आज युगपुरूष अटल बिहारी वाजपेयी जी की दूसरी पुण्यतिथि है। श्री वाजपेयी इकलौते ऐसा नेता रहे है जो नई दिल्ली, मध्यप्रदेश की विदिशा व ग्वालियर, उत्तर प्रदेश की बलरामपुर व लखनऊ व गुजरात के गांधीनगर से संसदीय सीट से चुनाव जीत चुके थे। यहां तक कि उन्हे भारतरत्न से सम्मानित भी किया गया था। हमारे टीम के सम्मानित सदस्य श्री सुरेन्द्र सैनी बवानवाली (उड़ता) द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी जी के बारे में अन्य जानकारियां एकत्र की गयी है, जो आपके समक्ष प्रस्तुत की जा रही है।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह जी द्वारा भारतीय राजनीति के भीष्म-पितामह की संज्ञा दी गयी थी। यहां तक की अटल जी को जवाहरलाल नेहरू जी के बाद भारत का दूसरा स्टेट्समैन भी कहा जाता है।

श्री अटल जी दूसरे प्रधानमंत्री हैं जिन्होने गैर-कांग्रेसी होते हुए अपने कार्यकाल के पांच साल पूरे किए थे. श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी को पहले ऐसे व्यक्ति होने का गौरव प्राप्त है जिन्होंने गैर-कांग्रेसी होते हुए प्रधानमंत्री पद पर अपने पांच साल से ज्यादा वर्ष पूरे किए. जबकि पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई थे लेकिन उनका कार्यकाल पूरा नहीं हो सका था.

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श्री अटल जी के पिता का नाम पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी था व इनकी माता श्रीमती कृष्णा देवी था। इनका जन्म 25 दिसम्बर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ था।

इनके जन्मदिन को 2014 से सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है. इनके पूर्वजों का सम्बन्ध आगरा के बटेश्वर गाँव से था। इनके दादाजी पंडित श्याम लाल वाजपेयी जी आगरा से मध्यप्रदेश में जाकर बस गए थे।
श्री अटल जी की मृत्यु स्वतंत्रता दिवस के अगले दिन 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स में 93 वर्ष की आयु में हुयी थी उनके निधन पर सात दिनों का राष्ट्रीय शौक घोषित किया गया था। उन दिनों राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका हुआ था. इनका अंतिम संस्कार स्मृति-स्थल पर किया गया था. अटल जी का स्मारक बनवाने के लिए डेढ़ एकड़ जमीन आवंटित की गयी थी।

श्री अटल बिहारी जी अविवाहित थे लेकिन इन्होंने दो लड़कियाँ (बेटियों के रूप में) गोद ली थी जिनके नाम हैं नमिता और नंदिता।
‘विजय पताका’ पुस्तक को पढ़कर अटल जी की जीवन-दिशा बदल गयी थी. यह पुस्तक महात्मा रामचंद्र वीर द्वारा लिखी गयी थी।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार 1957 में सांसद चुने गए थे. जनसंघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ाया. ये सीटें थी लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर. लखनऊ से वे चुनाव हार गए लेकिन वे बलरामपुर से चुनाव जीत गए थे और दूसरी लोकसभा में पहुँचे। बलरामपुर उत्तरप्रदेश में ही पड़ता है. बलरामपुर में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी हैदर हुसैन को हराया था। उस समय जनसंघ का चुनाव-चिन्ह दीपक (दिया) होता था।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी 15 वर्ष की आयु में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वंसेवक संघ) में शामिल हो गए थे।
अटल जी श्री दिनदयाल उपाध्याय जी की मौत के बाद जनसंघ के अध्यक्ष 1968 में बनाये गए थे।
अटल जी पहली बार विदेशमंत्री सन 1977 में बनाये गए थे. उस समय देश में जनता पार्टी की सरकार थी और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे।

वर्ष 1977 में ही अटल जी यू.एन.ओ. (संयुक्त राष्ट्र संघ ) में हिंदी भाषा में भाषण देने वाले पहले भारतीय विदेशमंत्री बने थे। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना अटल जी ने लालकृष्ण अडवाणी और भैरों सिंह शेखावत के साथ मिलकर 06 अप्रैल 1980 में की थी. भारतीय जनता पार्टी के पहले अध्यक्ष भी श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी थे। ‘कमल-सन्देश’ भारतीय जनता पार्टी का मुख-पत्र है और प्रभात झा इसके संपादक हैं.
अटल जी लोकसभा में पहली बार 1993 में विपक्ष के नेता बने, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने मुंबई में हुई बैठक में श्री अटल जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार 1995 में घोषित किया था। अटल जी पहली बार भारत के प्रधानमंत्री 16 मई 1996 को बने। उनका ये कार्यकाल सिर्फ 13 दिनों का था. इसके साथ ही अब तक का सबसे कम समय तक प्रधानमंत्री रहने का कीर्तिमान भी अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम है. और सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहने का कीर्तिमान जवाहरलाल नेहरू के नाम है। 1998 में पोखरण परिक्षण के दौरान भी अटल जी ही प्रधानमंत्री थे. इस ऑपरेशन को ‘शक्ति-परीक्षण’ नाम दिया गया था।

