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कविता

नज़र सवालात हैं… (उड़ता)

सनम की ईताबी नज़र सवालातकरम है इश्क़ जवाबी बयानात नाराज़गी का अपना अलग मज़ादबाते हो लब ये…

हमे इंसाफ चाहिए

By- संजय कुमार बिश्नोई साँचौर जिस तिरंगे के लिए गोलियों से खेल गएहमे उस राष्ट्रध्वज के लोगो…

वतन की चाहत (कविता)

By- संजय कुमार बिश्नोई साँचौर  सुना है वो प्यार में फिदा हो गए,वे महान है या नही…

कविताः वक्त

By: अमित डोगरा.,पी.एच डी -शोधकर्ता ,गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ,अमृतसर वक्त बदलेगा,सब कुछ बदल जाएगा,आज तेरे साथ…

किसान की समस्या पर कविता

लेखक – संजय कुमार बिश्नोई साँचौर बेमौसम बरसात का, आनंद लेते कई लोग।पर कुछ बूंद उसके ,आँखो…

प्रेम के दीप जलाते रहना

डटा रहूँ मैं कर्म मार्ग पर,सीख यही सिखलाते रहना।भटक न जाऊँ दुर्गम पथ पर,धीरज मुझे दिलाते रहना।हो…

कमल

कोमलता,शुभ,निर्मलता का यह परिचायक है।नयनों को भाने वाले पुष्पों का नायक है।देव करों की शोभा है यह…

मन की बात “उड़ता”

वैसे तो बातचीत के कई प्रकार हैं लेकिन सबसे उत्तम जो बातचीत करने का तरीका है वो…

जेठ महीने का आतप…

जेठ के दारुण आतप से, सूख गई है धरतीलोग हुए बेचैन बहुत, उन्हें राहत नहीं मिलतीउन्हें राहत…

ऐ भारत तुझको आत्मनिर्भर होना है

ऐ भारत तुझको आत्मनिर्भर होना है।ऐ भारत तुझको आत्मनिर्भर होना है। धरती ये फिर से उगलेगी सोना,खेतों…

मां बाप को तुम बस प्यार करो

मंदिर पूजा, मस्जिद गयेगिरजाघर गये, पूजा सबने गुरूद्वारापर पूजा नहीं उस मां कोजिसने दूध पिलाया और लोरी…

काल (Vimal)

मैं तूफानों से निकला हूंमुझे आंधियों सेअब कोई डर नहीं,मैं महाकाल से मिला हूंमुझे काल सेअब कोई…

वो निर्मोही हुई (उड़ता)

रात  थी  कायनात  सारी  सोई  हुई हाथ  लगी  तस्वीर  तेरी  खोई  हुई कहने  को  तो  बस तेरी तस्वीर थी उसमें…

अब पहले जैसा जहां नहीं मिलता

ढूंढने से अब पहले जैसा,, जहां नहीं मिलता,मिल जाए नजर पर अब,, दिल नहीं मिलता अपने घर…

बहिष्कार: ऐप एक्शन झाकी है (साव)

ऐप एक्शन झाकी हैसारा बिजनेस अभी बाकी हैचीनी टिक-टाक ऐप हटाना हैभारतीय मैत्री ऐप लाना हैलोकल के…

मुक्तक: कहाँ गया बचपन

गंगा जी के पावन जल सा,कहाँ गया बचपन।ईश्वर की छवि जिसमें झलके,कहाँ गया दर्पन।अपने और पराये का…

नहीं कोई दवाई… (उड़ता)

तेरे पास मेरे मर्ज की नहीं कोई दवाईतेरी यादों ने कर दिया मेरा गम सवाई(एक और उसका…

आज का पूर्ण सत्य (बृज)

जीवन की यह सत्य विधा है,कर्म आप करते जाएं।चूक मार्ग अवरुद्ध करेगी,कदम सदा बढ़ते जाएं।। अपेक्षा का…

प्रतिशोध की भावना (साव)

चीन क्या समझ रहा कि चुप रहेगा हिन्दुस्तानअपने वीर सपूतों के शहादत को यू सहेगा हिन्दुस्तानखड़े चारों…

विलक्षण भानु

अपूर्व,अनुपम हे! दिवाकर,प्रकाश मुढिंत जीवन को देकर,मानवता का मान बढा़कर,हे! विलक्षण भानु भास्कर।।अर्पित कर यह जीवन सारा,घूम…

कविता: भा गया है “उड़ता”

आज फिर चाँद नभ में छा गया हैआशिक को तेरा चेहरा भा गया हैसूरज की तपन जला…

कविताः मुक्तक (मान सिंह)

है जिनका इतिहास दोगला देशभक्ति सिखलाते हैं,जो किये हमेशा गद्दारी वे हमको आँख दिखाते हैं,षड्यंत्रों से देश…

कविता: विडम्‍बना (डाॅ. सुमन सुरभि)

पहले तो नारी के अस्तित्व को माना…..दर्पण सा… काँच सा नाजुक,जिसका स्‍वरूप बिगड़ सकता हैअँगुली के एक…

कविता : मैं चलता रहा (इंदर भोले नाथ)

मृगतृष्णा सा होचला है मनन जाने किसकी खोज मेंभटक रहाउपवन उपवन व्याकुल होकरआतुर होकरहर रिश्ते सेजा दूर…

कविता: ऐसा तो है- ‘‘उड़ता’’

आज फिर वही मेरा सवाल तो हैकि तुझे कहीं मेरा ख्याल तो हैकैसे हाले-दिल पता चले तस्वीर…

कविता: एक फौजी

वो घर के चिराग, वो उजाले गये हैंकई ख्वाब दिलों में, संभाले गये हैंजब-जब उत्पात मचाई रावण…

जीवन हो नीलकंठ जैसा

जीवन हो नीलकंठ जैसा, विष का प्याला भी गृहण करेंपरमार्थ और सुखसैय्या में, परमारथ का ही वरण…

कविता: दरक हुआ

आज बदला है कहीं मौसमतभी आसमां मे दरक हुआक्यों हवायें रूठ गयी हैंबादलों में तर्क-वितर्क हुआऊष्मा भरी…

घर घर में नारी सीता है

घर घर में नारी सीता है, नारी ही भगवद गीता हैपर कहने वाले क्या जाने नारी पर…

छन्दः नेपाल प्रकरण

छोटी छोटी खुशियों में झूमते जो रहे कल,बड़े बड़े ख्वाब वो सजाने लग गए है।उंगली पकड़ जिन्हें…