ फिर भी कोई दिक्कत आ जाए तो अरेंजमेंट हो जाता है ।
सुरेंद्र – लोकडाउन के दौरान आपने क्या किया? 
सुमन राणा जी – वैसे तो मैंने भी अपने  परिवार के साथ टाइम spend किया लेकिन मेरा मन सामाजिक कामों में लगता है इसलिए मैंने अपने हाथों से  कपड़े के दस हज़ार मास्क बनाकर जरुरतमंदो में वितरित किए और मैंने इस काम के लिए  किसी  की भी मदद नहीं ली । आलोचकों ने अपना काम किया । मुझे जो हिम्मत मिली उसमें उन साथियों का रोल ज्यादा रहा ।इस काम में मेरे पूरे पचास हज़ार रूपये खर्च हुए ।हमने टीम वर्क में जरुरतमंदो तक खाना भी पहुँचाया।गाड़ी लेकर  राशन की  किट  और  सैनिटाईज़र बाँटने गए और लेबर क्लास  लोगो की सहायता की । हालांकि बहुत से रास्ते बंद थे लेकिन हमारी टीम ने कोरोना योद्धा का कार्ड बनवाया हुआ था as a वालंटियर्स. मुझे खुद SDM साहब का भी फोन आया था कि अगर आपकी ड्यूटी लगायी जाए तो आपको कोई परेशानी तो नहीं है। मैंने कहा जी कोई दिक्कत नहीं है ,आप मुझे बताइये कहाँ – कहाँ जाना है।ऐसा कोई गवर्नमेंट डिपार्टमेंट  नहीं रहा जहाँ मैंने मास्क ना भिजवाएं हो। मुझसे तो लोग खुद आकर लेकर जाते थे परिवार के लिए या किसी को देने के लिए । मैंने कभी किसी से कोई पैसा या चार्जिंग नहीं ली । मैंने कैथल में (जेड किंग)कॉचिंग सेंटर के भी बहुत सारे मास्क बनाकर दिए । मैं एक दिन मास्क खुद ही बनाती थी क्योंकि उन दिनों मेरा स्कूल भी बंद था और मेरे पास भी समय था और मैं अगले दिन मास्क  डिस्ट्रीब्यूट करती थी। ये सब काम मैं अपनी आत्मिक संतुष्टि के लिए और अपने देश के लिए करती हूँ। मेरे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। 
सुरेंद्र – क्या कभी आपने रक्तदान किया है? 
सुमन राणा जी – जी मैंने लोगों के साथ मिलकर आयोजन तो किया है लेकिन मैं अपनी age की वजह से खुद रक्तदान नहीं कर सकी । मुझे दोनों बार मना कर दिया गया । 13 अगस्त 2020 को  मेरी उम्र 51वर्ष होने जा रही है।
सुरेंद्र – क्या आपको पार्टी से किसी प्रकार की मदद मिलती है ? 
सुमन राणा जी – जी  नहीं ,वैसे मैं जो काम उठाती हूँ उसे अपने ऊपर ही लेकर चलती हूँ। वैसे मेरे स्टूडेंट्स मेरे लिए ज्यादातर अरेंजमेंट कर देते हैं अगर कभी ज्यादा जरुरत पड़ती भी है तो । 
सुरेंद्र – आपका आने जाने में बहुत समय और पैसा लगता होगा?
सुमन राणा जी – हाँ समय और पैसा तो लगता ही है। कई बार तो ऐसी जगह जाना हो जाता है जहाँ पानी भी नसीब नहीं हो पाता ।दिक्कतें तो आती ही है लेकिन मैं परेशानियों से घबराती नहीं हूँ । 
सुरेंद्र – आप सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हो और राजनीति में भी हो तो क्या कभी इसी क्षेत्र में और आगे बढ़ने का नहीं सोचा आपने? 
