By- Suneet Bhatnagar, Kanpur

कोरोना ने हम सबको को कड़वी सच्चाई का ऐसा आइना दिखाया है की जिसके सामने खड़े हो कर हर इंसान अपने आप से सिर्फ और सिर्फ झूठ बोल रहा है इस बीमारी ने अपने ही बेहद नज़दीकी रिश्तों की ऐसी तीखी परीक्षा ली ही है जिसमे हर कोई तिलमिला कर रह गया है कोरोना से मौत होने पर माता पिता को अस्पतालों में ऐसे छोड़ा जा रहा है जैसे उनसे कभी कोई सम्बन्ध ही न रहा हो ,वो माता पिता जिन्होंने अपनी औलाद को बड़ी से बड़ी बीमारी में भी अपने सीने से लगाये रखा और सुरक्षित घर ले आए ऐसे माँ बाप अपनों के होने के बाद भी लावारिस हालत में घुट घुट कर जीने को मजबूर है बचपन में हम लोगों के जरा सा बुखार आने पर माता पिता बेचैन हो जाते थे और आज जैसे ही हमें मालूम हुआ की वो कोरोना पॉजिटिव है तो हम उन्हें अस्पताल में फेंक आये और उनके ठीक होने के बावज़ूद भी कितने ऐसे लोग है जो माँ बाप को घर ले आये है अगर हमारी पत्नी या हमारा बेटा या बेटी इस बीमारी से पीड़ित हो जाये तो फ़ौरन ही हमारे हाथ पावँ फूल जाएंगे और ठीक करने के लिए दिन रात एक कर देंगे फिर अपने जन्म देने वालों के लिए हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते इसीलिए की बूढे माँ बाप कभी किसी सरकारी नौकरी में नहीं रहे और उनकी हज़ारों रूपये की पेंशन घर नहीं आती आज ये सुविधा आ रही होती तो शायद हज़ारों लाखों की संख्या में बुजुर्ग पूरी तरह से स्वस्थ हो कर भी अपनों के आने की राह नहीं देख रहे होते आज कोरोना के इस भयावह समय ने इस बात को पुख्ता कर दिया है की सरकारी नौकरी या उससे सम्बंधित विभागों में नौकरी करने वाले ही पूरी तरह से सुरक्षित है बाकि प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले सिवाय कीड़ें मकोडों के सिवा कुछ भी नहीं आये दिन निजी कंपनी में काम करने वालो की नौकरी जा रही है ऐसे लोग हाथ फैला कर दूसरों से मदद मांग रहे रहे जिन लोगोँ ने कभी ज़िन्दगी में सर नहीं झुकाया उनको भी कोरोना ने अपने सामने भिखारी की तरह हाथ फ़ैलाने पर मज़बूर कर दिया ये ठीक है की यह समय बेहद कठिन है लेकिन क्या हम इंसानियत की हत्या कर दे और सिर्फ अपने ही बारे में सोचें ये समय भी हमेशा नहीं रहेगा और पहला वाला वक़्त फिर आएगा लेकिन ये तय है की तब तक बहुत से खून के रिश्ते दोस्ती यारी रिश्तेदारी अपनापन हमेशा के लिए ख़त्म हो जायेगा आज जद्दोजहद पैसा बचाने की नहीं सिर्फ ज़िंदा रहने की है जो लोग समर्थ है वे अपनी सामर्थ्य अनुसार अपने परिचितों की सहायता भी कर रहे है लेकिन ऐसे भले लोगों की संख्या न के बराबर है अनगिनत लोग अपनी इस अनचाही ज़िम्मेदारी से बचने के लिए बात करने से भी कतराते है मोबाइल स्विच ऑफ कर लेते है सामने आने से भी कतराते है की कहीं ऐसा न हो जाये की पैसे न देने पड़ जाये ये ठीक है की आपका पैसा आपकी मेहनत का है परंतु इस कोरोना काल में हम कुछ ऐसा कर जाये की की सवेरे जब आईने के सामने आये तो एक संतुष्टि का भाव हमारे चेहरे पर हो इस लोकडाउन ने माध्यम वर्गीय घरों में घमासान मचा दिया है बच्चों की फीस बिजली का बिल मोबाइल का रिचार्ज केबल वाले की फीस घर का राशन गैस सिलिंडर रोजाना की सब्जी इन सब पर भयानक खतरा मंडराया हुआ है लगभग हर घर में रोज़ाना लड़ाई झगड़ा फसाद हो रहे है छोटे बच्चे कुंठा का शिकार हो रहे है उन्होंने कभी अपने मम्मी पापा को आपस में इस तरह से लड़ते नहीं देखा है बच्चों की आन लाइन पढ़ाई भी उन घरों में ही हो रही है जिनके पास ज्यादा कीमत वाले एंड्राइड मोबाइल है बाकी के बच्चे क्या करे किसी दूसरे बच्चे के मोबाइल से अपना होमवर्क करे हर दूसरे दिन बच्चों के स्कूल से फीस के लिए फोन आ रहे है घर के मुखिया के पास पैसे नहीं है जो बचा कर रखा था वो भी ख़त्म हो गया यहाँ तक की अपने बच्चों की सेविंग के लिए बैंक और पोस्टऑफिस में बचाया गया पैसा भी निकाल कर इस्तेमाल किया जा रहा है सरकार ने नवंबर तक फ्री राशन देने का निर्णय लिया है लेकिन क्या सिर्फ गेहूं और चावल से गृहस्थी चल जायेगी सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता भी समाप्त कर दी गयी है गृहणी अपना दर्द केवल दूसरी गृहणी के साथ बांट रही है पत्नियों को बाजार में अपनी पसंद का सामान लाये चार महीने बीत चुके है टूटे हुए कप में चाय पी जा रही है और टूटी हुई चप्पल से जैसे तैसे काम चल रहा है हर गृहणी की आखों में बेबसी के आंसू है पति और पत्नी दोनों के पास नौकरी नहीं है पूरे देश में भयानक रूप ले चुकी इस आर्थिक मंदी ने मिडिल क्लास फैमिली को तोड़ कर रख दिया है रोज़ाना आत्महत्या जैसे कदम उठाये जा रहे है परिवार बिखर रहे है आगे क्या होगा पता नहीं ,सोनू सूद जैसे लोग आज आदर्श है जो किसी सरकारी सहायता कोष में अपना पैसा जमा नहीं करते बल्कि स्वयं व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ कर मदद करते है आखिर में सब से यही गुजारिश है की कोरोना काल में सब्र संयम और सावधानी से अपने और अपने परिवार की सुरक्षा करते हुए दूसरों की हर संभव सहायता करे और उन्हें टूटने से बचायें क्या मालूम आपका एक नेक काम आपको समृद्धि और खुशहाली की तरफ ले जाये।

Suneet Bhatnagar