BY- Surendar Saini 11 August 2020 (Himanshu)

हम सब हिन्दू हैं और सनातन धर्म से सम्बन्ध रखते हैं और सनातन धर्म से सम्बन्ध रखने के कारण हम सभी भक्तजन श्री कृष्ण का वंदन – पूजन करते हैं. हम सभी जानते हैं कि श्री कृष्ण को प्रेम का स्वरुप भी माना जाता है. ग्रंथों में भी कहा गया है की भगवान श्री कृष्ण का छवि -रूप व व्यक्तित्व बहुत सम्मोहक है और मन को मोह लेता है. श्री कृष्ण पीला पीतांबर धारण करते हैं और उनके मुकुट पर मोरपंख विराजमान है. 

हमारे सनातन वेद-पुराणों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण को छह चीजों से बहुत लगाव है. जिनका जिक्र नीचे किया जा रहा है

1 बांसुरी या मुरली – श्री कृष्ण के हाथ में हमेशा बांसुरी रहती है जो की उन्हें बहुत प्रिय है और बांसुरी (मुरली ) को वो हमेशा अपने होठों से लगाए रहते हैं. बांसुरी के प्रिय होने के तीन कारण हैं-

  1. बांसुरी सीधी होती है उसमें किसी भी प्रकार  की गांठ नहीं होती है जो की कहती है कि  अपने मन के अंदर किसी भी प्रकार की गांठ (मतभेद ) कभी मत रखो. मन में बदले की भावना कभी मत रखो.
  2. बांसुरी बिना बजाये बजती नहीं है अथार्त जब तक कहा ना जाए अपने मुख से कुछ मत बोलो सामने वाले को मौका दो. 
  3. बांसुरी जब तक भी बजती है सुर में ही बजती है अथार्त जब भी बोलो मीठा ही बोलो. 

भगवान जिसमें भी ये तीन गुण देखते हैं उसे उठाकर अपने होठों तक लगा लेते हैं. इसका अर्थ है इन तीन गुण वाले भक्त को भगवान अपने सान्निध्य में ले लेते हैं.इसलिए अपने घर के मंदिर में श्री कृष्ण को मुरली (बांसुरी)जरूर अर्पित करें. 

2 गाय – श्री कृष्ण की दूसरी पसंद उनकी गाय है  जो की अकसर हर चित्र में उनके साथ  देती है. गाय के शरीर में तेंतीस करोड़  देवी -देवताओं का निवास होता है. गाय सभी गुणों की खान होती है.गाय से प्राप्त दूध, घी-     माखन, दही, गोमूत्र, गोबर आदि पंचगद्य कहलाते हैं.माना जाता है की इनका पान कर  लेने से कभी भी शरीर में पाप नहीं ठहरता.  संभव हो तो घर के मंदिर में श्री कृष्ण के साथ  उनकी गाय और बछड़ा भी रखना चाहिए.

3.  माखन (मिश्री) श्री कृष्ण को अपने बाल्यकाल से ही माखन-मिश्री खाना बहुत पसंद है. माखन चोरी करके खाने के  लिए तो  उन्होंने कई बार अपनी माता से डांट सुनी है.  यह उनकी तीसरी प्रिय वस्तु है. जिसका जिक्र  हमारे वेदों में भी किया गया है. मिश्री की एक खास बात यह होती है की जब इसे माखन में  मिलाया जाता है तो यह माखन के कण कण  में घुलकर उसे मीठा बना देती है. मिश्री और  माखन जीवन व्यवहार में प्रेम को अपनाने का   सन्देश देता है की प्रेम में किस प्रकार से  घुलमिल जाना चाहिए. श्री कृष्ण को माखन      और मिश्री भी अर्पित करना चाहिए. 

4.   मोरपंख – श्री कृष्ण की चौथी प्रिय चीज़ है मोरपंख जिसे वो हमेशा अपने मुकुट पर  सुशोभित रखते हैं. मोरपंख से उनकी छवि  और भी मनमोहक हो उठती है. मोरपंख देखने  में बहुत सुन्दर होता है इसलिए इसे सम्मोहन   का प्रतीक माना जाता है. मोर को चिर ब्रह्मचर्य  युक्त प्राणी माना जाता है इसलिए श्री कृष्ण अपने मुकुट पर  मोरपंख धारण करते हैं.  मोर मुकुट पंख का गहरा रंग दुख और   कठिनाइयाँ दर्शाता है और हल्का सुख,  समृद्धि, शांति का प्रतीक माना जाता है.  मोरपंख भी भगवान श्री कृष्ण को जरूर  अर्पित करें.

5.   कमल – श्री कृष्ण की पाँचवी प्रिय चीज़ है   कमल का फूल. कमल का फूल भी श्री कृष्ण  के चित्र या तस्वीर में देखा जा सकता है. सभी  जानते हैं की कमल कीचड़ में खिलता है और  उसी से पोषण लेता है लेकिन कमल कीचड़ से  अलग ही रहता है इसलिए कमल पवित्रता का    प्रतीक है. इसकी सुगंध और सुंदरता मन को मोहने वाली होती है. कमल हमें यह सन्देश   देता है की हमें जीवन कैसे जीना चाहिए.  आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन किस  तरह का हो ये हमें कमल का फूल बताता है  इसलिए ये श्री कृष्ण को बहुत प्रिय है.    

6.    वैजयंती माला – श्री कृष्ण की छठी प्रिय वस्तु   है वैजयंती माला जिसे वो सदा अपने गले में  विराजे रखते हैं. वैजयंती माला कमल के बीजों  से बनी होती है क्योंकि कमल के बीज बहुत  सख़्त होते हैं और जल्दी से टूटते नहीं हैं.  कमल के बीज हमेशा चमकदार बने रहते हैं.   इसका तात्पर्य है की जब तक जीवन है तब       तक प्रसन्न रहिये दूसरा यह माला एक बीज होती है जिसकी मंज़िल होती है धरा (भूमि ). जिसका अर्थ है चाहे आप कितने भी बड़े बन  जाओ लेकिन अपनी जड़ें मत भूलो और   जमीन से जुड़े रहो. अपने अस्तित्व की  असलियत के नज़दीक रहो.

जो भी श्री कृष्ण-भक्त उपरोक्त छह चीजें श्री कृष्ण को अर्पित करता है उसके घर में प्रेम, सुख, समृद्धि  और ऐश्वर्य बना रहता है.अगर आप श्री कृष्ण के मंदिर जा रहे हैं तो आप इनमे से कोई भी चीज़ अपने कृष्ण को अर्पित कर सकते हैं. 

Surender Saini UDTA