सुमन राणा जी – जी हाँ मैंने राजनीति में आगे आने का सोचा try भी की थीं  लेकिन कुछ खास नहीं हो पाया ।वो कहते हैं ना कि समय से पहले कुछ नहीं मिलता ।शायद अभी मेरे भाग्य में नहीं है । हो सकता है भगवान ने मेरे लिए कुछ और अच्छा सोच रखा हो ।
सुरेंद्र – आगे क्या काम शुरू करने जा रहे हो आप? 
सुमन राणा जी – जी मैं सोच रही हूँ अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए कोई काम शुरू किया जाए जिससे उन्हें आगे लाया जा सके। मैंने देखा है कि बहुत से लोगों के राशन कार्ड तक नहीं बने हैं। जो वंचित है वो वंचित ही रह गए ।तो मैं खुद सम्बंधित अधिकारी से मिलकर ये सभी काम करवा देती हूँ ।
सुरेंद्र – क्या आपको लगता है हर नेता को राष्ट्र के लिए कुछ दान जरूर करना चाहिए? 
सुमन राणा जी – जी हाँ, हर नेता को देश के लिए कुछ दान करना ही चाहिए क्योंकि अगर वो सेवा के क्षेत्र में आए हैं तो राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी बनती है जिसे उन्हें निभाना चाहिए ।मैंने तो अपने बाद अपनी देह भी दान कर रखी है ताकि किसी जरूरतमंद के काम आ सकूं ।
सुरेंद्र – क्या चुनाव के लिए अलग से भी कोई एजेंडा आपको बताया जाता है? 
सुमन राणा जी – जी हाँ , हमें पहले ही बता दिया जाता है कि आपको वहाँ जाना है। इतने लोगों से मिलना है। इतने नए लोग जोड़ने हैंआदि ।
सुरेंद्र – क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपके किसी सहयोगी साथी का अच्छा काम देखकर आपने उनके लिए कोई पक्ष किया हो? 
सुमन राणा जी – जी हाँ ,अच्छा काम करने वालों को नाम मिलना ही चाहिए। ऊपर बैठे लोगों को ग्राउंड लेवल की सारी बातों का नहीं पता होता ।कई बार बीच में बैठे लोग ऊपर तक बात पहुँचने ही नहीं देते  इसलिए हम भी उनके ध्यान में कुछ बातें लाते हैं ।कुछ लोगों को ये भी डर लगता है कि कहीं कोई उनसे ऊपर ना चला जाए। हमारे प्रयास से अगर किसी को उसकी मेहनत की तरक्की मिल जाए तो अच्छी बात है। 
सुरेंद्र – क्या कभी किसी बात ने विचलित किया आपको? 
सुमन राणा जी – जी नहीं ,कोई असत्य बात मुझे विचलित नहीं कर सकती । मुझे अपनी जान की भी कोई परवाह नहीं है ।मैं डरने या घबराने वालों में से नहीं हूँ । संघर्ष पूर्ण जीवन रहा बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा ।मेरा उपरवाले पर बहुत विश्वास है ।
सुरेंद्र – एक चुनाव से दूसरे चुनाव के बीच में आप क्या अलग करती हो? 
सुमन राणा जी – आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा, जैसा कि मैंने बताया कि मैं अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति से जुडी हुई हूँ तो मैं भी विभिन्न अनुसन्धान विषयों पर काम करती रही हूँ। अब मैंने सोचा है कि मैं एक पुस्तक लिखूं , जिसमें महाभारत काल की 48 कोस की परिधि पर जानकारी एकत्रित की गई हो। जिसमे  बॉर्डर भी लगता है  चिका से कुरुक्षेत्र तथा  तक जींद आदि और मैं लेखन कार्य कर रही हूं अपनी यात्राओं पर ।
सुरेंद्र – क्या साहित्य की तरफ भी रुझान है आपका? 
