आज हम आपकी मुलाक़ात कराने जा रहें हैं एक ऐसी शख्शियत से जिनका नाम सामाजिक कार्यों के लिए अदब से लिया जाता है. इनका नाम है श्री अशोक कम्बोज. ये पंजाब के जिला फाजिल्का के ज्वालाबाद शहर के पिंड – मोहकम अराहीन के रहने वाले हैं. AAJKYA.COM के CEO श्री हिमांशु बजाज जी ने अपने होनहार साथी व एक लेखक के रूप में ख्याति प्राप्त करने वाले श्री सुरेंद्र सैनी बवानीवाल जी से अपने मित्र अशोक काम्बोज जी का साक्षात्कार करने को कहा और इनकी ज़िन्दगी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की. जिनके कुछ अंश हम नीचे दे रहे हैं.

Ashok Kamboj and his Team

सबसे पहले हमने अशोक जी से उनकी शिक्षा और उनके परिवार के बारे मे पूछा तो उन्होंने बताया की उन्होंने बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई की है और इनका बड़ा परिवार है. इनके परिवार मे इनके पिता – श्री रामचंद्र कम्बोज जी, माता – श्रीमती कृष्णा कम्बोज , पत्नी – श्रीमती आशा कम्बोज, भाई – श्री वेदप्रकाश कम्बोज, भाभी – श्रीमती शांता रानी कम्बोज हैं. इनका मूल खेती का काम है और साथ – साथ ये अपना एक NGO – ANTI CORRUPTION SOCIETY भी चला रहे हैं और इसके आलावा ये हिमाचल प्रदेश मे स्थित मंदिर डेरे से भी जुड़े हुए हैं.इनके NGO का ऑफिस ज्वालाबाद में ही है और इनके पास हज़ारों की संख्या मे कार्यकर्ता हैं जो अलग-अलग जगह हैं जैसे ज्वालाबाद, लुधियाना, भटिंडा, अबोहर, राजस्थान, गंगानगर, इंदौर, मध्यप्रदेश आदि. अशोक कम्बोज जी ने बताया की इनका NGO काफ़ी सामाजिक काम करवाते हैं जैसे रक्तदान शिविर, पौधरोपण करवाना लेकिन हम एक कार्यकर्ता को पांच पौध ही देते हैं ताकि पेड़ की किसी बच्चे की तरह देखरेख हो सके. हम कोशिश करते हैं की हमारा लगाया हुआ कोई भी पेड़ -पौधा सूखे या मरे ना चाहे कैसा भी मौसम आए और विधवा और बेऔलाद औरतों को संरक्षण देना आर्थिक रूप से, गरीब परिवारों में अनाज बाँटना, eye check-up कैंप, हेल्थ चैक -अप कैंप, गरीब परिवार को घर बनाने मे मदद करना या जिनका कच्चा मकान है उनकी सहायता करना, नशाखोरी रोकने के लिए युवाओं को प्रेरित करना आदि.

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हमने अशोक जी से इनकी शुरुआत के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया की उन्हें लगता था कि हर आदमी को अपनी ज़िन्दगी का कोई मकसद बनाना चाहिए जैसे भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु इन्होने अपनी ज़िन्दगी का एक मकसद बनाया और आज इनका पूरी दुनियां में नाम है. हर कोई इनको जानता है और इनके जैसा बनना चाहता है.जबकि भगत सिंह आज भी दुनियां के लिए 23 साल के ही हैं. इसी तरह वो भी बचपन से देश और समाज के लिए कुछ करना चाहते थे. उन्हें लगता है की ये मानव जीवन सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए नहीं मिला है.बच्चे बुढ़ापे में वृद्ध-आश्रम में छोड़ देते हैं और उसके बाद में बच्चे हमारी तस्वीर पर फोटो लगा देते हैं और जब घर बदलता है तो हमारी तस्वीर भी पीछे ही छूट जाती है और हमें सभी लोग भूल जाते हैं. चलो हम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, उधम सिंह जैसे तो नहीं बन सकते लेकिन क्यों ना कोई छाप छोड़कर इस दुनियां से जाएं. हमें अपने घर के साथ साथ समाज के लिए भी कुछ जरूर करना चाहिए. अपने पड़ोसी की, गाँव-शहर के लोगों की मदद करनी चाहिए.यही हमारी तमन्ना थी और परमात्मा की कृपा से यह पूरी भी हो रही है.

