हमारा देश भारत  एक कृषि प्रधान देश है और कृषि पर ज़्यादा निर्भर करता है. आज हमारे देश के किसानो की स्तिथि किसी से भी छिपी नहीं है. अगर देश का किसान खुशहाल होगा तो पूरा देश अपने आप ही खुशहाली की तरफ बढ़ जाएगा.ऐसे हितकारी विचारों से ओतप्रोत और समझदारी से काम लेने वाले एक ऐसे शख्स से हम आपकी मुलाक़ात कराने जा रहे हैं जिन्हें किसानों का मसीहा कहा जाता है. और वो खुद भी किसान परिवार से सम्बन्ध रखते हैं. उनका नाम है श्री संतोष सिंह वर्मा जी. ये उत्तरप्रदेश के जाने पहचाने जनपद क्षेत्र बहराईच के रहने वाले हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लखनऊ में ही रहते हैं. इनके कार्यों ने समाज पर और किसानों के ह्रदय पर अमिट छाप छोड़ी है. अपने स्वच्छ और दूरदृष्टि भरे विचारों के कारण पूर्व युवा जेडीयू अध्यक्ष श्री संतोष कुमार वर्मा जी अपने कार्यक्षेत्र में बहुत मशहूर हुए हैं.AAJKYA के श्री सुरेंद्र सैनी बवानीवाल जी ने संतोष जी से उनके बारे में, उनकी जीवनशैली के बारे में, उनके कार्यों के बारे में और जीवन के अन्य पहलुओं के बारे में बातचीत की जिससे उनके नए रूप का भी पता चला. तो पेश है उनसे हुई दुरभाषी वार्ता के कुछ अंश-

सबसे पहले श्री संतोष वर्मा जी ने अपने बारे में बताया की उनका पूरा नाम श्री संतोष कुमार वर्मा है.उनकी जन्मतिथि 15 जुलाई 1994 है. वो कुर्मी (कृषक ) समाज से ताल्लुक रखते हैं. उनका इलाका उत्तरप्रदेश के जनपद बेहराईच में आता है.ये एक सफल डॉक्टर, वक्ता, लेखक, राजनेता, समाज सेवी, नायक और बेहतर इंसान हैं. वे अभी तक अविवाहित हैं और आजकल वे लखनऊ में परिवार के साथ रहते हैं.उनके छोटे से परिवार में उनके पिता – श्री डॉक्टर चेतराम वर्मा , माता – श्रीमती रमा देवी, दो बहनें – मंजू वर्मा, ऊषा वर्मा हैं.

उन्होंने शिक्षा में डाॅक्टरेड किया हुआ है. वो पेशे से डॉक्टर हैं और उनकी प्रैक्टिस लखनऊ में ही चल रही है.संतोष जी द्वारा लिखित विभिन्न विषयों पर लेख हर महीने प्रकाशित होते हैं.

