By: Renu Goswami, Bhopal (Himanshu)

जन्माष्टमी का त्योहार हम हिंदुओं का एक उत्साह, उमंग का पर्व हैl जो भारत में सभी जगह बड़े उल्लास धूमधाम से मनाया जाता है और विदेशों में रहने वाले भारतीय भी जन्म अष्टमी को उल्लास के साथ मनाते हैंl
हिंदू धर्म के अनुसार जन्माष्टमी भादो के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता हैl भादो (अगस्त)में जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में हर साल सावन के बाद भादो (अगस्त) में मनाया जाता हैl श्री कृष्ण जी के बहुत सारे नाम हैl कान्हा, मुरलीधर मुरारी, कृष्णा, गोपाल, गोविंद, नंदलाल आदि नामों से भगवान श्री कृष्ण जी को पुकारा जाता हैl

यह देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र थेl मथुरा के राजा कंस को एक आकाशवाणी हुई थी,कि उसकी बहन देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा कंस एक अत्यंत दुष्ट अत्याचारी थाl और उसका अत्याचार बढ़ता ही जा रहा था जब कंस ने आकाशवाणी सुनी तो अपने बहन बहनोई देवकी ,वासुदेव को काल कोठरी में डाल दिया और उनसे जन्मी 7 संतानों को मारता रहा अंत में आठवीं संतान ने श्री कृष्ण अवतार के रूप में जन्म लियाl भगवान विष्णु जी की माया के कारण जेल के ताले खुल गए और सारे पहरेदार मूर्छित हो गएl भगवान श्री विष्णु जी के आदेश पर वासुदेव श्री कृष्ण जी को गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मां के पास उनको सुरक्षित छोड़ आएl उस दिन काली अंधियारी छाई हुई थी बहुत बारिश हो रही थीl यमुना नदी उफान पर थीl वासुदेव ने श्रीकृष्ण को टोकरी में बैठा कर टोकरी सर पर रख कर श्री कृष्ण को गोकुल नंद बाबा यशोदा माता रानी तक पहुंचाया थाl

वहां उनका लालन-पालन यशोदा मां और नंद बाबा की देख भाल में होने लगा वह वहां सुरक्षित हो गए हिंदू धर्म के अनुसार पूरे जोश उल्लास से श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाने लगाl जन्माष्टमी के दिन पूरे दिन उपवास रखते हैं l और श्री कृष्ण के मंदिर को विशेष प्रकार से सजाया जाता है रात 12:00 बजे तक उपवास रखा जाता है बहुत प्यारी -प्यारी झांकियां लगाई जाती हैl श्री कृष्ण का झूला सजाया जाता हैl और झूले में उनको झुलाया जाता हैl कई जगहों पर रामलीला का आयोजन भी किया जाता है l कई जगहों पर गुलाल और फूलों की होली खेली जाती है lऔर दहीहंडी (मटकी) की प्रतियोगिता का भी आयोजित किया जाता हैl उपवास दूध दही फलों का सेवन कर कर रात्रि 12:00 बजे के बाद भोजन ग्रहण किया जाता हैl

दही हांडी फोड़ने की परंपरा

शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण को दही और मक्खन अति प्रिय थाl मक्खन इतना अधिक प्रिय थाl कि वह मक्खन चुरा- चुरा कर खाते और गोपियों की मटकी फोड़ उनसे भी मक्खन छीन लिया करते थेlआए दिन उनकी बाल लीलाओं की शिकायतें माता यशोदा के पास आती रहती थी माखन चुराकर खाने के उपरांत ही भगवान श्री कृष्ण को माखन चोर कहकर भी पुकारा जाता हैl श्री कृष्ण जी बहुत नटखट थेl वह माता यशोदा की भी बात नहीं सुनते थे l

कई बार माता यशोदा परेशान होकर श्री कृष्ण को रस्सी से बांध दिया करती थी l पर श्रीकृष्ण अपनी बाल लीलाओं से सबका मन मोह लेते थेlगोपियां जब अधिक परेशान हो गई तो वह अपनी दही की हांडी ऊंचाई पर टांगने लगी पर श्री कृष्ण तो श्री कृष्ण भगवान ठहरे वहां कहां मानने वाले थेlवह वहां भी अपनी चतुराई से मटकी पर पहुंच जाते l और दही मक्खन चुरा लेते थे lश्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की याद में मटकी उत्सव मनाया जाता है l जन्माष्टमी के दिन सभी श्री कृष्ण मंदिरों में रोशनी जगमगाती हैl और गली, मोहल्ले,च ौराहों पर मटकी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है l जन्माष्टमी के दिन मटकी में दही, मक्खन भरकर बहुत ऊंचाई पर बांध दिया जाता हैl विशेष प्रकार के पुरस्कार का आयोजन किया जाता है lजो सबसे पहले मटकी तक पुष्कर उसको फोड़ता हैl वही इस प्रतियोगिता का विजेता कहलाता हैl मटकी फोड़ने के लिए अलग-अलग स्थानों से युवकों की अपनी अपनी टोली आती हैl लोग उन पर पानी की बौछारें करते हैंl वह एक के ऊपर एक झुंड बनाकर चढ़ने की कोशिश करते हैंl और इस तरह दही हांडी को फोड़ कर दही हांडी प्रतियोगिता का समापन होता हैl घरों में श्रीकृष्ण भगवान को प्रसादी चढ़ा कर पकवानों का भोग लगाकर हार फूल दीपक लगाकर भगवान श्री कृष्ण का स्वागत किया जाता हैl और सुख,समृद्धि के लिए भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना करते हैंl

इस प्रकार से कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती हैl भगवान श्री कृष्ण भगवान जी जैसे आप ने कंस मामा का वध कर मथुरा को इस अत्याचारी दुष्ट से मुक्त कराया थाl उसी प्रकार आप कलयुग में फिर से अवतार कर पापियों के पापों का नाश कर धारा का उद्धार करो l

हे कृष्ण मुरारी,
हे प्रभु अवतारी,
कलयुग में फिर से अवतार करो,
जनमानस की पीड़ा का नाश करो,
हे प्रभु पापियों का संघार कर ,
इस धरा का फिर से उद्धार करो