शिक्षा के सवाल पर उन्होंने बताया की बारहवीं कक्षा के बाद उनका सिलेक्शन फौज मे हो गया था लेकिन उनके परिवारवालों ने उन्हें अनुमति नहीं दी. तो उन्होंने सोचा की देश और समाज की सेवा तो उनके लोगों की मदद करके भी की जा सकती है.फौज में बस एक परिवार के लिए करते मगर अब हजारों परिवारों के लिए कार्य करते हैं.इसलिए उनका रुझान इस तरफ बढ़ने लगा.

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हमारा अगला सवाल था की लॉकडाउन के दौरान उनके NGO ने क्या-क्या कार्य किए. तो जवाब में उन्होंने बताया की लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ज्वालाबाद (पंजाब )के क्षेत्रों में अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर दो से तीन गाड़ी राशन गरीब परिवारों में बांटा. इसके लिए उन्होंने बाकायदा सरकार से कोरोना वालंटियर्स की परमिशन ली थी और हमारे आइडेंटिटी कार्ड भी बने थे . हमारी टीम रात -दिन इन्हीं कामों में लगी रहती थी.जबकि हमें सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिलती है.हमारे NGO को सहयोगियों का डोनेशन भी मिल जाता है जिससे हमारा कोई भी कार्य कभी रुकता नहीं.

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हमने पूछा की उन्हें इस कार्य के लिए सरकार से कोई अवार्ड मिला तो उन्होंने बताया की लॉकडाउन के कार्य के लिए सरकार ने “कोरोना योद्धा “नाम से अवार्ड और सम्मान -पत्र प्रदान किया है.

डेरे में जाने के सवाल पर उन्होंने बताया की लॉकडाउन में सभी रास्ते बंद थे जिसके चलते पिछले तीन महीने से वो हिमाचल प्रदेश में मंदिर डेरे पर जा नहीं पा रहे हैं लेकिन वहाँ बाकी सेवादार हैं वो काम देख रहे हैं. सुबह -शाम पूजन और आरती होती है. वैसे आम जन का इन दिनों वहाँ जाना रुका हुआ है. वैसे किसी की भी कोई समस्या होती है तो वाह कार्यकर्त्ता के संपर्क से हम तक पहुँच जाता है.डेरे में लाखों की तादाद में लोग आते हैं. वहाँ हमारा ज्यादा काम प्रबंधन का होता है क्योंकि सेवादारों की और भगवान की इच्छा से सभी काम समय पर हो जाते हैं. हर वीरवार को लंगर लगाया जाता है और पूरे सेवाभाव से श्रद्धालु लंगर चखते हैं.आजतक किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आयी. मेरा मानना है की सच्चा मन हो और नियत साफ हो तो सरकार से भी ज्यादा पैसा हमें समाज सेवा के लिए मिल जाता है. भगवान सबपे मेर बरसाता है. आजतक ऐसा कभी नहीं हुआ की मुझे घर से पैसा लगाना पड़ा हो.

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हमने पूछा की क्या उन्होंने कोई वेबसाइट, या fb page बनाया हुआ है तो उन्होंने कहा की जी हाँ हमारी वेबसाइट है, FB पेज है और हम इंस्टाग्राम पर भी सक्रिय हैं. राजनेताओं से मिलने के सवाल पर उन्होंने बताया की सभी मंत्री या अन्य राजनीती से जुड़े लोग खुद ही हमारे पास आते रहते हैं. मुझे NGO बनाये 18 साल हो चुके हैं लेकिन आजतक हमने कभी किसी पार्टी विशेष के लिए वोट मांगने की अपील नहीं की. हमारे लिए सभी राजनितिक पार्टी एक जैसी ही है. मैं इलेक्शन के समय में हिमाचल प्रदेश चला जाता हूँ और फिर सिर्फ वोट डालने ही आता हूँ ताकि कोई किसी प्रकार से परेशान ना करें. किसी मंत्री से मिलने के लिए हमें कोई परेशानी नहीं आती. वैसे भी हम जो करते हैं जनता के लिए करते हैं तो उनको पता होता है की कोई सामाजिक काम के सिलसिले में ही मिलने आए होंगे.

