BY: सुरेंद्र सैनी बवानीवाल “उड़ता”
झज्जर – 124103 (हरियाणा )

हम सनातनी भक्त श्री कृष्णा-राधा जी  के बहुत बड़े उपासक हैं. हम जानना चाहेंगे की श्री कृष्ण और राधा का विवाह क्यों ना हो सका. दरअसल इस मुद्दे को लेकर बहुत सी कहानियाँ प्रचलित है.

हम यहाँ एक -एक  करके सभी कहानियाँ बता रहे हैं जिनसे इस प्रश्न की पुष्टि हो जाएगी

1. पहली कहानी ये बताई जाती है कि रुक्मणि ही राधा थी. और इसकी तीन वजह बताई जाती है

(i) पहली वजह यह की जहाँ रुक्मिणी होती थी वहाँ राधा नहीं होती थी. और जहाँ राधा होती थी वहाँ रुख्मणि नहीं होती थी. कभी भी राधा और रुक्मिणी एकसाथ एक जगह पर इकट्ठी नहीं हुई.

(ii) दूसरी वजह यह की रुक्मिणी और राधा दोनों ही श्री कृष्णा से उम्र में बड़ी थी.

(iii) तीसरी वजह यह की राधा को लक्ष्मी जी का रूप कहा जाता है और हमारे सनातनी ग्रंथों में  रुक्मिणी को भी लक्ष्मी का ही रूप माना गया है.

और इस पहली कहानी के अनुसार श्री कृष्ण ने रुक्मिणी से विवाह करके भी राधा से विवाह किया था.

2. दूसरी कहानी जो कि श्री गर्ग-संहिता में लिखी गयी है.श्री गर्ग ऋषि यदुवंशीयों के कुल  गुरु थे.  इस कहानी में बताया गया है कि श्री कृष्ण और राधा का विवाह बचपन में ही हो गया था इसलिए श्री कृष्णा ने राधा से दोबारा शादी नहीं की. श्री गर्ग ऋषि ने श्री गर्ग – संहिता में लिखा है की एक बार श्री कृष्ण नन्द बाबा के कन्धो पर बैठकर बाजार में घूम रहे थे तभी उन्हें किसी अलौकिक प्रकाश की अनुभूति लगी और एक सुखद एहसास  हुआ . वह अद्भुत शक्ति के प्रकाश का एहसास कोई और नहीं स्वयं राधा थी. उस समय सबकुछ जैसे रुक सा गया था. सभी लोग अपनी जगह पर जड़ हो गए थे. उसी समय श्री कृष्ण और राधा अपना बचपन छोड़कर अपने यौवन काल में आ गए और दोनों ने जंगल में जाकर शादी करली. उनकी शादी के गवाह बने स्वयं भगवान ब्रह्मा. क्योंकि भगवान ब्रह्मा ने ही इन दोनों की शादी करवायी थी. इसके बाद श्री कृष्ण और राधा वापिस अपने बचपन में आ गए और सभी कुछ पहले जैसा हो गया मानो कुछ हुआ ही ना हो. और श्री कृष्ण ने राधा से दोबारा शादी नहीं की क्योंकि बाल्यकाल में पहले ही हो चुकी थी.

3. तीसरी कहानी ये कहती है की जब राधा के परिवार वालों को उनके श्री कृष्ण के साथ प्रेम-प्रसंग का पता चला तो उन्हें उनके घर में ही एक कोठरी में कैद कर दिया गया था. जिससे राधा को अपने ही घर में बंदी की तरह रहना पड़ा क्योंकि उनकी सगाई हो चुकी थी. श्री कृष्ण ने आकर राधा को आज़ाद कराया फिर वो यशोदा मैया के पास गए और राधा से विवाह करने की हठ करने लगे लेकिन यशोदा मैया ने सरासर मना कर दिया. नन्द बाबा श्री कृष्ण को ऋषि गर्ग के पास लेकर गए जहाँ श्री गर्ग ऋषि द्वारा उनके मस्तिष्क की  सोच का रूपांतरण कर दिया गया. गर्ग ऋषि ने कान्हा को समझाया की उनका जन्म एक उद्देश्य के लिए हुआ है और उन्हें किसी भी प्रकार के मोह में नहीं पड़कर नहीं बंधना चाहिए. इस धरती पर वो धर्म की स्थापना के लिए अवतरित हुए हैं. गर्ग ऋषि के समझाने के बाद श्री कृष्ण ने अपने जीवन को अपने कर्मों  के लिए समर्पित कर दिया और अपने गाँव गोकुल, गाय और राधा को छोड़कर चले गए. इसलिए कान्हा ने राधा से शादी नहीं की.

अब सवाल ये उठता है की उपरोक्त दी गयी कहानियों में कौन सी सत्य है तो बात यह है की श्री गर्ग – संहिता में यह सब लिखा हुआ है जो कि खुद ऋषि गर्ग ने अपने हाथों से लिखा है. गर्ग ऋषि की लिखी किसी भी बात पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. गर्ग ऋषि यदुवंशियों के कुल गुरु थे. गर्ग ऋषि ने ही श्री कृष्ण और बलराम का नामकरण किया था.उन्होंने अपनी लिखी श्री गर्ग-संहिता राधा-कृष्ण की सभी लीलाओं का वर्णन किया है. और किसी भी बात को असत्य नहीं माना जा सकता.

दूसरा सवाल यह है की श्री कृष्णा ने राधा को अपनाया क्यों नहीं. जबकि इनका प्यार एक -दूसरे के लिए असीम था. इनके प्यार की ना तो शुरुआत का पता है और ना ही अंत का पता.इनका प्रेम किसी वचन या किसी बंधन का मोहताज नहीं था जिसे कभी भुलाया या मिटाया नहीं जा सकता. श्री कृष्ण और राधा सभी प्रेमि जोड़ीयों को यही बात बताना चाहते थे की अगर दिल में प्रेम हो तो दूरी मायने नहीं रखती. प्रेम तो एक भावना है जिसे कभी रोका नहीं जा सकता. ऐसा ही था राधा और कृष्णा का प्रेम.

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