By: Surender Saini (Himanshu)

भारतीय संस्कृति सबसे पुरानी संस्कृतियों में से एक है और भारतीय संस्कृति में ही नारियों को सर्वथा सम्मान के साथ देखा गया है और उन्हें अत्याधिक महत्व भी दिया गया है।

हमारे यहां नारी को शक्ति एक अद्भुत और अलौकिक शक्ति का दर्ज दिया गया है, वहीं नारी सृष्टि की सबसे शानदार रचना भी हैं, जो न कि सिर्फ एक कुल को आगे बढ़ाती हैं बल्कि अन्याय का भी विनाश करती है, वही इसके विपरीत नारी के बिना संसार की समस्त क्रियाएं अधूरी मानी जाती है।

हमारे यहां नारी ममता, त्याग, प्रेम की देवी मानी गयी है, ऐसे में जब-जब भी नारी का अपमान हुआ है, तब-तब धर्म की हानि हुई है और युद्ध हुआ है। जिसका प्रमाण रामायण और महाभारत भी हैं, क्योंकि रामायण में सीता के हरण करने पर ही विद्वान ब्राह्मण रावण का विनाश हुआ है और द्रोपदी के अपमान का पर महाभारत का युद्ध हुआ था। परंतु फिर भी आज भारत में महिलाओं ने प्रत्येक परिस्थितियों में खुद को साबित करने में कोई कोर कसर किसी प्रकार की नहीं छोड़ी है।

यहां आपको यह बताना आवश्यक होगा कि AAJKYA की टीम भारत की उन महिलाओं को खोजने का प्रयास कर रही है, जिन्होंने परिवार, समाज व राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका निभायी है, इसी कड़ी में CEO श्री हिमाँशु जी द्वारा ऐसी महिला का साक्षात्कार करने का निर्णय लिया, जिन्होंने महिलाओं के लिए काम करने का फैसला अपने बचपन से ही अपने पिता को देखकर कर लिया था. वे समाज को एक नई गतिमान दिशा प्रदान करने में सदैव तत्पर रहीं है। हम बात कर रहे है कूर्मि समाज की रत्न ’श्रीमती सुशीला सिंह’ की।

सुशीला सिंह कानपुर से सम्बन्ध रखती हैं. इनके पति श्री जय कुमार जैकी जहानाबाद क्षेत्र से विधायक है व उत्तर प्रदेश सरकार में कारागार मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वहीं स्वयं सुशीला जी भी अमौली की ब्लाॅक प्रमुख रह चुकी है। AAJKYA के श्री सुरेंद्र सैनी बवानीवाल जी ने श्रीमती सुशीला सिंह जी से जीवन के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की. तो पेश है उस दुरभाषी बातचीत के कुछ अंश-

सुशीला सिंह से हुयी वार्ता के दौरान उन्होंने अपने बारे में बताया कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के जहानाबाद के निकटवर्ती गांव पतारी में एक संयुक्त परिवार में हुआ है, उनके पिता श्री राम सहारे जी एडवोकेट एक प्रसिद्ध आदिवासी नेता थे जिन्होंने जंगली कबीले वासी और आदिवासियों के लिए बहुत काम किया. इनकी माताजी श्रीमती कलावती जी एक गृहिणी है. अपने पिता को देखकर ही इनमे समाजसेवा का जज्बा जन्म लेने लगा.सुशीला सिंह जी अपने पिता के लिए खुद अपने हाथ से बैनर लिखा करती थीं. उस समय प्रिंटिंग की मशीने नहीं हुआ करती थीं. ये अपने कॉलेज के प्रेजिडेंट के इलेक्शन में खडी हो चुकी हैं और जीत चुकी हैं. इनके पिता को इनके लिए राजनीति से जुडा लड़का चाहिए था इसलिए इनकी शादी जय कुमार जैकी जी से हो पायी. इनके दो भाई (बड़ा भाई एडवोकेट हैं और छोटा भाई रेलवे में इंजीनियर) हैं और एक छोटी बहन (इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पीएचडी) है। शिक्षा के क्षेत्र में इन्होने स्वयं भी विधि स्नातक की डिग्री ली हुई है और ये राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र से डबल एम.ए है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा सोनभद्र से ही हुई है. इनके ससुर और सास का नाम श्री राम आसरे जी और श्रीमती कृष्णा देवी जी हैं. इनके दो बच्चे हैं एक बेटी श्रेया सिंह जो कक्षा 11 में सिंधिया कन्या विद्यालय, ग्वालियर मध्यप्रदेश में है, यहां आपको यह बता दे कि सुशीला जी की पुत्री श्रेया एक पर्वतारोही भी है, श्रेया द्वारा वर्ष 2019 में साउथ अफ्रिका के किलीमंजरो में 5519 मीटर ऊचे पर्वत पर चढ़कर देश का तिरंगा फहराकर देश का मान बढ़ाया वहीं एक बेटा जतिन सिंह कक्षा 9 में सिंधिया स्कूल, ग्वालियर मध्यप्रदेश में ही अध्यनरत है। सुशीला जी की एक बात अच्छी लगी कि वह अपने दोनो बच्चों को स्वालंबी बनाना चाहती है, जिसके लिए वह प्रयासरत है और छोटी उम्र में ही अपने सभी तजुर्बे उनसे शेयर कर रही है