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हमने पूछा की शिक्षा और बेरोजगारी के लिए वो क्या काम करते हैं तो उन्होंने बताया की अगर कोई गरीब बच्चा है जिसके घर में माँ -बाप के पास पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है जिसकी वजय से वो बच्चा शिक्षा से वंचित है तो हम क्षेत्रों के स्कूलों से संपर्क कर उसे सौंप देते हैं ताकि उसे भी शिक्षा का अधिकार मिल सके. सभी स्कूल इतने सालों में अपने सर्कल के ही हो गए हैं तो हमारे कहने से स्कूल के लोग अपने हिसाब से बच्चे की पढ़ाई शुरू करा देते हैं.वहाँ बच्चों को किताबें, कपडे और जरुरी चीजें मुहैया हो जाती है. रही बात रोज़गार देने की तो वो काम सरकार का है और सरकार ही करे. NGO तो सिर्फ सेवा कर सकता है और करता है. NGO का काम ऐसा नहीं होता की किसी को तनख्वाह पर काम पर रखा जाए. हम तो केवल सोशल मीडिया के प्लेटफार्म से सरकार को बोल सकते हैं. बाकी तो सरकार के पास प्लानिंग होनी चाहिए इस तरह की समस्याओ को निपटाने की.

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FAKE N.G.O के सवाल पर उन्होंने बताया की fake किसी भी काम की life लम्बी नहीं होती. ऐसे NGO तेजी से आते हैं और साल छह महीने में तेजी से ही बंद हो जाते हैं. हमें इस field में अठारह साल हो गए और हमारे पास हर दिन का हिसाब है.हमने बहुत ही छोटे से स्तर से शुरुआत की थी और परमात्मा की कृपा से आज पूरा छायादार पेड़ बन चुका है. हमारी नेक नियत और इरादा साफ है इसलिए हमें कभी किसी से डर नहीं लगा. मुझे तो काफ़ी बार अलग अलग लोगों से धमकियाँ भी मिल चुकी है और F.I.R तक भी लॉन्च हो जाती है लेकिन हमारा भगवान पर विश्वास है वह कभी हमारा बुरा नहीं होने देता. ज़िन्दगी देने वाला भी वही है और लेने वाला भी वही है.

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हमने पूछा की परिवार को समय दे पाते हो तो उन्होंने बताया की इसी दिक्कत का सामना बार -बार करना पड़ता है. जैसे कल भी एक फैमिली का कहीं प्रोग्राम है उसके लिए मैं नहीं जा पा रहा हूँ. बाकी सभी घरवाले जाएँगे. वैसे तो वाइफ और बाकी घरवाले भी समझते हैं की मेरी मज़बूरी होती है. उनको पता है मेरी जीवन-शैली ऐसी हो गई है.और वो एडजस्ट करते हैं. आज sunday है लॉकडाउन लगा है फिर भी शाम का किसी गरीब परिवार को घर बनाने के लिए सहायता देकर आना है.ऐसे में परिवार समझ लेता है लेकिन समय नहीं दे पाते.

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हमने पूछा की NGO के प्रोग्राम कौन DECIDE करता है.अशोक जी ने बताया की छोटे स्तर के कार्यक्रम तो कार्यकर्त्ता अपने आप संभाल लेते हैं जैसे लॉकडाउन में राशन बाँटने के लिए जगह और गाँव उन्होंने खुद चून लिए थे. रही बात बड़े प्रोग्राम की तो उसके लिए हमारे NGO के 30 बॉडी मेंबर है जिनमे सारी बातें डिसकस होकर फाइनल होती है.रुपरेखा तैयार करने में सभी की सलाह ली जाती है. कभी कभी ऐसा होता है की कुछ डिसिशन मुझे खुद भी लेने पड़ जाते हैं लेकिन ज्यादातर सभी की सलाह से होते हैं.

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हमने पूछा की पौधरोपण के कार्यक्रम के लिए पौधे कहाँ से लेते हैं तो उन्होंने बताया की हमें गाड़ी भेजनी पडती है और हमें पंजाब गवर्नमेंट से हर साल पौध मिल जाती है. हमें एक बार पौधे लगाने होते हैं और हर आठ से दस दिन में जाकर चेक करने होते हैं. पेड़ या पौधे लगाने की लोकेशन हम खुद चयन करते हैं. कोई ऐसी जगह जहाँ पेड़ कम हो और खाली जगह भी हो या वहाँ कभी पेड़ों की कटाई हुई हो. हमारे यहाँ पेड़ों की कटाई पर कोई क़ानून नहीं है इसलिए अंधाधुंध कटाई होती है. जितनी कटाई होती है उतने पेड़ नहीं लगाए जाते इसलिए खाली जगह आसानी से मिल जाती है.जैसे इंसानों की कटाई है वैसी ही पेड़ों की क्योंकि जान तो दोनों में ही है. वैसे इन दिनों बरसात का मौसम है तो पौधे जल्दी निकल आते हैं. खाद्य पानी मिट्टी तो उन्हें मौसम से ही मिल जाता है.