19 फरवरी 1999 को दिल्ली से लाहौर बस सेवा शुरू की गयी थी जिसे सदा-ए-सरहद का नाम दिया गया था. इसमें अटल जी ने प्रथम यात्री के रूप में यात्रा की थी और नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भी अटल जी भारत के प्रधानमंत्री थे। ‘सर्व शिक्षा अभियान’ की शुरुआत श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा की गयी थी. भारतीय संविधान के 86वां संशोधन द्वारा 06 से 24 साल के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान को मौलिक अधिकार बनाया गया है।
2001 में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का शुभारम्भ श्री अटल जी द्वारा किया गया था. यह परियोजना भारत के चार महानगरों (दिल्ली-कोलकत्ता-चेन्नई-मुंबई) को आपस में जोड़ती है. इसकी कुल लम्बाई 5846 किलोमीटर है।

अटल जी ने राजनीती से सन्यास 2005 में लिया था. मुंबई के शिवाजी-पार्क में 2005 में हुई सभा में उन्होंने ऐलान किया की वे सक्रिय राजनीती से दूर रहेंगे. 2009 के चुनाव में उन्होंने भाग नहीं लिया था.
अटल जी ने अपना अंतिम चुनावी भाषण 2007 में अमृतसर (पंजाब) में दिया था. उस समय अटल जी उपचुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू के लिए चुनाव-प्रचार कर रहे थे. ये उपचुनाव विधानसभा चुनाव के साथ हुआ था.

1992 में अटल जी को पदमविभूषण दिया गया था. यह भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. पहला सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत-रत्न है। 1994 में अटल जी को बेस्ट सांसद का पुरस्कार दिया गया। 2014 में अटल जी को भारत-रत्न का पुरस्कार दिया गया था. जबकि इसकी घोषणा 24 दिसंबर 2014 को की गयी थी. उन दिनों अटल जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं था तो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें यह पुरस्कार उनके घर जाकर 27 मार्च 2015 को दिया था. यह पहली बार हुआ था की किसी राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल को तोड़कर यह पुरस्कार किसी के घर जाकर दिया हो. परंपरा के आनुसार यह पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में दिया जाता है।
अटल जी उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और दिल्ली से लोकसभा चुनाव जीत चुके थे. जबकि गुजरात से वो राज्यसभा के लिए चुन लिए गए थे। अटल जी जवाहरलाल नेहरू के बाद तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले राजनेता थे। ‘युगपुरुष भारत-रत्न अटल जी’ पुस्तक डॉक्टर रमेश पोखरियाल (मुख्यमंत्री उत्तराखंड) द्वारा लिखी गयी है जिसका विमोचन वैंकेया नायडू द्वारा किया गया था।

अटल जी दो बार (1962) व (1986) में राज्यसभा के सदस्य बने थे. अटल जी दस बार भारतीय संसद के सांसद बने. दूसरी और चैथी लोकसभा में उन्होंने बलरामपुर का प्रतिनिधित्व किया.पाँचवी लोकसभा में उन्होंने ग्वालियर का प्रतिनिधित्व किया. छठी और सांतवी लोकसभा में दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया.जबकि 1991 से 2009 तक 10वीं, 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा में उन्होंने लखनऊ का प्रतिनिधित्व किया. भारत द्वारा बनाये गए हल्के लड़ाकू विमान को तेजस नाम भी श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 04 मई 2003 को दिया गया था. इस विमान ने पुराने पड़े मिग-21 का स्थान लिया था. 09 मई 2015 को श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अटल पेंशन योजना का शुभारम्भ किया गया था. इस योजना से जुड़ने के लिए अभ्यर्थी की आयु सीमा 18 से 40 वर्ष है।

स्वदेश, वीर-अर्जुन, पांचजन्य व राष्ट्रधर्म का संपादन श्री अटल जी द्वारा किया गया था.
अटल जी की कविताओं के संग्रह को ‘मेरी इक्यावन कविताये’ का नाम दिया गया है. इसका विमोचन 13 अक्टूबर 1995 को पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव द्वारा दिल्ली में किया गया था. इस पुस्तक की कविताओं का सम्पादन डॉक्टर चन्द्रिका प्रसाद शर्मा द्वारा किया गया था।
श्री अटल जी द्वारा रचित कुछ महत्वपूर्ण रचनाएँ हैं-
अमर-बलिदान – (लोकसभा में अटल जी द्वारा दिए वक्तव्यों का संग्रह)
संसद में तीन दशक
राजनीती की रपटीली राहें
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी अटल जी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे. इनके आलावा भूटान नरेश जिगमें खेसर, नेपाल के विदेशमंत्री प्रदीप ग्वायल व अन्य देशों के मंत्रीगण भी शामिल थे.
16 अगस्त 2018 को इस महान विभूति ने हमसे विदा ले ली थी.

संकलनकर्ता- सुरेन्द्र सैनी बवानीवाल (उड़ता)