सुशीला जी हाल फिलहाल में ब्लॉक प्रमुख जहानाबाद के रूप में कार्य कर रहीं हैं और साथ ही ये ‘समर्पण’ नाम से अपना एक एन.जी.ओ. चला रही हैं. इनका एन.जी.ओ. काफी सामाजिक कार्य करता है जैसे-

एन.जी.ओ. काफी सामाजिक कार्य करता है जैसे-
महिलाओं को शिक्षित कर स्वावलम्बी बनाना
गर्भवती महिलाओं को जानकारी देना
गर्भवती महिलाओं को नवजात शिशुओं के लिए एक किट दी जाती है जिसमें पैदा हुए बच्चे की जरूरत की सभी चीजें होती है ताकि किसी तरह की बीमारी से उनका बचाव हो सके.
स्वच्छता के बारे में लोगों को जागरूक करना
कुपोषित बच्चों का संरक्षण और ईलाज
युवाओं की रोजगार हेतू कॉउंसलिंग करवाना
रक्तदान शिविर का आयोजन करवाना
महिलाओं को चित्रकारी सीखाना
पौधरोपण करवाना
स्वास्थ्य चैक-अप कैंप लगवाना
आम जनजीवन की समस्याओं से सरकार को अवगत करवाना
सड़कों, बिजली, पानी सम्बंधित कार्यों पर संज्ञान लेना.
लॉकडाउन के दौरान गरीब लोगों के खाने की व्यवस्था कराई.
मजदूरों को उनके घर पहुँचने में सहायता प्रदान करवायी.

लॉकडाउन के दौरान गावों में दौरे किए हालांकि मुझे मेरे एन.जी.ओ. के लोगों ने और बाकी लोगों ने मना किया था की आपको नहीं जाना चाहिए संक्रमण हो सकता है लेकिन मैं अपने सेवाभाव के चलते खुद को रोक नहीं सकी।

सुशीला सिंह जी बताती है की हम सिर्फ वादे नहीं करते बल्कि काम करके दिखाते हैं और हमें सरकारी अनुदान की किसी प्रकार से सहायता प्राप्त नहीं होती है।

उन्होंने हर कार्य को करने के लिए अपनी टीम के साथ स्वयं जिम्मेदारी ली और जुट गयी. उन्होंने ‘समर्पण’ की स्थापना की जिसमें वह स्वयं संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष है, इसके अतिरिक्त ब्लॉक प्रमुख भी है, ये अपने प्रयासों से जिले की महिलाओं के रहन-सहन और कमजोर माली हालत के चलते पिछड़ेपन को लगातार दूर करवाती जा रही है जिले को हाइटेक बनाने का काम लगातार कर रही है. उनका कार्य ज्यादातर उरई, जालौन, जहानाबाद में होता है इसलिए उनको शहर से बाहर नहीं जाना पड़ता लेकिन बच्चों के स्कूल में होने वाली मीटिंग के लिए वो विशेष रूप से चार बजे चलकर वहाँ पहुँचती हैं और जरूरत पडती है तो वहाँ रुक भी जाती है और अगले दिन वापिस आ जाती हैं.

सुशीला सिंह जी का कहना है की हम खुद को मॉर्डन कहते हैं, लेकिन सच यह है कि मॉर्डनाइजेशन सिर्फ हमारे पहनावे में आया है लेकिन विचारों से हमारा समाज आज भी पिछड़ा हुआ है, नई पीढ़ी की महिलाएं तो स्वयं को पुरुषों से बेहतर साबित करने का एक भी मौका गंवाना नहीं चाहती लेकिन गांव और शहर की इस दूरी को मिटाना जरूरी है.