सुमन राणा जी – हाँ जी बिल्कुल, साहित्य तो मेरा प्रिय सब्जेक्ट रहा है और  मेरा रुझान साहित्य की तरफ भी बराबर है। मैंने M.A हिंदी में किया हुआ है तो पढ़ना और पढ़ाना साथ साथ चलता रहता है ।
सुरेंद्र – तो क्या साहित्य सम्बंधित कार्यक्रमों में शिरकत भी करते हो? 
सुमन राणा जी – जी हाँ, अतिथि के रूप में और कभी कभी प्रतिभागी के रूप में भी। हर महीने कैथल  कॉलेज में प्रोग्राम होता है तो मुझे भी आमंत्रित किया जाता है और बहुत संस्थाओं द्वारा मुझे सम्मानित भी किया जा चुका है।


सुरेंद्र – आपके हिसाब से एक राजनेता में क्या खूबी होनी चाहिए? 
सुमन राणा जी – जी हो सकता है आज आपको मेरे विचार अच्छे लगें और कल को मैं राजनेता बन जाऊं तो मुझमें भी बदलाव आ जाए ।समय बलवान होता है ।मुझे लगता है इंसान के पतन का कारण उसका अहम (घमंड ) होता है जो किसी भी नेता में नहीं होना चाहिए ।लोग जिन नेताओं के लिए रात -दिन काम करते हैं और जरुरत पड़ने पर वही नेता उनकी  किसी भी मदद को नहीं आते जबकि उन्हें जनता ने, इन्हीं लोगों ने बनाया है। नेताओं को जनता की आवाज़ बनना चाहिए और उनको साथ लेकर चलना चाहिए ।
सुरेंद्र – अपना कोई अनुभव साँझा कीजिये-
सुमन राणा जी – जी 2019 के चुनाव के लिए जब मैं कम्पैनिंग के लिए जाती थी तो बुजुर्ग मुझसे पूछते थे कि “बेटी.. क्या टिकट तुम्हें मिली है… अगर तुमको टिकट मिली है तो हमारा वोट तुम्हें ही मिलेगा “तब मैं उनको बताती थी कि जी मुझे नहीं मिली है लेकिन जिसे मिली है वो भी अपना ही उम्मीदवार है उनको भी आपके सहयोग की जरूरत है ।दरअसल मैं इस एरिया में बहुत काम कर चुकी हूँ । इनके बच्चे मुझसे स्कूल में पढ़ चुके हैं। मेरी इन क्षेत्रों के लोगों से बहुत वाकफियत है। यहाँ मेरे काम का दबदबा है। मेरी बहुत जान पहचान है। जिस कंडीडेट को टिकट मिली थी उसे कोई जानता ही नहीं था।तब मैंने पार्टी के लिए बहुत काम किया। मेरे स्टूडेंट भी मुझे ही वोट देने के बारे में बोलते थे ।जनाधार तो उस व्यक्ति का बनता है जो लोगों में जाकर काम करता है। मैं RSS से भी जुड़ी हुई हूँ और उनके सभी वर्ग में शामिल हुई हूँ। 
सुरेंद्र – कुछ RSS या भाजपा के बारे में बताइए ।
सुमन राणा जी – मुझे लगता है RSS और भाजपा हमेशा हिन्दुस्तान और हिंदुत्व की बात करते हैं। उनमें कभी तेरा या मेरा जैसी कोई बात नहीं सुनने को मिलती। जो कि बहुत अच्छी बात है ।वैसे हमारे तो संस्कार भी ऐसे नहीं है कि हम तेरे मेरे वाली कोई बात करें या देश से ऊपर होकर कुछ बोले। RSS हर भारतीय को अपनी ज़मीन से जोड़ कर रखती है ।आज देश को ऐसी सोच और दिशा की जरुरत है ।
सुरेंद्र – राजनीति से अलग परिवार के लिए कितना समय निकल पाते हो आप? 