राजनीति और समाज सेवा की तरफ रुझान के बारे में उन्होंने बताया की उनका स्वभाव ऐसा है की उनसे किसी का दुख-दर्द देखा नहीं जाता लेकिन उन्होंने गरीब लोगों को और उनकी समस्याओं को बहुत  करीब से महसूस किया  है. वो बचपन से ही ऐसे लोगों के लिए अपने बलबूते और ज्ञान से कुछ करना चाहते थे इसलिए उन्होंने डॉक्टरी के पेशे को अपना लक्ष्य बनाया.जैसे जैसे संतोष जी अपनी यौवनावस्था की तरफ अग्रसर हो रहे थे उन्होंने महसूस किया की अगर लोगों की सेवा करनी है तो लोगों का नेता बनना पड़ेगा क्योंकि बिना लीडर बने पावर हाथ में नहीं आती.और पावर लेने के लिए राजनीती में आना जरूरी हो जाता है. तो वहीं से उनकी राजनीति में शुरुआत हुई.सन 2014 में संतोष वर्मा जी बिहार के  श्री नितीश सिंह जी की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से एक सक्रिय कार्यकर्त्ता के रूप में जुड़े और उन्होंने बहुत अच्छे कार्य किए जिनसे उनका संगठन बहुत मजबूत हो रहा था और बहुत से  नए – नए अच्छे लोग उनकी पार्टी से जुड़ने लगे थे.   उनके कार्यों की गहनता को देखते हुए जनता दल यूनाइटेड द्वारा उत्तरप्रदेश  महासचिव यूथ के  बना दिए गए. कहते हैं कि सोने को कितना भी अंदर रखो वो अपनी चमक से अपनी मौजूदगी दर्शा ही देता है. कुछ ऐसा ही श्री संतोष वर्मा जी के साथ हुआ. उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उनके प्रभावशाली कार्यों को देखकर पार्टी आलाकमान ने सन 2015-16 में उन्हें वर्किंग प्रेजिडेंट यूथ घोषित कर दिया.यहाँ से संतोष जी का संघर्ष शुरू हुआ और किन्हीं कारणों से उन्हें वर्किंग प्रेजिडेंट यूथ के पद से हटा दिया गया. लेकिन संतोष वर्मा जी ने अपनी कार्यगति में कभी ठहराव नहीं आने दिया और उस दौरान की होने वाली सभी रैलियों में अपने दल-बल के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करवायी.चाहे बनारस की रैली हो, घाटमपुर, बहराइच, कानपुर की रैली हो उन्होंने पार्टी का  जनाधार तैयार करवाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की  लेकिन कभी-कभी भगवान ने हमारे लिए कुछ और ही सोच रखा होता है.अंदरूनी राजनीति का शिकार होकर संतोष जी को अपने कार्य से थोड़ा विराम लेना पड़ा.इस दौरान उनका डॉक्टरी का पेशा बहुत फल-फूल रहा था.

जनता दल यूनाइटेड पार्टी की नीतियों के बारे में संतोष वर्मा जी ने बताया की

  • सुशासन लाना और कायम रखना पार्टी की प्रथम नीति मानी जा सकती है.
  • सभी को अच्छा जीवन जीने का हक मिले.
  • किसी भी वर्ग से वादा-खिलाफ़ी ना की जाए.
  • गरीबों को पर्याप्त रोटी, कपड़ा, मकान और रोज़गार मिले.
  • युवाओं और महिलाओं को पूर्ण शिक्षा मिले.
  • किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम मिले
  • कृषि और कृषक को उभरने का मौका दिया जाए
  • प्राकृतिक आपदा के लिए प्रबंधन हो.
  • जनसंख्या नियंत्रण का क़ानून बने.
  • सभी धर्मों का समान सम्मान हो.
  • कोई भी व्यक्ति लोकतंत्र के अधिकारों से वंचित ना रहे.

संतोष वर्मा जी को पार्टी के कार्य से काफ़ी जगहों पर जाना पड़ता है जैसे बिहार आदि. उनकी पार्टी की मीटिंग भी बिहार में ही कृष्णा मेमोरियल हॉल में ही होती है. उनके ज्वाइन करने के बाद पार्टी में और पार्टी के बाहर बहुत से बदलावों ने जन्म लिया. जैसे  उस समय के पार्टी के अध्यक्ष श्री सुरेश निरंजन जी के साथ मिलकर कार्य करने का मौका मिला.पार्टी की छवि को बल मिला, लोगों का पार्टी पर विश्वास बढ़ा.सभाओं में लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई.लोगों की समस्याएं खुल कर सामने आने लगी, कार्यकारिणी का विस्तार हुआ.नए कार्यकर्त्ता आने लगे,नए और अनछुए गांवों के दौरे किए गए,पार्टी की पहुँच जन जन तक पहुँचने लगी.लोग अच्छे से जानने लगे की नितीश जी आने वाले समय में क्षेत्र और राज्य के विकास के लिए  क्या करना चाहते है.