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हमारा सवाल था की क्या उन्हें डर लगता है तो उन्होंने कहा की अगर आप आवाज़ उठाओगे कालाबाज़ारी के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, किसी सरकारी अफ़सर के खिलाफ, नक्सली के खिलाफ, फिरौती लेने वाले के खिलाफ तो धमकियाँ तो मिलेगी ही. मानो किसी नाग को छेड़ोगे तो फूँकार तो आएगी ही लेकिन मुझे पहले -पहले थोड़ा महसूस होता था मगर अब कुछ डर नहीं लगता. इतने सालों से हर बात की आदत हो गई है. ऊपर भगवान बैठा है सब अच्छा होता है.ज़िन्दगी देने वाला भी परमात्मा है और लेने वाला भी.

हमने पूछा की क्या उन्हें कभी कोर्ट कचहरी जाना पड़ा या कार्यकर्त्ता भड़क उठे हों तो उनका जवाब था की F.I.R जब होती है तो कोर्ट कचहरी तो जाना पड़ जाता है लेकिन कभी जेल में नहीं जाना पड़ा. सब भगवान की मेहर है. ऐसी परिस्थिति में हमारे साथियों कार्यकर्त्ताओं ने ज्वालाबाद रोड जाम किया है,महिला कार्यकर्ताओं ने धरना किया है. थाना घेरा है, मीडिया को बुलाया है. हमारे पास सच्चाई थी तो प्रशासन को भी झुकना पड़ा था. खुद आला अधिकारी ने आकर माफ़ी मांगी की आपको गलती से ले जाया गया था. हमने तो कई बदमाशों को पकड़वाया भी है. कुछ विजिलेंस के अफ़सर हमारे टच में हैं जिनकी मदद से ऐसा संभव हो पाया था. लेकिन मैंने अपने रुतबे से कभी कोई पर्सनल फायदा लेने की नहीं सोची क्योंकि परमात्मा की दया से कभी जरुरत ही नहीं पड़ी. वैसे भी खेती के काम में किसी अफसरशाही की जरुरत ही नहीं होती.आवशयकताएँ सीमित हैं तो कुछ दिक्कत नहीं आती. फिर भी किसी सरकारी दफ़्तर में जाना पड़ता भी है तो पूरी रेस्पेक्ट मिलती है. कुर्सी पर बैठा बंदा चाय के लिए पूछता है और खुद ही काम को जल्दी से कर देता है.

हमारा सवाल था की नशाखोरी रोकने के बारे में क्या कर रहे हो तो उन्होंने बताया की हमने खुद से एक दो ड्रग सप्लायर को पकड़ा भी है और पोलिस को सौंपा है. नशा करने वाले लड़कों की हम कॉउंसलिंग करते हैं और उन्हें मानसिक डॉक्टर (psychiatrist ) से मिलवाते है. कुछ लड़के सुधर कर हमारे साथ हो गए और कुछ बदलना ही नहीं चाहते. वैसे अब नयी सरकार के आने से हालात सुधरे भी हैं.

अशोक जी से हमारा आखिरी सवाल था की जब वो हिमाचल चले जाते हैं तो उनका काम कौन देखता है तो उन्होंने बताया की उनके पीछे उनके कार्यकर्त्ता काम देखते हैं.जैसे मनदीप सिंह जी, राज जी आदि. अब तो तीन महीने से मैं वहाँ नहीं जा पाया हूँ लेकिन संपर्क में हूँ. जब वहाँ होता हूँ तो वही कमरे में रुकते हैं मैं और मेरे कुछ सेवादार साथी.सेवा के आलावा हम कहीं घूमने भी नहीं जाते.

यदि आपको भी अपना साक्षात्कार व अन्य कोई भी जानकारी हमारे वेबपेज AAJKYA.COM पर देनी है तो आप 9058417006 पर सम्पर्क कर सकते हैं।