सुमन राणा जी – काम करके घर वापिस आने के बाद सारा समय परिवार का ही होता है मान लो बारह बजे तक (इतना कहकर हँसने लगती हैं )

सुरेंद्र – आप अपने काम से पूर्णतया संतुष्ट हैं? 
सुमन राणा जी – जी सौ बटा सौ  संतुष्ट हूँ सब भगवान की कृपा है ।
सुरेंद्र – आपके  काम से आपके स्कूल को तो कोई ऐतराज़ नहीं होगा? 
सुमन राणा जी – जी बिल्कुल नहीं बल्कि वो ख़ुश होते हैं क्योंकि सभी अखबारों और पत्रिकाओं में मेरे नाम के साथ उनके स्कूल का नाम भी आता है और  स्कूल में तक़रीबन सभी अंग्रेजी और हिंदी अख़बार आते हैं, जहाँ भी अख़बार और पत्रिका पहुँचती है स्कूल की भी  एडवरटाइजमेन्ट  हो जाती है। जब प्रिंसिपल और मैनेजमेंट खबर पढ़ते हैं तो उनको फ़ख्र महसूस होता है और वो मेरी भी तारीफ करते हैं ।उन्होंने कहा कि आप मास्क बनाने वाला अपना वीडियो बनाकर व्हाट्सप्प ग्रुप पर डाला करो जिससे बच्चों को और उनके अभिभावकों को भी आपके द्वारा किए कार्यों के बारे में पता चले और बच्चे भी सीखेंगे ।
सुरेंद्र – क्या आपके कार्य कहीं सहायक होते हैं आपकी जॉब प्रमोशन या इन्क्रीमेंट के लिए? 
सुमन राणा जी – (हँसते हुए )..नहीं जी ऐसा कुछ नहीं है। मैं किसी ईनाम के लिए ऐसा नहीं करती । उन्होंने मेरे सामने 50 मीटर कपडा देने की पेशकश की थी लेकिन मैंने मना कर दिया था फिर उन्होंने 50 मीटर  इलास्टिक भेजी थी क्योंकि लोकल मार्किट में मिल नहीं पा रही थी ।

सुरेंद्र – जनता के लिए कोई मैसेज? 
सुमन राणा जी -जनता को मेरा  एक मैसेज तो यह है कि किसी भी काम को कभी छोटा नहीं समझें। कोई काम छोटा नहीं होता, काम करने से ही आदमी बड़ा बनता है ।
मेरा दूसरा मैसेज यह है कि हमें कभी ये नहीं सोचना चाहिए कि मेरे पास धन नहीं है ।अच्छी ज़िन्दगी जीने के लिए ज्यादा धन की जरुरत नहीं होती। 
तीसरा मैसेज यह है कि कोई भी काम करने से पहले यह नहीं सोचना चाहिए कि लोग क्या कहेंगे । मुझे तो लगता है ये  सब बेकार की बातें है । ऐसे कोई लोग नहीं होते ।अगर हैं तो लोगों ने तो हर हाल कुछ ना कुछ कहना ही होता है ।मैंने खुद भी अपने जीवन में कोई काम करने के लिए कभी किसी की परवाह नहीं की और हमेशा आगे बढ़ती रही। आप अपना रास्ता खुद बनाइए और हौसले और मनोबल के साथ आगे बढ़ते रहिए ।
मेरा आखिरी मैसेज कि अपने जीवन का एक लक्ष्य बनाइए और बढ़ते चलिए । जैसे चींटी एक पंक्ति बनाकर चलती है, अपने पथ पर बढ़ती रहती है ,चाहे कितने संकट हों  और कैसी भी परिस्थितियाँ आएं हारकर कभी रुकना नहीं चाहिए। 
सुरेंद्र – आपसे बातें करके बहुत अच्छा लगा और हमारे पाठकों को आपसे बहुत कुछ जानने – सीखने को मिला। आपका बहुत बहुत धन्यवाद. 

प्रस्तुतकर्ता- सुरेंद्र सैनी बवानीवाल “उड़ता”