संतोष वर्मा जी कहते हैं कि जब कोई किसान आत्महत्या करता है तो दिल को बहुत तकलीफ होती है. ऐसी घटनाओं के चलते उनकी टीम को सक्रिय रहना पड़ता है. अभी कुछ दिन पहले किसानों को गन्ने का पूरा मूल्य दिलवाने के लिए  भी उन्होंने अपने दल के साथ धरना दिया और विधानसभा का घेराव किया  जिससे सरकार का ध्यान इस तरफ गया.वो मानते हैं कि अभी किसानों  की बहुत सारी समस्याएं हैं जिनके निदान होने चाहिए वर्ना देश भी गर्त में चला जाएगा.क्योंकि किसानी एक ऐसा क्षेत्र है जिससे बहुत सारे रोज़गार के अवसर निकलते हैं.अगर किसान ख़त्म होने लगे तो सबकुछ ख़त्म हो जाएगा.आदरणीया सुषमा पटेल जी की मदद से ये मुद्दा विधानसभा और लोकसभा में उठाया जा रहा है. उन्होंने हमें पक्का आश्वासन दिया है. हमारे देश को सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे नेताओं की जरूरत है जिन्होंने सारी उम्र किसानों की भलाई के लिए कार्य किए. वो खुद भी किसान परिवार से थे.उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है. उन्होंने किसानों के लिए बहुत से आंदोलन भी किए थे.

बेरोजगारी के सवाल पर संतोष वर्मा जी ने बताया की युवाओं को नौकरी के साथ साथ स्वरोजगार पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि सरकार के पास सभी को देने के लिए नौकरियां नहीं है.माननीय नितीश जी ने बिहार में बहुत सारी नौकरियां निकाली ताकि स्तिथि थोड़ी बदल सके.शायद इसलिए वहाँ की जनता नितीश जी को पंद्रह सालों से सत्ता दे रही है.हमारा गठबंधन भाजपा से रहा है लेकिन दोनों का कार्य करने का तरीका अलग अलग है.कोई भी कार्यक्रम करवाने के लिए उन्हें किसी कि सहायता या अनुमति नहीं लेनी पडती.जैसे रक्तदान, पौधरोपण, अन्न वितरण, स्कूलों-कॉलेज के दौरे आदि. उनके कई प्रोग्राम लखनऊ में भी हुए हैं.आने वाले समय में हमने एक हज़ार गरीब कन्याओं का विवाह करवाने का कार्यक्रम रखा है. इन कार्यक्रमों में लगने वाला सारा ख़र्च हम सभी सदस्य मिलकर उठा लेते हैं.सच तो यह है की कभी ऐसी कोई जरूरत ही नहीं पड़ी. कोई अगर हमारे कार्य में रुकावट डालता है (राजनीती में यह आम बात है ) तो उसे अपने तरीके से समझा दिया जाता है.कभी कभी कोई जनता का काम करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चककर भी काटने पड़ते हैं. राजनीति जनसेवा है इसमें सभी तरह के कार्य करने होते हैं.उन्होंने हमसे एक वाकया साँझा किया कि पटेल समुदाय के कुछ घर जला दिए गए और सत्ता के प्रभावशाली लोगों द्वारा दबाव डालने से शहर की पुलिस भी उन उपद्रवियों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही थी तो हम और हमारे दलों ने संज्ञान लिए और काफ़ी मशक्क़त के बाद वह मामला सुलझ पाया.

आम आदमी को किसी पैराशूट उम्मीदवार को वोट नहीं देनी चाहिए. जनता को राजनेता चुनने से पहले देखना चाहिए की उम्मीदवार की नियत कैसी है और क्या वो उम्मीदवार मतदाताओं की उम्मीद पर खरा उतर पाएगा.जो जीतने के बाद जनता से दूरी ना बनाये और अपनी ज़िम्मेदारी समझें . कौन हमारे संघर्ष में हमारे साथ खड़ा है. हम बहुत दूर आ गए हैं. हमारी आज़ादी को 73 वर्ष से ज़्यादा हो गया है और अब वक़्त है हमारा अपनी जाति-बिरादरी से ऊपर उठकर मतदान करने का.किसी भी व्यक्ति को एक जाति कभी नेता नहीं बना सकती इसलिए एक अच्छे नेता को सभी जाति और धर्मो को साथ लेकर चलना चाहिए.

जनता के लिए उन्होंने सन्देश दिया कि कोरोना से बच कर रहें.जब तक ज़्यादा जरुरी ना हो बिन वजह घर से ना निकलें, कोरोना को लेकर सरकार के प्रोटोकॉल को ना बिगाड़ें. मास्क और सेनीटाईजऱ का इस्तेमाल करें.