हालांकि ऐसा कहना बेमानी होगा कि भारत में ऐसा नहीं हो रहा है यहां महिलाओं को उपर्युक्त कानून बनाकर काफी शक्तियां दी गई है लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी बहुत ज्यादा काम करने की गुंजाइश है, इसके बावजूद महिलायें अपनी जिम्मेदारियां बखूबी और बेहद सुंदरता से और खास बात बगैर किसी अपेक्षा के निभाये जा रही हैं. काम के दौरान कई बार भाषा की भी दिक्कत आती है लेकिन एहसास ऐसी चीज है जिसे बिना भाषा भी समझा जा सकता है।

सुशीला सिंह जी पटेल संघ, कानपुर से भी जुडी हुई हैं और समय समय पर संघ के कार्यक्रम में शिरकत करती हैं. वैसे उनका कहना है की वो किसी जाति विशेष या धर्म विशेष के लिए कार्य ना करके सभी वर्ग के लोगों के लिए काम करती हैं. जो भी उनके पास मदद के लिए आता है वो तो उनके लिए याचक है फिर वहाँ जाति या धर्म का कोई अर्थ नहीं रह जाता. सुशीला सिंह जी के पास मानवाधिकार की डिग्री भी है जो उन्होंने दिल्ली जाकर हासिल की थी. दरअसल उन्होंने एक विवाहित युवती को उसके ससुराल पक्ष के शोषण से बचाया था. युवती का पति और सास उसे मारते -पीटते थे जबकि वो उस समय गर्भ से थी.और सुशीला सिंह जी ने प्रयास करके उसे बचाया. आज वो युवती ससुराल से दूर स्वावलम्बी बनकर रह रही है. उस समय उन्हें मानवाधिकार की डिग्री की कमी महसूस हुई और उन्होंने इसे हासिल करने का सोचा, जिसे उनके द्वारा हयूमन राईटस की डिग्री भी समयानुसार प्राप्त की गयी।

एक-दो बार सुशीला सिंह जी ने गुलाबी-गैंग के साथ मिलकर कार्य किया लेकिन उनकी कार्यप्रणाली देखकर सुशीला सिंह जी अलग हो गयी, क्योकि उनका तरीका अलग है।

सुशीला सिंह जी रोटरी क्लब, कानपुर के सभी कार्यक्रमों में भी सम्मिलित होती हैं. इनसे सांस्कृतिक ज्ञान बढ़ता है और मनोरंजन भी हो जाता है. इनके कार्यक्रम जमीनी स्तर के होते हैं.

सुशीला सिंह जी के दोनों बच्चे हॉस्टल में रहते हैं लेकिन जब वे घर आते हैं तो सुशीला जी पूरा समय उनको ही देती हैं. उन्होंने घर में कोई नौकर नहीं रखा हुआ है. इन दिनों वो सप्ताह में तीन ही दिन काम पर जा रही हैं. क्योंकि बच्चों से जरुरी कुछ नहीं हैं. ये ही हमारा आनेवाला भविष्य हैं. माँ का रोल सबसे महत्वपूर्ण होता है. बच्चों की पढ़ाई को लेकर उन्होंने कभी शिकायत नहीं की क्योंकि बच्चे बड़े हो रहे हैं और समझदार हो रहे हैं. उनपर भरोसा है।

डिजिटल इंडिया के लिए अभी भी हमारे देश को बहुत समय लगेगा. आजकल स्कूल ऑनलाइन क्लास करवा रहे हैं लेकिन बहुत से बच्चों के घर में ऑनलाइन क्लॉस के लिए स्मार्टफोन ही नहीं है. हम तो लोगों के और सरकार के बीच में कड़ी हैं जो उनको बताते हैं की कोरोना के समय में यही संभव और सही है की घर से ही बच्चों को पढ़ाया जाए और उस समय माँ-बाप उन्हें चैक करते रहें।

सुशीला सिंह जी बहुत अच्छी चित्रकार भी हैं और इनके घर में इनकी बनायीं पेंटिंग्स लगी है और अब तो ये जानकारों को अपनी पेंटिंग्स का गिफ्ट भी देने लगी हैं.

अच्छे राजनेता में यह खूबी अवश्य होनी चाहिए कि जिसने उसे ताज पहनाया है उनका सम्मान करना आना चाहिए. उसे जनता को कभी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि जनता की बदौलत ही आज वो नेता है। वो डाउन टू अर्थ होकर काम करे। लोगों की दिक्कतों को दूर करने की पूरी-पूरी कोशिश करे. उसकी जुबान में मिठास हो। हमारे जाने के बाद हमारी अच्छी बातें, यादें और आदतें ही रह जाती है। जो अच्छा करता है उनको ही याद किया जाता है. अंत में उन्होंने जनता के लिए सन्देश दिया है की-

मास्क का इस्तेमाल करें
हाथों को सेनीटाईज करते रहें.
सबसे दो गज की दूरी पर रहें.
बिना वजह घर से बाहर ना निकलें.
अपनों के बीच सुरक्षित रहे.

कोरोनो एक ऐसी बीमारी है की पत्नी भी पति की नहीं हो पाती और पिता परिवार का नहीं हो पाता. ये बीमारी एक दूसरे को छूने की भी इजाजत नहीं देती। ऐसे में अपनी सुरक्षा स्वंय के पास है।

यदि आपको भी अपना साक्षात्कार व अन्य कोई भी जानकारी हमारे वेबपेज AAJKYA.COM पर देनी है तो आप 9058417006 पर सम्पर्क कर सकते हैं।