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सोच-विचार

बदलाव (छोटी कथा)

जिंदगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे है ओर सोचते है कि क्या किया...

दृष्टि बाधित दिव्यांग छात्रा माधुरी पटेल बनी हाईस्कूल परीक्षा में प्रेरणास्रोत

खुदी को कर बुलंद इतना खुदा खुद आकर पूछे बता तेरी रजा क्या है ? जी हां इस वाक्य को बखूबी...

भारत को ग़रीबी मुक्त करेंगे IAS अधिकारी!

IAS भारत की सर्वश्रेष्ठ सेवा मानी जाती है जो सबसे कठिन परीक्षा UPSC को उत्तीर्ण करके प्राप्त की जाती हैं। देश...

आज का पूर्ण सत्य (बृज)

जीवन की यह सत्य विधा है,कर्म आप करते जाएं।चूक मार्ग अवरुद्ध करेगी,कदम सदा बढ़ते जाएं।। अपेक्षा का...

Celebrate a “HERO” in “White Coat” : National Doctor’s Day, 1st July

“The presence of the doctor is the beginning of the cure.” Indus Hospital Team

वेस्टइंडीज में शादी

जिस तरह से अपने देश भारत में शादी से पहले लड़के वाले और लड़की वाले एक दूसरे के संस्कारो और रीति रिवाज़...

लघुकथा: मां तुझे सलाम (प्रजापति )

प्रेम की कथाएं कैसे लिखूं, जब चारों तरफ़ गम के बादल छाए हैं।नमन है मेरा उन शहीदों को जो तिरंगा ओढ़...

प्रतिशोध की भावना (साव)

चीन क्या समझ रहा कि चुप रहेगा हिन्दुस्तानअपने वीर सपूतों के शहादत को यू सहेगा हिन्दुस्तानखड़े चारों दिशाओं में सब सेनाओं...

विलक्षण भानु

अपूर्व,अनुपम हे! दिवाकर,प्रकाश मुढिंत जीवन को देकर,मानवता का मान बढा़कर,हे! विलक्षण भानु भास्कर।।अर्पित कर यह जीवन सारा,घूम रहा है मुक्त गगन...

ऐसे बनेगा भारत आत्मनिर्भर

भारत की जनसंख्या विकराल होने के कारण आत्म निर्भर बनाना कठिन ज़रूर हैं लेकिन नामुमकिन नहीं। बहुत सारे लोगों के द्वारा सरकार...

कविता: भा गया है “उड़ता”

आज फिर चाँद नभ में छा गया हैआशिक को तेरा चेहरा भा गया हैसूरज की तपन जला रही थी मुझेजाते,आसमां में...

नीतिपरक दोहे (डाॅ. सुमन सुरभि)

रिश्ते नाते आजकल, हैं जैसे व्यापार।लाभ हानि सोचे बिना, करै न कोई प्यार।।माया को सब पूजते, व्यर्थ हुए जज्बात।धन के आगे...

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बादल की गड़गड़ाहट

धूल भरी आंधी , गर्मी, ज्यादा ठंड ऐसे अनेक प्राकृतिक वातावरण हमें पर्यावरण में देखने को मिलते हैं लेकिन सावन ! एक...

अब पहले जैसा जहां नहीं मिलता

ढूंढने से अब पहले जैसा,, जहां नहीं मिलता,मिल जाए नजर पर अब,, दिल नहीं मिलता अपने घर...

सुख और आनंद कहां हैं!

पापा आप ऑफिस से आकर न तो कुछ खेल खेलते हो, न टी.वी देखते हो और न कई घूमने जाते हो कितनी...

विवेकहीन राजनीति

राजनीति की सीढ़ियां चढ़ तुम,परहित भूल ही गए तुम,मानस का विवेक गवांकर तुम,किस राह पर चल पड़े हो तुम।१।